सिद्धार्थ नगर

सिद्धार्थनगर: अध्यापक की जगह बच्चों को पढ़ाता है अनुचर; ना हैंडपम है, ना शौचालय

–बच्चों को कई दिन नही मिलता मध्यान भोजन, अधिकारी बेखबर

कृपाशंकर भट्ट
सिद्धार्थनगर: प्रदेश सरकार लोगों को शिक्षित करने के लिए परिषदीय विद्यालयों में भले ही तरह-तरह की योजनाएं चला रही हो लेकिन इन स्कूलों की हकीकत बद से बत्तर है, ये कहना गलत न होगा। हम बात कर रहे हैं जिले के खेसरहा विकास खंड के प्राथमिक और जूनियर विद्यालय खदरगड्डी की। ये दोनों विद्यालय जिले के परिषदीय स्कूलों में किस तरह की व्यवस्थाएं है ये बताने के लिए काफी है।

इन दोनों विद्यालयों में आज तक पीने के पानी के लिए एक इंडिया मार्का हैण्डपम्प तक नहीं है। विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र छात्राओ के साथ विद्यालय के अध्यापक भी पीने के पानी के लिए गाँव में जाते है। इन दोनों विद्यालयों में शौचालय की भी व्यवस्था नहीं है। बड़ी बड़ी बच्चियां जो स्कूल में शिक्षा लेने आती है शौच के लिए भी खुले आसमान के नीचे जाती है। एमडीएम का भोजन भी यहाँ कम ही बनता हैं।

इन विद्यालयों में सबसे चौकाने वाली बात तो तब समाने आयी जब जूनियर विद्यालय खदरगड्डी में छात्र छात्राओ को विद्यालय में तैनात अनुचर शिक्षा देता मिला।अनुचर शिक्षित है लेकिन उसे ऐसा स्कूल में तैनात शिक्षक  के स्कूल में न रहने पर करना पड़ता है। प्राथमिक विद्यालय के अध्यापक ने बताया कि इन दोनों विद्यालयों में समस्याओ का अम्बार है। स्कूल पर आने के लिए न सड़क है न पीने के पानी के लिए नल है और न ही शौचालय ही ठीक है।

इन समस्याओं के बारे में वो रिपोर्ट भी अपने विभाग को समय समय पर करते रहते है साथ ही स्थनीय ग्राम प्रधान से प्रदेश के कैबिनेट मन्त्री स्थानीय विधायक से भी स्कूल में पीने के पानी के लिए हैण्ड पम्प न होने की बात बता चुके है। कैबिनेट मन्त्री ने जल निगम के लोगो से यहाँ नल लगाने के लिए कहा भी था पर अब तक नल नहीं लगा हैं।

बरसात में बच्चे और अध्यापक भी पानी में घुसकर विद्यालय आते है।जब जिले के प्राथमिक विद्यालय और जूनियर विद्यालय खदरगड्डी में जरूरी सुविधाये नही है और जूनियर विद्यालय में अनुचर छात्र छात्राओ के शिक्षा दे रहा है तो ऐसे में इन बच्चो का आने वाला कल कैसा होगा इसका अंदाजा आप यहाँ की व्यवस्था से लगा सकते है।

ऐसे में यह सवाल उठना भी लाजमी है कि एक तरफ जहाँ 2 अक्टूबर तक प्रदेश के मुख्यमंत्री जी प्रदेश को खुले में शौच मुक्त करके ओडीएफ घोषित करने की बात कर रहे है वहीँ उन्ही के परिषदीय विद्यालयों की हकीकत ऐसी है। ऐसे में उनका सपना कैसे पूरा होगा।

इस सम्बन्ध में बेसिक शिक्षा अधिकारी राम सिंह ने लापरवाह अध्यापकों पर कार्यवाही करने की बात कही। अब अधिकारी अपनी कथनी और करनी में कितना खरा उतरेगे यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

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