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बुकिंग न होने के कारण गोरखपुर से दिल्ली जाने वाली एयर इंडिया की फलाईट रद्द!

delhi-gkp-flightगोरखपुर: बीते माह मकर संक्रांति के अवसर पर दिल्ली के लिए शुरू हुई हवाई सेवा आज निरस्त कर दी गयी| बता दे कि अपनी सेवा के पहले दिन ही फ्लाइट में अपेक्षा से कम यात्री थे।

तब से ही उक्त हवाई सेवा किसी तरह से गोरखपुर से चल रही थी किन्तु आज एयर इण्डिया के फलाईट में कुछ यात्री ही सवार थे जिसे देखते हुए एविएशन डिपार्टमेंट ने उड़ान का समय 12:45 को एयर इण्डिया प्रबंधन ने पहले समय बदल कर 15:30 किया किन्तु उसके बाद भी जब किसी यात्री ने बुकिंग नहीं कराया तो फिर बाद मे उड़ान ही निरस्त कर दिया।

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शुरुआती किराया यानी बुकिंग शुरू होने के समय 3000 और अधिकतम 12 हजार रुपए निर्धारित किया गया है|
इसके लिए एटीआर 72-600 विमान का उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही गोरखपुर के लिए सेवा देने वाली एयर इंडिया अभी देश की अकेली विमानन कंपनी बन गई है।

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वही दूसरी ओर महात्मा बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल कुशीनगर के लोगों को अखिलेश यादव सरकार ने बहुत बड़ी सौगात दी है। प्रदेश की सपा सरकार ने कुशीनगर में अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट बनवाने के लिए 80 करोड़ रुपये की पहली खेप रिलीज़ कर दी है।
सरकार ने यह रकम एयरपोर्ट का रनवे बनाने के लिए रिलीज़ किया है। गौरतलब है की कुशीनगर एयरपोर्ट का निर्माण पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर किया जा रहा है।
 एयरपोर्ट के निर्माण के लिए 569 हेक्टेयर भूमि का पहले ही अधिग्रहण किया जा चुका है।
अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन केन्द्र के रूप में विख्यात कुशीनगर उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण नगर है। इसी स्थान पर महात्मा बुद्ध ने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था। गोरखपुर से महज 53 किमी की दूरी पर स्थित यह नगर एक जमाने में मल्ल वंश की राजधानी थी।
साथ ही कुशीनगर प्राचीनकाल के 16 महाजनपदों में एक था। चीनी यात्री ह्वेनसांग और फाहियान के यात्रा वृत्तातों में भी इस प्राचीन नगर का उल्लेख मिलता है। 1904 से 1912 के बीच इस स्थान के प्राचीन महत्व को सुनिश्चित करने के लिए भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग ने अनेक स्थानों पर खुदाई करवाई। प्राचीन काल के अनेक मंदिरों और मठों को यहां देखा जा सकता है।
संसार की विशालतम प्रतिमा-मैत्रेय बुद्ध का निर्माण भी कुशीनगर में ही किया जा रहा है। इस परियोजना को सभी बौद्ध राष्ट्रों का सहयोग प्राप्त है और दलाई लामा का संरक्षकत्व भी। यह मूर्ति पांच सौ फूट ऊंची होगी। जिस मंच पर बुद्ध आसीन होंगे उसके अन्दर चार हजार लोगों के साथ बैठ कर ध्यान करने की व्यवस्था होगी।
प्रतिमा की शैली तिब्बती है। वेशभूषा भी तिब्बती है। बुद्ध के बैठने के मुद्रा ऐसी होगी जैसे कि वे सिंहासन पर बैठे हों और उठ कर चल देने को तत्पर हों। तिब्बती बौद्ध मान्यता है कि मैत्रेय बुद्ध सुखावती लोक में ठीक इसी मुद्रा में बैठे हैं और किसी भी पल वे पृथ्वी की ओर चल देंगे। इस प्रतिमा में इसी धारणा का शिल्पांकन होगा।

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