विधानसभा के बाद अब नगर निकाय चुनावों की तैयारी, नगर निगम में बढ़ सकते है दस वार्ड

गोरखपुर: प्रदेश में विधान सभा चुनाव खत्म होने के बाद अब नगर निकायों के चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है। शहरी क्षेत्र के नये बसे कालोनियों और बढ़ती आबादी के चलते अब नए परिसीमन के साथ सीमा विस्तार इस बार के चुनाव की खास बात होगी। नए परिसीमन में नगर निगम गोरखपुर में दस वार्ड बढ़ सकते हैं। जिले की सातों नगर पंचायतों में भी संख्या बढ़ सकती है। शासन ने इस सम्बन्ध में पहले ही नगरीय क्षेत्र के सीमा विस्तार की रिपोर्ट मांग रखी है।

बता दें कि शहरी क्षेत्र के विकास और अन्य मुलभुत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए महानगर में नगर निगम स्थापित है।जिसके क्षेत्राधिकार अंतर्गत एक निश्चित भू क्षेत्र और उसमें निवास करने वाले लोगों के लिए वार्ड निर्धारित किया गया है।वर्तमान में नगर निगम में 70 वार्ड हैं। प्रदेश के विधानसभा चुनावों के समाप्त होते ही अब पूरे प्रदेश में नगर निकाय चुनाव होने है।

चुनाव 2011 की जनगणना के आधार पर होने हैं, इसलिए वार्डो की संख्या बढ़नी तय है। नगर निगम ने इस संबंध में तैयारी शुरू कर दी है। सीमा विस्तार में दो दर्जन से अधिक गांव शामिल किए जाने हैं। शासन ने इस संबंध में प्रस्ताव मांगे हैं। नगर निगम प्रस्ताव तैयार कर रहा है और जल्दी ही इसे बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा। बोर्ड में मुहर लगने के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजा जाएगा। इनमे जनपद की सातों नगर पंचायतों में गोला, बांसगांव, पीपीगंज, पिपराइच, सहजनवां, मुंडेरा बाजार, बड़हलगंज शामिल हैं।

गोरखपुर में नगर पालिका की स्थापना 1869 में हुई। कालान्तर में यह 1982 में नगर महापालिका बनी।जिसका पहला नगर प्रमुख बनने का गौरव पवन बथवाल को हासिल है। बाद के दिनों में इसे 1994 में नगर निगम का दर्जा प्राप्त हुआ।नगर निगम के पहले महापौर राजेन्द्र शर्मा थे।

नगर निगम बनने के बाद 70 वार्डो वाले इस शहर ने कई उतार चढ़ाव देखे हैं। खासतौर से किन्नर आशा देवी का 1999 में यहां का मेयर निर्वाचित होना इनमें से एक है।यहां के पार्षदों के चुनाव में हमेशा दलीय प्रतिस्पर्धा रहती है।जिसमे बहुमत के आधार पर महापौर का चयन होता है। हालाँकि अभी इस नगर निगम के महापौर की सीट बीजेपी के कब्जे में है।

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