पूर्वांचल के नायक

विकास पुरुष कल्पनाथ राय, जो कहलाते हैं मऊ (मऊनाथ भंजन) के शिल्पी

गोरखपुर: अगर राजनीति में किसी नेता की बात होती है, तो सबसे पहले उसके द्वारा जनहित में किये गए कामों की बदौलत याद किया जाता है। गोरखपुर के पड़ोसी जनपदों में शरीक मऊ में अगर विकास की बात होती है तो आज भी भाषणों में मऊ (घोसी )के शिल्पी के रूप में कल्पनाथ राय जिक्र होता है।

कहा जाता है कि घोसी या फिर पूर्वाचल के तरक्की की बात हो और कल्पनाथ की चर्चा न हो तो सबकुछ अधूरा-अधूरा सा लगता है।

गौरतलब है कि गोरखपुर विश्वविद्यालय में डबल एमए, एलएलबी की पढ़ाई के दौरान ही राजनीति में कदम रखने वाले कल्पनाथ राय 1974 में हेमवंती नंदन बहुगुणा व श्रीमती इंदिरा गांधी के कहने पर कांग्रेस में शामिल हुए।

आजमगढ़ से अलग मऊ को स्वतंत्र जिला (19 नवम्बर 1988 को) बनवाने के बाद कल्पनाथ उसकी समृद्धि में जुट गये। उसी समय वे राज्यसभा के सदस्य बने और अगले दो कार्यकाल में वे उच्च सदन में ही रहे। वर्ष 1982 में उन्होंने संसदीय कार्य व उद्योग मंत्री के रूप में दो मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 1993-94 में खाद्य राज्य मंत्री रहते समय कल्पनाथ का नाम चीनी घोटाला में भी आया। उन्हें जेल भी जाना पड़ा लेकिन वे पाक साफ निकले।

घोसी से चार बार सांसद कल्पनाथ राय ने अंतिम चुनाव समता पार्टी के बैनर से लड़ा था। हालांकि बाद में वे कांग्रेस में चले गये। पूर्वाचल की तरक्की कल्पनाथ के जेहन में रची-बसी थी। विकास की इबारत लिखने वाले व चार बार सांसद रहे कल्पनाथ राय वर्ष 1989 से 6 अगस्त 1999 तक हमेशा विकास और सिर्फ विकास को ही अपना मुद्दा बनाया।

मुद्दे भी सिर्फ चुनाव जीतने के लिए नहीं गढ़े बल्कि उसे अमली जामा भी पहनाया। घोसी के विकास की एक-एक ईंट आज भी कल्पनाथ की गाथा बयां करती है। शायद यही वजह है कि दल-पार्टी से अलग घोसी का हर नेता या जनप्रतिनिधि आज भी कल्पनाथ की सोच को आगे बढ़ाने की दुहाई देता नजर आता है। न सिर्फ घोसी बल्कि पूर्वाचल के अन्य जिलों बलिया, गाजीपुर और यहां तक कि वाराणसी की तरक्की में भी कल्पनाथ का बड़ा योगदान रहा।

वाराणसी में कमलापति त्रिपाठी की स्मृति में सब स्टेशन हो या बलिया के सिकंदरपुर टीका देवरी नगपुरा या गाजीपुर में उपकेन्द्रों का जाल। बिजली व सड़क उनकी प्राथमिकताओं में था। घोसी में कसारा पावर हाउस, डिजिटल दूरदर्शन केन्द्र,ढाई से तीन सौ सब स्टेशन,छोटे से शहर में तीन ओवरब्रिज,एशिया का दूसरा गन्ना अनुसंधान केन्द्र,मऊ को बड़ी लाइन, सौर ऊर्जा केन्द्र आदि तमाम विकास कार्य कल्पनाथ के प्रयासों की देन हैं।

तरक्की और सिर्फ तरक्की ही कल्पनाथ का चुनावी एजेंडा था। विकास के जो वायदे किये उसे पूरा करके भी दिखाया। बावजूद इसके उन्हें लोकसभा चुनाव में जीत के लिए पापड़ बेलने पड़ते थे। इसकी वजह उस समय भी जाति व धर्म की राजनीति अपनी जड़े जमाने लगी थीं। विकास की लम्बी श्रृंखला घोसी संसदीय क्षेत्र में प्रस्तुत करने के बाद भी कल्पनाथ राय का चुनाव जातीय समीकरणों में उलझ कर रह जाता था।

हालांकि इसके बावजूद क्षेत्र की जनता का उन्हें भरपूर आशीर्वाद मिलता रहा। यह सच है कि विरोधियों के पास कल्पनाथ के खिलाफ कोई मुद्दा नहीं होता था ,बावजूद इसके जाति-धर्म के नाम पर वोट हथियाने का नुस्खा खूब आजमाया जाता था।

6 अगस्त 1999 को कल्पनाथ राय के निधन के बाद घोसी संसदीय क्षेत्र के विकास का पहिया तो थमा ही, राजनीतिक विरासत की थाती को भी परिवार के लोग सहेज नहीं सके। निधन के बाद उनकी पत्नी ने कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा तो उनके खिलाफ बेटा और बहू ही ताल ठोंकने लगे। नतीजा कल्पनाथ की विरासत तार-तार होती नजर आने लगी।

उधर घोसी के लिए कल्पनाथ के विकास कार्यो पर भी विराम लगता दिखने लगा। भारत का पहला और एशिया का दूसरा गन्ना अनुसंधान संस्थान कल्पनाथ राय ने मऊ के कुसमौर में स्थापित कराया। लेकिन इसी बीच उनके निधन के बाद उचित पैरवी के अभाव में संस्थान बंगलौर को स्थानांतरित हो गया। हालांकि उस भवन में अब पूर्वाचल का इकलौता राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो (एनबीएआईएम)व बीज अनुसंधान निदेशालय (डीसीआर)संचालित हो रहा है।

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