नई स्थानान्तरण नीति से टूटेगा वर्चस्व, काट ढूंढने में लगे कर्मचारी

सिद्धार्थनगर: शासन की नई स्थानान्तरण नीति को लेकर सभी अफसरों व कर्मचारियों में हड़कम्प है। अभी तक कई वर्षों से से एक ही जिले में मनचाहे पटल पर कुण्डली मारकर बैठे अधिकारियों व कर्मचारी विभागों में अपने वर्चस्व को टूटने को लेकर चिन्तित हो गए है। शासन की नई नीति में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि ट्रांसफर को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा, जिसके बाद अधिकारियों व कर्मचारियों के होश उड़े हुए हैं। नई नीति का पालन होने पर सभी विभागों में नए चेहरे नजर आएंगे।

नई ट्रांसफर नीति के तहत इस बार कर्मचारी अपना ट्रांसफर भी नहीं रूकवा सकेंगे। जिसको लेकर सभी परेशान है। साथ ही अपने ही स्थान पर जमे रहने को लेकर कई अधिकारी व कर्मचारी इसका काट ढूढ़ने में लगे हुए हैं। जिले का शायद ही कोई ऐसा विभाग हो जहां पर कई ऐसे कर्मचारी है जो कि तीन-पांच वर्ष से नहीं बल्कि एक ही स्थान पर बीस वर्षों से जमे हुए हैं।

इसमें विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज विभाग, जिला पूर्ति, बाल विकास, लोक निर्माण, सिंचाई विभाग, कृषि विभाग सहित कई ऐसे विभाग है जहां पर कर्मचारी चार-पांच वर्ष नहीं बल्कि कई वर्ष से कुण्डली मारकर बैठे हैं। इसमें कई ऐसे भी कर्मचारी है जिन्होंने स्थानान्तरण न हो इसके लिए अपना प्रमोशन तक छोड़ दिया है। ऐसे में अब वह यह सोच रहे कि अब उनका क्या होगा। जिसके लिए उन्होंने प्रमोश छोड़ दिया अब वहीं काम करना होगा। शासन की नई ट्रांसफर नीति ने अधिकारियों कर्मचारियों के माथे बल दे दिया है।

काट व जुगाड़ ढूढ़ने में लगे अधिकारी व कर्मचारी

नई ट्रांसफर नीति को लेकर कई वर्षोँ से एक ही विभाग के एक ही पटल पर कुण्डली मारकर बैठे कर्मचारी अभी तक से ही नई ट्रांसफर नीति का काट व जुगाड़ ढूढने में लगे है। ऐसे में कर्मचारी अपनी पत्नियों के सहारे अपना ट्रांसफर रूकवाने का जुगाड़ बना रहे है।

शासन की मंशा के तहत एक ही स्टेशन पर अलग-अलग विभागों में पति-पत्नी एक ही जिले में अथवा एक ही क्षेत्र में तैनात है तो उन्हें यह लाभ मिलेगा कि दोनों में से किसी एक का स्थानान्तरण नहीं होगा। मसलन दोनों साथ ही एक ही जिला अथवा एक ही क्षेत्र में रहकर नौकरी करेंगे।

इसके अलावा विभागों में वर्चस्व के बूते अपनी हेकड़ी दिखाने वाले कर्मचारी तो यहां से लेकर लखनऊ तक नई ट्रांसफर नीति का कटा ढूढने में लगे हुए हैं। इसके लिए लखनऊ की परिक्रमा भी की जा रही है।

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