आंकड़ों का खेल खेलने की बजाय अपने नाना से कुछ तो सीखे होते स्वास्थ्य मंत्री जी!

गोरखपुर (राकेश मिश्रा): महानगर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बीते दो दिनों में 30 मौतों के बाद समीक्षा पर आये सूबे के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह इस दुःख की घडी में भी आंकड़ों का खेल खेलते नजर आये। विडम्बना देखिये एक ऐसा मंत्री जो की काफी पढ़ा लिखा माना जाता है, वो इस समय घटना के कारणों पर प्रकाश डालने और दोषियों पर तुरंत कार्यवाही करने के बजाय आंकड़ों की जादूगरी से यह साबित करने में लगा था की जितनी भी मौते हुई हैं उसमे कुछ भी अस्वाभाविक नहीं है और ऐसा होता आया है।

कोई मंत्री या कोई सरकार इतना संवेदनहीन कैसे हो सकता है। क्या सिद्धार्थ नाथ सिंह किसी की लिखी हुई पटकथा पढ़ रहे थे। क्योंकि उनका साबका तो गोरखपुर से बहुत दूर उत्तर प्रदेश से भी बहुत ज्यादा नहीं है। मंत्री बनने के बाद भी लखनऊ में कम और दिल्ली में ज्यादा नजर आते हैं। क्रीमी लेयर से हैं। हिंदी, अंग्रेजी दोनों पर अच्छी पकड़ है और सरकार बनने से पहले ऐसी ही किसी संवेदनहीनता पर भाजपा के प्रवक्ता के रूप में पूर्ववर्ती सरकारों पर अपने शब्दों के तीर चलाते थे और उनको पटखनी देते थे।

फिर ये पटकथा उनको किसने पकड़ाई। उनके आका और सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने या फिर बीते दो दिनों से गोरखपुर में बड़ी आसानी से सफ़ेद झुठ बोलने वाले जिलाधिकारी राजीव रौतेला ने! आज सुबह शहर में यह चर्चा थी की जिलाधिकारी की विदाई तय है। लेकिन फिर दिन में देखा गया की जिलाधिकारी महोदय ही सारी व्यवस्था चला रहे हैं।

पटकथा किसी ने भी पकड़ाई हो क्या एक मंत्री का अपना विवेक नहीं होना चाहिए! जब की मंत्री खुद ऐसे परिवार से सम्बन्ध रखता हो जिसने भारतीय राजनीति में नैतिकता का वो पैमाना स्थापित किया है जिसे आज तक कोई छु भी नहीं सका। जी हाँ अपने स्वास्थ्य मंत्री पूर्व प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाती हैं। वही लाल बहादुर शास्त्री जिन्होंने एक रेल एक्सीडेंट पर बतौर रेल मंत्री केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था।

मंत्री जी कहाँ आप आज गोरखपुर में हुए इस दर्दनाक हादसे के पीड़ित परिवारों से मिलते, उनको सांत्वना देते और वो उनको इस बात का भरोसा दिलाते की जो भी व्यक्ति इस जघन्य कार्य के पीछे है वो किसी भी हालत में बक्शा नहीं जाएगा। लेकिन हुआ उल्टा। आप मेडिकल पर्यटन की तरह मेडिकल कॉलेज गए, और प्रेस कांफ्रेंस कर रटी रटायी बातें कह डाली। इस बात को दोहराया की ऑक्सीजन की कमी से मौत नहीं हुई है। और उसके बाद आंकड़ों के खेल पर आ गए।

और तो और आंकड़ों का खेल खेलते हुए स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह यह बताना नहीं भूले की ये सरकार संवेदनशील है और एक बच्चे की मौत की जांच की वजह भी उनके ल‌िए बड़ी है।

मंत्री जी ने पुरे 2014 से आंकड़े न‌िकलवाए थे। उन्होंने बताया की अगस्त के महीने में बच्चों की मौतें 19 प्रत‌िद‌िन होती है। 2015 में 22 और 2016 में प्रत‌िद‌िन 19 से ज्यादा है। इसका ये मतलब ये नहीं है क‌ि हम इसे कम आंक रहे हैं पर आगे का न‌िष्कर्ष न‌िकालने के ल‌िए ऐसा कर रहे हैं। बीआरडी मेड‌िकल कॉलेज में मौतों का आंकड़ा 17 से 18 न‌िकलता है क्योंक‌ि बच्चे यहां कई जगहों से आते हैं।

बीच बीच में आपने यह कह कर की हर एक मौत आप के लिए गंभीर विषय है यह जताने की कोशिश की आप सभी लोग इस मामले को बहुत गंभीरता से ले रहे हैं। लेकिन हकीकत कुछ और थी। अगर आप लोग गंभीर होते तो आपको यह पता होता की आपके द्वारा निलंबन करने से पूर्व ही मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। कुछ मायनों में तो आप मंत्रियों से वो प्राचार्य ही बेहतर निकला।