‘मै साधू, बाकी चोर’ की तर्ज पर राजेश त्रिपाठी ने हाता, सतीश मिश्रा, माया, नसीमुद्दीन पर साधा निशाना

गोरखपुर: समय समय पर फेसबुक पोस्ट के माध्यम से खीज, दर्द और दूसरों पर अपना गुस्सा उतारने वाले पूर्व मंत्री, बसपा के टिकट पर चिल्लूपार से दो बार के विधायक और अब भाजपा नेता राजेश त्रिपाठी ने एक बार फिर सोशल मीडिया के माध्यम से एक साथ पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी और उनके परिवार सहित बसपा सुप्रीमो मायावती, सतीश मिश्रा और ताजा ताजा पार्टी से बाहर किये गए नसीमुद्दीन सिद्दिकी पर जम कर निशाना साधा है।

हलाकि अपने पोस्ट में राजेश त्रिपाठी ने अपने आप को पीड़ित, ईमानदार और औरों से अलग नेता साबित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है।

त्रिपाठी लिखतें हैं, ”क्यों सिद्दिकी साहब….!
जब पूरे माफिया परिवार से 5 करोड़ रूपये “बहन जी” को दिलाकर मिश्रा जी ने उन्हें बसपा में शामिल कराया था…तब नहीं एहसास हुआ था कि “बहन जी” को कई प्रकार के गिरोहों को पालने का शौक है…?
हमने तो आप से मिलकर ऐतराज भी जताया था….!
आपने तब एहसास क्यों नही किया कि वे वाकई ब्लैक मेरर हैं?”

पूर्व विधायक यहीं नहीं रुकते हैं। आगे लिखतें हैं,” जब लोकायुक्त को मिश्रा जी और शशांक शेखर जी ने शीशे में उतारकर मेरे खिलाफ सबूत न होने के बावजूद फैसला करवाया था…. तब भी तो हमने आपसे इस सारी साजिश को बताया था….!
आपको उनके ब्लैकमेरर होने का एहसास तभी कर लेना चाहिए था ….?

उन्होंने लिखा है,”मुक्तिपथ के लिए जिस दिन हमने राज्य मंत्री पद का परित्याग किया,… उसके दूसरे ही दिन वर्तमान वाले चिल्लूपारी को राज्य मंत्री पद से नवाज दिया गया था…. तब भी तो आप सब जानते रहे कि यह सब कुछ हमें शिकार करने की कवायद रही…!
आपने तब भी कहां माना कि वे क्या करा रही हैं अपने गिरोह के हाथों ….?

हरिशंकर तिवारी परिवार पर निशाना साधते हुए त्रिपाठी लिखतें हैं, ”2010 में जब उसी माफिया परिवार द्वारा जो बसपा में अपनी जड़ें गहराता जा रहा था, मेरी हत्या की सुपारी दी गई थी…तब हम आपसे भी तो मिले थे…. पूरे मामले की जांच कराकर मामले की तह तक जाने की बात कही थी….कि जब वह अपराधी पकड़ लिया गया था…. और बता भी दिया कि जेल में बन्द और फिर फरार किस अपराधी को मेरी सुपारी दी गई थी और उसी के कहने पर वह हमारा शिकार करना चाहा था… फिर सबूत मिटाने की गरज से उसे ठोंकवा दिया गया था….!
आपने तब क्यों नहीं एहसास किया कि वे अपने लाभ के लिए किसी भी हत्या कराने वाले का समर्थन कर सकती हैं …?
आपको अब लगा कि वे हत्या कराने वालों को पालती रहती हैं….?

उन्होंने आगे लिखा है,”2012 में दुबारा जीतने पर फिर अगले ने हमें रास्ते से हटाने की साजिश रची थी…. आपको ही नही ” बहन जी ” को भी लिखित में सबकुछ बताया था….! आपने कुछ किया क्या…?

बसपा प्रमुख मायावती पर 10 करोड़ लेकर चिल्लूपार विधान सभा का टिकट विनय शंकर तिवारी को बेचने का आरोप लागाते हुए त्रिपाठी लिखतें हैं,”जब चिल्लूपार का दस करोड़ में सौदा किया जा रहा था तब आप भी तो मैनेज हो गये थे…. तब तो मिसीर जी के साथ आप का भी बड़ा प्यार उमड़ रहा था…. अब वही आपको भी मैनेज करने वाले लोग आपको गद्दार कह रहे हैं….! कैसा महसूस कर रहे हैं….?

“जिस दिन हमने व्यथित होकर बसपा छोड़ी… या यह कहिये कि छोड़ने की बोहनी कराई….. उस दिन आपने कम से कम बीस बार फोन किया था… मगर हमने बात नहीं की … बाद में मिलने पर आपने कहा कि हमें आप पर भरोसा करना चाहिए था… क्योंकि बहन जी से आप सब ठीक करा देते…!
क्या भरोसा करता….?…. आप पर तो वही भरोसा नही करती थीं….आप हमारा क्या ठीक कराते….. आपको तो उन्होंने खुद ही ठीक कर दिया….!”

त्रिपाठी आगे सीएम योगी आदित्यनाथ की तारीफ़ में कसीदे पढ़ते हुए लिखतें हैं की “लाख गुना अच्छा हुआ कि पूज्य महाराज जी और आदरणीय शुक्ला जी तथा श्री जुगल किशोर जी का संदेश पाकर हम राष्ट्रीय नेताओं का आशीर्वाद लेकर उस कीचड़ से निकल कर यहाँ आ गये जहाँ कमल है…. साक्षात् “नरेन्द्र” हैं…. साक्षात “आदित्य” हैं….साक्षात केशव हैं… साक्षात “शिव” हैं….!”

हलाकि राजेश त्रिपाठी यह बताना भी नहीं भूलते हैं की भाजपा में भी हरिशंकर तिवारी का प्रभाव है और पार्टी में कुछ लोग उनके कद्रदान हैं।

“यहाँ न कोई महारानी हैं… न ही कोई ब्लैकमेरर है….. हाँ अलबत्ता यहां भी हाता परिवार के कुछ छोटे, कुछ बड़े कदरदान जरूर हैं….!
फिर भी यहां बहुत शकून है…. वहाँ जीत के बावजूद शकुनियों के चलते शकून नहीं था…. यहाँ पराजय के बावजूद भी देश के लिए चार कदम चलने वालों का साथ पाकर शकून है….!”

बीते विधान सभा चुनाव की हार की टीस राजेश त्रिपाठी को अभी भी सालती है। उन्होंने लिखा है की पार्टी में बड़े नेताओं ने तो उनको स्वीकार कर लिया लेकिन कुछ स्थानीय नेता अभी भी उनको स्वीकार नहीं कर पा रहें हैं।

उन्होंने लिखा है की “हाँ कभी-कभी पीड़ा हूक बनकर उठ जाती है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष से लेकर बूथ अध्यक्ष तक नें तो हमें स्वीकारा ही बल्कि 75000 मत देकर जनमानस ने भी स्वीकार कर लिया… बस कुछ खास लोग हैं…. जिनके गले हम उतर नहीं पा रहे… कभी-कभी कुछ शरणार्थी टाईप का एहसास करा देते हैं…. वे हमारे अपने दल के अपने….!” …..फिर भी हमारा कलेजा 56 इंच का हुआ जा रहा….!….अपनी कहिये…..?

अंत में त्रिपाठी लिखतें हैं, “कैसा लग रहा… क्योंकि वो आप ही थे जो हमें श्मशान से बसपा की तरफ अंगुली पकड़ कर ले गए थे…. और आपके और “झूठ की देवी” के आश्वासन पर यह कलम का अदना सा सिपाही माफिया से भिंड़ ही नहीं गया था बल्कि पटक कर राजनीति से बाहर भी कर दिया … और जब हमारे पर बन आयी थी तो आपने मुँह मोड़ लिया…. सोचियेगा कैसा लगा होगा….?

यह पहला मौका नहीं है जब राजेश त्रिपाठी ने फेसबुक का इस्तेमाल अपने विरोधियों पर प्रहार करने के लिए किया है। इससे पहले वो अपनी ही पार्टी के जिला पंचायत सदस्य माया शंकर शुक्ला पर निशाना साध चुके हैं।

Martia Jewels
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