रियल्टी चेक: सीएम के शहर में टीचर, प्रिंसपल नही बता पाई मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, डीएम और बीएसए का नाम

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गोरखपुर: प्रदेश में योगी सरकार के 4 माह पूरे हो गए हैं। इन 4 माह में योगी सरकार ने बिजली-सड़क-पानी-स्वास्थ्य-शिक्षा सुविधाओं को सुधारने में कितना अपनी हनक दिखा पाई है और इसमे कितना सुधार कर पाई है यह तो अभी तक क्लियर नहीं हो पाया है।

लेकिन मुख्यमंत्री के बराबर सभी जनहित वाले कार्यो में विकास की बयानबाजी के परिणाम के रियल्टी चेक के लिए संवाददाता ने जिले के शिक्षा विभाग में कदम रखा और पहुंच गए जिला मुख्यालय से सटे चरगांवा ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय व पूर्व प्राथमिक विद्यालय जंगल अहमद अली शाह। इस गांव के विद्यालय में जब कक्षा एक से लेकर 8:00 तक के बच्चों से यह जानने का प्रयास किया कि बच्चे कितने काबिल और होनहार है। उनके गुरु जन उनकी शिक्षा के स्तर को उन्नयन पर लाने के लिए कितनी तत्परता के साथ मौखिकी ज्ञान या किताबी ज्ञान पढ़ाई देते हैं और कितना ज्ञान बच्चों के अंदर है।

पहले शुरू किया गया प्राथमिक विद्यालय के कक्षा पांच के होनहार बच्चों से। जब बच्चों से बात किया गया कि आपको पढ़ाने वाले शिक्षक का क्या नाम है। बच्चों ने अलग अलग नाम बताए। साथ ही साथ जब जिले के जिलाधिकारी का नाम पूछा गया तो बच्चे जिलाधिकारी का नाम तक नहीं बता पाए। यह थी 4 माह में बच्चों को दी गई मौखिक जानकारी।

अब इन बच्चों को शिक्षा देने वाली गुरुजनों की बारी थी। जब कक्षा में पढ़ाने वाली शिक्षिकाओं से और वहां की प्रधानाचार्य से बात किया गया। शिक्षिका अर्चना त्रिपाठी से जब बात की गई कि उत्तर प्रदेश के शिक्षा मंत्री का क्या नाम है उन्होंने बताया दिनेश शर्मा। उनसे पूछा गया बीएसए का क्या नाम है उन्होंने कहा मालूम नहीं है। उनसे पूछा गया जिले के जिलाधिकारी का नाम बताएं। शिक्षिका ने कहा कि हमें नाम ही नहीं मालूम।

इसके बाद जब विद्यालय की प्रिंसिपल श्रीमती बासमती देवी के पास रिपोर्टर पहुंचा और बात किया तो देखिए लगभग ₹60000 प्रतिमाह उठाने वाली प्रिंसिपल बासमती देवी जनरल नॉलेज किस स्तर का है। जब उनसे पूछा गया कि उत्तर प्रदेश में कौन और कितने मुख्यमंत्री हैं तो उन्होंने कहा कि पहले तो मायावती दूसरे उनके बाद अखिलेश और उसके बाद योगी आदित्यनाथ का नाम गिना दिया । यहाँ तक कि इन्हें देश के राष्ट्रपति और प्रदेश के राज्यपाल का नाम भी शिक्षिका के सहयोग से बताना पड़ा।

इसके बाद इसी परिसर में बने पूर्व माध्यमिक विद्यालय में पहुंचे। जहां पर कक्षा 6 से लेकर कक्षा 8 तक के बच्चों को शिक्षा दी जा रही थी । पहले बच्चों से बात किया गया कि आपका नाम और कौन सी कक्षा में पढ़ते हैं। इसका जवाब बच्चों ने बखूबी बताया साथ ही शिक्षकों का नाम भी बताया। लेकिन जब जिलाधिकारी का नाम पूछा गया तो उन्हें जिलाधिकारी के बारे में कुछ जानकारी नहीं थी।

यही नहीं बच्चों को छोड़िये, जब पूर्व माध्यमिक विद्यालय की शिक्षिका जो लगभग 62000 रुपए के आसपास प्रतिमाह वेतन लेती हैं। उनसे बात की गई तो उनका कहना है कि हमें खुद ही नहीं मालूम जिलाधिकारी कौन है। पहले तो कोई राजीव रतौला थे,अब मालूम नही(रौतेला का उच्चारण रतौला कह कर किया)। बीएसए कौन है और शिक्षा मंत्री कौन है पूछने पर कहना था कि रोज तो बदलते है तो मैं क्या बताऊं।

अब इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि योगी सरकार के 4 माह में शिक्षा के विकास की गति क्या है । बच्चों और अध्यापकों में जो मौके का ज्ञान होना चाहिए, वह अब तक नदारद है।