सिद्धार्थ नगर

सिद्धार्थनगर: पक्के मकान के लिए तरस रहे हैं आज भी गरीब परिवार

कृपा शंकर भट्ट
सिद्वार्थनगर: एक तरफ केन्द्र और प्रदेश सरकार लोगों को पक्का मकान देने के लिए गम्भीर है तो वहीँ धरातल पर यह योजना साकार होती नही दिख रही है। गरीबों को आवास देने के लिए प्रधानमन्त्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना चलायी जा रही है। लेकिन जनपद में एक ऐसा भी परिवार है जो पात्र होने के बाद भी छ्प्पर के मकान में रहने को मजबूर है।

जिले के बाँसी विकास खण्ड के बस्ठा गाँव के टोला थिकहा में रहने वाले रामरतन आज भी अपने परिवार के साथ छप्पर के मकान में रहते है। रामरतन के तीन लड़के है जो मजदूरी करते है।गरीबी के कारण अबतक अपना आशियाना नही बना पाया है ये परिवार। रामरतन का कहना है कि अधिकारी उन्हें सिर्फ आश्वासन देते हैं। ग्राम प्रधान हो या अधिकारी कोई भी कोई भी ध्यान नही दे रहा है। रामरतन की लड़की का कहना है कि बरसात के मौसम में बहुत परेशानी होती है कभी कभी तो भूखे पेट सोना पड़ता है।जब बारिस होती है तो बरसात का पानी बर्तन में पड़ने लगता है।

वहीँ इस बारे में बाँसी खण्ड विकास अधिकारी का कहना है कि 2011 की सूची में इनका नाम नहीं था। सर्वे करा कर नई सूची में इनका नाम दर्ज किया गया है। जब भी नयी सूची से आवास बनना शुरू होगा इनका भी आवास बन जायेगा

विडम्बना यह है कि एक तरफ जहाँ ये गरीब परिवार छप्पर के मकान में रहने को मजबूर है वहीँ दूसरी तरफ जिम्मेदार सूची में नाम न होने का रोना रो रहे है। ऐसे में एक बड़ा सवाल भी है कि आखिर जो नयी सूची बनी है उससे आवास कब बनना शुरू होगा। ये तो देखने वाली बात होगी कि जीते जी रामरतन को अपना घर देखने को मिलेगा या इसी छप्पर के मकान में ही अपना जीवन गुजारना पड़ेगा। अधिकारी तो सूची में नाम न होने की बात करके अपनी जिम्मेदारियों से बचते नजर आ रहे है।

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