योगी पर अंकुश लगाने की रणनीति बना रहे संघ-भाजपा के बड़े नेता¡

गोरखपुर (राजीव आर तिवारी): क्या आप जानते हैं कि यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी की लगातार बढ़ रही लोकप्रियता से उनकी ही पार्टी यानी भाजपा तथा आरएसएस (संघ) के कुछ बड़े नेता परेशान हैं? आपको यह भी पता नहीं होगा कि भाजपा तथा संघ के शीर्षस्थ रणनीतिकार यह कतई नहीं चाहते कि यूपी के इस लोकप्रिय मुख्यमंत्री का कद केन्द्रीय नेताओं से बड़ा हो।

यद्यपि सच्चाई यही है कि आदित्यनाथ योगी मुख्यमंत्री बनने के बाद पहले से ज्यादा कद्दावर हुए हैं, बावजूद इसके वे पार्टी के सभी केन्द्रीय व बड़े नेताओं का विनम्र भाव से सम्मान करते हैं। यूं कहें कि कद बढ़ने और कद्दावर होने के बावजूद आदित्यनाथ योगी में अहंकार का भाव कम ही प्रतीत हो रहा है। फिर भी भाजपा और संघ का केन्द्रीय नेतृत्व आदित्यनाथ योगी के तेजी से बढ़ते कद को तिरछी निगाहों से देख रहा है और किसी न किसी बहाने उन पर अंकुश लगाने की रणनीति पर काम कर रहा है, इस तरह के संकेत सूत्रों के हवाले से मिल रहे हैं।

गौरतलब है कि गोरखपुर से भाजपा के सांसद और यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के संरक्षण में हिन्दू युवा वाहिनी नामक एक संगठन संचालित होता है। हिंदू संस्कृति, गोरक्षा और छुआछूत को लेकर वर्ष 2002 में इस संगठन का गठन हुआ। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव से पूर्व इस संगठन की मौजदूगी गोरखपुर और उसके आस-पास के जिलों तक हुआ करती थी, लेकिन अब इसका तेजी से विस्तार हो रहा है।

हिन्दू युवा वाहिनी के संरक्षक आदित्यनाथ योगी ने विधानसभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ प्रत्याशी उतार रहे संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह को हटा दिया था। योगी के सीएम बनने के बाद राज्य भर में हिंदु युवा वाहिनी के विस्तार के बारे विचार बनने लगा। इन्हीं वजहों से राकेश राय को संगठन का नया प्रदेश अध्यक्ष और पीके मल्ल को राज्य संगठन मंत्री बनाया गया। सूत्रों का कहना है कि स्वाभाविक तौर पर अपने आका यानी योगी के आदेश पर राकेश राय और पीके मल्ल ने पूरे यूपी में संगठन के विस्तार की रफ्तार बढ़ा दी। शायद यही बात भाजपा व संघ नेतृत्व को खटकने लगी।

सूत्रों का कहना है कि हिंदू युवा वाहिनी के तेजी से हो रहे विस्तार से भाजपा-संघ दोनों परेशान है। इसी क्रम में हिंदू युवा वाहिनी को लेकर संघ ने आदित्यनाथ योगी को कड़ा संदेश दिया है। दरअसल, हाल ही में योगी के हिन्दू युवा वाहिनी के कृत्यों के सामने आने से संघ चिंतित है।

एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार माना जा रहा है कि आदित्यनाथ योगी से संघ की नाराजगी की वजह भी शायद यही हो। बताते हैं कि पिछले दो महीने में उग्र हिंदू युवा वाहिनी कार्यकर्ताओं का कई कथित सांप्रदायिक घटनाओं में नाम सामने आए हैं। यहां तक कि विपक्षी पार्टियां भी हिंदुत्व और गोरक्षा के नाम पर हियुवा द्वारा लोगों को प्रताड़ित करने की शिकायत कर रही हैं।

सूत्रों की माने तो भाजपा और संघ के नेता इस बात से चिंतित हैं कि यदि हियुवा इसी तरह अपनी ताकत दिखाती रही तो राज्य सरकार की छवि पर इसका क्या असर होगा। वह भी ऐसे समय में जब बीजेपी राज्य में 15 साल बाद सत्ता में आई है और दो साल बाद लोकसभा चुनाव होने हैं।

योगी के करीबी बताते हैं कि गोरक्षपीठ से जुड़ा हिंदू युवा वाहिनी एक सामाजिक व सांस्कृतिक संगठन है। बीते माह योगी ने संघ व हिंदू युवा वाहिनी के लोगों के साथ अलग-अलग मीटिंग की थी। मीटिंग में कथित तौर पर उन्होंने भगवा का दुरुपयोग न करने की बात कही थी। उन्होंने हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं से कहा कि भगवा धारण करने वाले किसी भी शख्स द्वारा किए गए गलत काम से संगठन और बीजेपी की छवि बिगड़ेगी।

उधर, सूत्रों के मुताबिक सिर्फ हिंदू युवा वाहिनी के मुद्दे पर संघ आदित्यनाथ योगी को यह संकेत दिया है कि बड़े पैमाने पर अनुशासनहीनता के संकेत मिल रहे हैं। संघ ने इस मुद्दों को लखनऊ के होटल में मुख्यमंत्री के साथ हुई मीटिंग के दौरान भी उठाया था।

खैर, राजनीति के जानकार मानते हैं कि आदित्यनाथ योगी की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता से संघ और भाजपा के कुछ बड़े नेताओं में घबराहट है। इन्हीं वजहों से हिन्दू युवा वाहिनी के बहाने ही सही आदित्यनाथ योगी पर अंकुश लगाने की रणनीति बनाई जा रही है। इन मामलों में कितनी सच्चाई है यह तो वक्त बताएगा।

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