SBI एकाउंटेंट ने पेश की मानवता की मिशाल, बीमार विधवा की झोपड़ी में जाकर किया धन का भुगतान

कैम्पियरगंज (सूर्य प्रकाश त्रिपाठी): करीब 22 वर्ष पूर्व मोहरीपुर निवासी पति की मौत के बाद विधवा बासमती पिपिगंज में झोपड़ी डॉलकर रहती थी,17 वर्ष पूर्व रेलवे लाइन के पास मिली नवजात शिशु बच्ची को मुफलिसी के बावजूद जब किसी ने उसे पालने की जिम्मेदारी नही ली तो बासमती ने उसके पालने का बीड़ा उठाया और पीपीगंज पुराने रेलवे गेट की जमीन में झोपडा डालकर नन्ही बच्ची का अपने पास रखकर पालन पोषण किया। उस मासूम को लक्ष्मी नाम देकर लोगो के घरों में बर्तन साफकर पढ़ाती लिखाती रही और लक्ष्मी इस समय कक्षा 10 की छात्रा है।

विधवा करीब दो माह से बीमार है और चलने फिरने में असमर्थ है। पैसे की तंगहाली के चलते उसके द्वारा पाली पोषी गयी पुत्री लक्ष्मी उसकी सेवा कर रही है। बासमती को विधवा पेंशन मिलता है। और खाते में पैसा होने के बावजूद बैंक पर न जा पाने के कारण पैसा नही निकल पा रहा था।

इसकी चर्चा आज वह एक पत्रकार से की जिसकी पहल पर एसबीआई के अकाउंटेंट शैलेन्द्र कुमार बैंक से चलकर उसकी झोपडा तक गए और उसके खाते का 1700 रुपया तो भुगतान किया ही अलग से 1000 रुपये की आर्थिक सहायता भी दी। जिसके बाद बिस्तर पर पड़ी बासमती की आंखों से बरबस आंसू छलक पड़े और वह एकाउंटेंट को भगवान बताते हुए दुयाये दर दुयाये देती जा रही थी।

बुजुर्ग की आंख से निकले आंसुओ ने एकाउंटेंट भी अपने को सहेज नही पाए और उनकी भी आंखे गमगीन हो गयी। एकाउंटेंट की यह सहृदयता देख लोगो का भारी हुजूम जुट गया और हर कोई अकाउंटेंट की स दरियादिली की तारीफ को मजबूर हो गया।

कुछ वर्ष पूर्व सड़क दुर्घटना में दो बच्चो एवं पत्नी को खो चुके ओरैया के रहने वाले एसबीआई पीपीगंज के एकाउंटेंट भी बासमती को रोता देख खुद को भी नही रोक सके और लंच टाइम में बासमती की झोपड़ी में जाकर उसके खाते के पैसे भुगतान किया ।