सिद्धार्थनगर: इंसेफेलाइटिस को लेकर गम्भीर हुयी सरकार, ये मछलियां लगाएंगी बीमारी पर रोक

सिद्धार्थनगर: पूर्वाचल में महामारी के रूप में जानी जाने वाले इंसेफेलाइटिस बीमारी को लेकर प्रदेश सरकार जब गम्भीर हुई तो जिम्मेदारों को दो वर्ष बाद गम्बूजिया याद आई। इससे पहले भी बीमारी से बचाव के लिए जिले के कई तालाबों में गम्बूजिया मछली डाली गई थी। जिससे मच्छरों को पनपने से रोका जा सके। लेकिन जिम्मेदारों ने दो वर्ष पहले तालाबों में गम्बूजिया को डालने के बाद भूल गए थे। गम्बूजिया मछली मच्छरों के लार्वा को खाती है जिससे मच्छरों को पनपने से रोका जा सकेगा।

मच्छरों का लार्वा गम्बूजिया मछली का प्रमुख आहार है। इन्हें अति गन्दे तालाबों में पाला जाता है। मच्छरों का लार्वा इनका आहार होने के कारण इन्हे मॉक्सकीटो फिस के नाम से भी जाना जाता है। यह मुख्य रूप से अस्टे्रलिया में पाई जाती है। भारत के दक्षिणी इलाकों में भी यह मछली पाई जाती है। जहां पर गम्बूजिया मछली होती है वहां पर मच्छर कम होते हैं।

पूर्वांचल में मच्छरों की संख्या अधिक होने व इन्हीं के कारण इंसेफेलाइटिस जैसी जानलेवा बीमारी को रोकने के लिए गम्बूजिया मछली का सहारा लिया जाएगा। दो वर्ष पहले जहां पर भी गम्बूजिया मछली को जिन क्षेत्रों में पाला गया था वहां पर पहले की अपेक्षा मच्छरों के पनपने की संख्या में कमी आई थी। इसके बाद अब प्रदेश सरकार के बीमारी के प्रति गम्भीर होने पर जिम्मेदारों को गम्बूजिया की याद आई। अब जिले के तालाबों में गम्बूजिया मछली का पालन किया जाएगा। जिससे कि क्षेत्र में मच्छरों को पनपने से रोका जा सके। इससे बीमारी को रोकने में काफी मदद मिलेगी।

मस्त्य पालन विभाग मंगाएगा मछलियों की खेप

जिले में मत्स्य पालन विभाग द्वारा गम्बूजिया मछली की खेप मंगाई जाएगी। जहां पर अधिक मच्छर पैदा होते हैं, ऐसे जगहों को चिन्हित कर वहां पर गम्बूजिया मछली का पालन किया जाएगा। इससे पहले भी जिले में गम्बूजिया मछली मत्स्य पालन विभाग द्वारा पाला गया था। उसका खर्च स्वास्थ्य विभाग ने उठाया था। मसलन मछली को मंगाने तथा तालाबों में उसके छिड़काव आदि में आने वाला पूरा खर्च स्वास्थ्य विभाग द्वारा उठाया गया था। इस वर्ष भी इसी व्यवस्था के तहत मछली का पालन किया जाएगा। जेई/एईएस को लेकर संवेदनशील व अति संवेदनशील गांवों को चिन्हित कर वहां के तालाबों में गम्बूजिया मछली का पालन किया जाएगा। जिससे कि वहां पर मच्छरो के पनपने से रोका जा सके।

दो दर्जन तालाबों में डाली गई थी गम्बूजिया

दो वर्ष पूर्व बीमारी से बचाव के लिए जिले के दो दर्जन तालाबों में गम्बूजिया मछली का पालन किया गया था। जिसमें शहर के भी तीन तालाब शामिल थे। गम्बूजिया मछली के पालन के असर का फीडबैक किसी विभाग के पास नहीं है। लेकिन विभाग नए सिरे से इस मछली के डाले जाने को लेकर कार्ययोजना तैयार करने में जुटा हुआ है। इससे इंसेफेलाइटिस के वाहकों को पैदा होने से रोका जा सकेगा

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