कुशीनगर में शहीद किसान मेला के बहाने सपा तलाशने मे लगी है अपनी जमीन

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कुशीनगर (मोहन राव): कभी समाजवादी पार्टी का गढ़ कहे जाने वाले जनपद कुशीनगर में 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को गहरा धक्का लगा। सपा इस जनपद में अपना खाता तक खोल पायी। पार्टी के दिग्गज नेताओं को यह बात बार-बार चुभ रही थी।

हार के बावजूद सपाई चुप नहीं थे लेकिन एक विशाल मंच की दरकार थी। वह मंच मिल ही गया यानी 10 सितंबर रामकोला में सपा का आयोजित किसान शहीद मेला। जिसके मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव हैं।

जनपद में पार्टी के अंदर एक दूसरे के धुर विरोधी नेता अपनी गुटबाजी छोड़ कर एक मंच पर आकर कार्यक्रम को सफल बनाने का भरपूर प्रयास कर रहे हैं जिसके अगुआ हैं 10 सितंबर 1992 के घटना के नायक राधेश्याम सिंह। रामकोला स्थित त्रिवेणी शुगर मिल की पड़ाव में 10 सितंबर के कार्यक्रम के लिए विशाल पंडाल बना रहा है। वृहद पंडाल को देख कर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसानों के कार्यक्रम की बहाने सपा पूर्वांचल में बिगुल फूंकने जा रही है।

सपा के लिए 10 सितंबर 1992 का रामकोला कांड विशेष है क्योंकि इस कांड के बाद सपा पूर्वांचल के बुद्ध की धरती पर अपनी पार्टी को मजबूत किया। इसी कांड के बाद सपा को राधेश्याम सिंह जैसा जमीनी, संघर्षशील नेता मिला। आगामी कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु सपा ने पूरी ताकत झोंक दी है।

2017 के चुनाव में जो जनपद में गुटबाजी सपा के अंदर चल खूब चली। उस को भुलाकर सभी जमीनी नेता एक मंच पर आ गए हैं। इनको लगने लगा है कि एक मंच पर आकर आकर ही बिगुल बजाया जा सकता है और अंदर से भले ही अलग-अलग रहा जाए।

रामकोला के इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पूर्व राज्यमंत्री एवं किसान नेता राधेश्याम सिंह दर्जनों सभाएं कर लोगों को 10 सितंबर के कार्यक्रम में आने का आग्रह किए हैं।

कहा जाता है कि जनपद में सपा से ज्यादा किसी अन्य दल के पास जमीनी नेता नही हैं। लेकिन विधानसभा चुनाव से आहत ये नेता पुनः नए सिरे से सपा की खोई जमीन दिलाने की फिराक में है।