किसान रैली समाजवादी पार्टी की, सवाल भी उन्ही से: पूर्व विधायक मदन गोविंद राव

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कुशीनगर: रविवार को सपा द्वारा आयोजित शहीद किसान मेले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता व पूर्व विधायक मदन गोविंद राव ने कहा कि वर्ष 1992 के गोलीकांड के बाद प्रति वर्ष समाजवादी पार्टी द्वारा 10 सितम्बर को रामकोला मे किसान मेला के बहाने भाजपा को कोसने एवं किसानो के प्रति हमदर्दी दिखाने का सपा द्वारा आयोजन किया जाता है

सत्ता से बाहर होने के बाद इस वर्ष किसान मेला के जगह पर किसान रैली करने की घोषणा की गयी है जिसमे पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश के तीन दर्जन जनपदो के सपाइयो को पूरी लाव लश्कर एवं तैयारी के साथ रामकोला मे जूटने का निर्देश सपा राज्य नेतृत्व द्वारा दिया गया है। सपा द्वारा खोयी गयी जमीन को वापस पाने का यह राजनीतिक जेहाद (जद्दोजहद ) है।

उन्होंने कहा कि यह सच है कि वर्ष 1992 मे पंजाब चीनी मिल रामकोला पर गन्ना मूल्य का 9 करोड़ रुपए बकाया था जिसे दिलाने के नाम पर आन्दोलन चल रहा था, आन्दोलन हिंसक होने पर चली गोली से दो व्यक्तियो जमांदार मिया एवं पड़ोही हरिजन की मौत हो गयी थी, उस समय राज्य मे कल्याण सिंह एवं केन्द्र मे नरसिंह राव सरकार थी, यह भी सच है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि सक्रिय भूमिका मे रहते तो उक्त काण्ड नही हुआ होता?

श्री राव ने कहा घटना के बाद मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने चीनी मिल मालिक ध्रुवमोहन साहनी को गिरफ्तार कराकर भुगतान कराया था तथा घटना की जांच के लिए कमिश्नर को नामित कर दिया था लेकिन केन्द्रीय सत्ता वाली कांग्रेस पार्टी एवं सपा नेता पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कमिश्नर से जांच कराने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया तथा पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने पूरे प्रदेश मे जेल भरो आंदोलन प्रारम्भ कर दिया फलतः कल्याण सिंह जी ने न्यायाधीश दूबे को नामित कर न्यायिक आयोग बना दिया तथा उक्त आयोग ने मुस्तैदी से किसान पक्ष, आन्दोलनकारी पक्ष , चीनी मिल एवं स्थानीय प्रशासन तथा आम नागरिको से पूछताछ एवं साक्ष्य इकत्रित किया एवं कुछ दिनो मे रिपोर्ट सौंपने का एलान कर दिया।

इसी बीच प्रदेश मे मुलायम सिंह जी मुख्यमंत्री बन गये तथा उन्होंने आते ही जस्टिस दुबे वाली न्यायिक आयोग को बिना रिपोर्ट सौंपने का मौका दिये बिना ही भंग कर दिया तबसे रामकोला की जनता जानने की प्रतीक्षा मे है कि वास्तव मे गोली किसने चलायी ? पुलिस गोली से मृत्यु हुयी या किसी अपराधी के गोली से या किसी अन्य कारण से? जिस चीनी मिल के खिलाफ कथित आन्दोलन हुआ था उस पर उक्त दोनो मृतक का कोई गन्ना मूल्य बकाया था कि नही?

श्री राव ने कहा कि आश्चर्य की बात है कि प्रति वर्ष चीनी मिल के परोक्ष संसाधन से किसान मेला लगता रहा है इस वर्ष तो चीनी मिल के साथ कुछ अन्य लोग भी उत्साह से किसान रैली सफल बनाने की जीतोड़ प्रयास कर रहे है, लाखो करोड़ो रूपया जो खर्च हुआ उसका कुछ हिस्सा भी जमादांर मिया तथा पड़ोही हरिजन के घरवालो को दे दिया गया होता तो उनकी जिंदगी थोड़ी सहज हो जाती ?

बहरहाल प्रतिवर्ष यह प्रश्न उठता रहेगा कि पड़ोही हरिजन एवं जमांदार मिया का वास्तविक कातिल कौन है तथा कथित नेताओ का असली उदेश्य क्या था? जस्टिस दुबे आयोग पर्दा उठा सकता था लेकिन संकीर्ण राजनीति के भेट गया, बाद के वर्षो मे विशेषकर सपा एवं काग्रेस शासन काल मे तो उक्त चीनी मिल पर पचास साठ करोड़ रूपये तक बकाया रहा है, योगी सरकार मे तो बकाया नही है।