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जानिये मोदी के 19 नए मंत्रियों और उनके क्वालिफिकेशन के बारे में

New-ministers-of-Modi-goverनई दिल्ली: ढाई साल पुरानी मोदी सरकार के 20 महीने बाद हुए दूसरे कैबिनेट फेरबदल में 19 नए मंत्री बनाए गए हैं। नए चेहरों के सिलेक्शन में मोदी ने उनके क्वालिफिकेशन और टैलेंट पर ज्यादा फोकस किया गया। एक कैंसर सर्जन, एक संविधान विशेषज्ञ, एक पूर्व कुलपति, एक एग्रीकल्चर एक्सपर्ट और एक पूर्व आईएएस को शामिल किया गया है। मोदी ने दो नेताओं को मंत्री बनाकर उन्हें बर्थडे गिफ्ट भी दिया है।
1. एग्रीकल्चर : गुजरात से मनसुख मंडाविया मंत्री बने हैं। वे एग्रीकल्चर मामलों के एक्सपर्ट माने जाते हैं।
2. मंत्री रहने का एक्सपीरियंस : पुरुषोत्तम रूपाला और एसएस अहलूवालिया को पहले भी मंत्री पद संभालने का अनुभव है। जसवंतसिंह भाभौर और महेंद्र नाथ पांडे अपने-अपने राज्यों में सीनियर मिनिस्टर रह चुके हैं।
3. लॉ एंड कॉन्सटीट्यूशन : राजस्थान के पीपी. चौधरी मंत्री बनाए गए हैं। वे सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट हैं। वे कॉन्सटीट्यूशन एक्सपर्ट भी हैं।
4. मेडिकल : सुभाष राम राव भामरे जानेमाने कैंसर सर्जन हैं। टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल में लंबे वक्त तक रहे। बाद में सांसद बने।
5. पॉलिसी-पॉलिटिकल एक्सपर्ट: एमजे. अकबर जर्नलिस्ट हैं। उन्हें फॉरेन पॉलिसी का जानकार माना जाता है। वे पॉलिटिकल एनालिस्ट भी हैं।
6. एडमिनिस्ट्रेशन : अर्जुनराम मेघवाल आईएएस रहे हैं। ऐसे ही अनिल माधव दवे राइटर और एनवायरमेंट मामलों के एक्सपर्ट हैं।
7. एजुकेशन एंड एडमिनिस्ट्रेशन : राजस्थान के नागौर से सांसद सीआर चौधरी मंत्री बने हैं। वे बर्मिंघम यूनिवर्सिटी के पासआउट हैं। मेवाड़ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर रहे हैं। वे राजस्थान एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेस के अॉफिसर रहे हैं।
8. साइकोलॉजी: अनुप्रिया पटेल ने दिल्ली के श्रीरम कॉलेज से साइकोलॉजी में डिग्री ली है। अनुप्रिया ने एमबीए भी किया है।
दो मंत्रियों को बर्थडे गिफ्ट
सुरेंद्रजीत सिंह अहलूवालिया यानी एसएस अहलूवालिया सोमवार को ही 65 साल के हुए हैं। अहलूवालिया कांग्रेस की नरसिम्हा राव सरकार और एनडीए की वाजपेयी सरकार में मंत्री रह चुके हैं।
अनिल माधव दवे बुधवार को अपना 60वां बर्थडे मनाएंगे। राइटर और एनवॉयरमेंटल एक्टिविस्ट दवे मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं।
टैलेंट पर ज्यादा ध्यान दिया
सूत्रों के मुताबिक, मोदी ने कास्ट और रिलीजन पर ज्यादा फोकस करने के बजाए काम और टैलेंट पर ज्यादा ध्यान दिया। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी चाहते थे कि ऐसे लोगों को मंत्री बनाया जाए जो प्रोफेशनली एक्सपर्ट हों। ये इसलिए भी जाहिर होता है क्योंकि आज जिन मंत्रियों ने शपथ ली, उनमें से ज्यादातर किसी न किसी सब्जेक्ट में एक्सपर्ट हैं।
ऐसे बनाया पॉलिटिकल बैलेंस
राजस्थान : दो मंत्रियों सांवरलाल जाट और निहालचंद की छुट्टी हुई लेकिन तीन नए मंत्रियों अर्जुन राम मेघवाल, सीआर चौधरी और पीपी चौधरी को मौका मिला।
यूपी : यहां अगले साल चुनाव हैं। यहां से तीन चेहरे अपना दल की अनुप्रिया पटेल शाहजहांपुर से सांसद कृष्णा राज और चंदौली से सांसद महेंद्रनाथ पांडे मोदी कैबिनेट में शामिल किए गए हैं। अनुप्रिया यूपी के पूर्व नेता सोनेलाल पटेल की बेटी हैं और कुर्मी जाति से हैं। ये जाति यूपी में बड़ा वोट बैंक हैं। उन्हें कांग्रेस से सपा में गए बुजुर्ग कुर्मी नेता बेनी प्रसाद वर्मा का जवाब मान जा रहा है।
उत्तराखंड : यहां भी 2017 में चुनाव होंगे। यहां दलित नेता और अल्मोड़ा से सांसद अजय टम्टा को मौका मिला है।
हालांकि, एक और चुनावी राज्य पंजाब से किसी को मौका नहीं मिला।
उम्र का फैक्टर
उम्र भी एक बड़ा फैक्टर था। मोदी ने 75 साल से ऊपर के किसी नेता को मंत्री नहीं बनाया। हालांकि, नजमा हेपतुल्ला और कलराज मिश्र को 75+ होने के बावजूद कैबिनेट में बरकरार रखा है।
सूत्रों के मुताबिक, मोदी ने पहले ही साफ कर दिया था कि जो मंत्री हैं उन्हें परफॉर्म करना ही होगा। बताया जाता है कि किसको क्या काम दिया जाएगा, ये पहले ही तय किया जा चुका है।
मंत्रियों के लिए क्लियर मैसेज है कि वे गांव, गरीब और किसान को ध्यान में रखकर काम करें।
इनकी हुई छुट्टी
एमके कुंदरिया – कृषि राज्य मंत्री थे।
निहालचंद – रसायन मंत्री रहे। श्रीगंगानगर से सांसद निहालचंद एक रेप केस में नाम आने के बाद से विपक्ष उन पर सवाल उठाता रहा है।
सांवरलाल जाट – जल संसाधन राज्य मंत्री थे।
मनसुख वसावा – आदिवासी मामलों के राज्य मंत्री थे।
रामशंकर कठेरिया – मानव संसाधन राज्य मंत्री रहे।
इन्हें नहीं मिला प्रमोशन
पुराने मंत्रियों में सिर्फ प्रकाश जावड़ेकर को प्रमोट किया गया है। पर्यावरण मंत्री जावड़ेकर राज्य मंत्री थे। अब कैबिनेट मंत्री बनाएगए हैं।
पावर मिनिस्टर फॉर स्टेट पीयूष गोयल को इंडिपेंडेंट चार्ज से प्रमोट कर कैबिनेट मंत्री बनाने की चर्चा थी। लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला।
अगर नजमा हेपतुल्ला की उम्र के चलते छुट्टी होती तो मुख्तार अब्बास नकवी को अल्पसंख्यक मामलों के कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिल सकता था।
पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को मोदी उनके पोर्टफोलिया की अहमियत के मद्देनजर कैबिनेट मंत्री के तौर पर प्रमोट करने की चर्चा थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वे अभी मिनिस्टर फॉर स्टेट इंडिपेंडेंट चार्ज हैं।
सूत्रों के मुताबिक, मोदी ने कास्ट और रिलीजन पर ज्यादा फोकस करने के बजाए काम और टैलेंट पर ज्यादा ध्यान दिया।
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