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मौत के मुँह से बाहर आकर युवाओं के प्रेरणाश्रोत बनने की राह पर है गोरखपुर के संदीप

Sandeep-Roy-of-Gorakhpurगोरखपुर: हादसों ने हमें जीना सिखाया, वरना हम तो कब के फना हो गए होते। ये शेर गोरखपुर के रहने वाले संदीप राय पर बिलकुल सटीक बैठता है। बचपन से ही मेधावी रहे संदीप के जीवन में कुछ ऐसा हादसा हुआ, जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाये।
दिल्ली के किरोड़ी मल कालेज में पढ़ाने के दौरान संदीप को अपने अपार्टमेन्ट के चौथे माले के फ़्लैट के बालकनी में रखे कूलर से जोरदार करन्ट का झटका लगा और वह इमारत से नीचे गिर गए। संदीप ने हार नहीं मानी और निरन्तर अपना अध्यन जारी रखा। जीने की ललक की ललक और जिजीविषा के कारण संदीप आज ऐसे युवाओ के लिए प्रेरणा के श्रोत बने हुए हैं, जो छोटी-मोटी दुर्घटना का शिकार होकर अपने लक्ष्य को पाने की बजाय हिम्मत हार जाते हैं।
गोरखपुर के मुंशीप्रेम चन्द पार्क में शोध परिचर्चा के दौरान मंच पर बैठे संदीप राय की तरफ सभी की निगाहे थी। छड़ी के सहारे जब संदीप धीरे धीरे मंच की तरफ बड़े और अपनी शोध परिचर्चाओं को सुरु किया तो सभी के मन में उनके बारे में जानने की ललक पैदा हो गयी।
Sandeep-Royजन संस्कृति मंच के सचिव मनोज सिंह ने बताया की संदीप राय समाज शास्त्र विषय में भारतीय समाज के परिपेक्ष में प्रतिरोध का साहित्य और भिखारी ठाकुर के नाटक एवम् कविता विषय पर शोध कर रहे है। उसी शोध पर ये परिचर्चा का आयोजन किया गया है, संदीप राय की प्रारम्भिक शिक्षा गोरखपुर में हुई, उसके बाद आगे की पढाई करने के लिए सैनिक स्कूल नैनीताल में की।
इसी दौरान संदीप का चयन 2 बार NDA में हुआ, लेकिन अपने पिता की इच्छा की पूर्ति के लिए इन्होंने उसे छोड़कर शिक्षा के क्षेत्र में अपना कदम बढ़ाया और दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ी मल कालेज से हिंदी में ऑनर्स किया फिर दिल्ली विश्वविद्यालय से इकनॉमिक्स से फाईनल व नेट की परीक्षा भी पास की।
फिर दिल्ली विश्वविद्यालय से एम फिल करते हुए ही समाज शाश्त्र के प्रोफ़ेसर बन बच्चों को शिक्षा देते तभी एक हृदयविदारक घटना ने पुरे परिवार व शुभचिंतकों को हिला कर रख दिया।
People-at-the-meetingदुर्घटना के दौरान 20 दिनों तक लगातार दिल्ली के प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज चलता रहा। इलाज के दौरान ही 4 बड़े आपरेशन हुए। जटिल आपरेशन के दौरान उनके ब्रेन को निकाल कर लीवर में सुरक्षित कर दिया। संदीप ने लगातार गिरते स्वास्थ्य और बिगड़ती तबियत ने घर वालो की चिन्ता और बढ़ा दी।
घरवालों ने AIIMS में भर्ती कराया। महीनों वेन्टीलेटर पर ईलाज किया गया। इस दौरान कुल 17 आपरेशन किये गए। संदीप की ही तरह मानो घर वालो ने भी प्रण कर लिया हो और अपने जीवन भर की कमाई को पानी की तरह बहाते रहे। संदीप की व्यथा बताते हुए उनकी माँ के आँखों से आंसू निकल जाते है, लेकिन कही न कही अपने इस लाल को अपने बीच में पा कर गर्व महसूस होता है।
ठीक होने के बाद संदीप ने अपनी रूचि की तरफ फिर से अपना ध्यान लगाया और 1 अप्रैल 2015 को अपनी लिखी पुस्तक का विमोचन गोरखपुर विश्विद्यालय के कुलपति प्रो0 अशोक कुमार के द्वारा करवाया। संदीप आज भी पूरी निष्ठा के साथ अपने लेखनी को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं और साथ ही साथ गोरखपुर विश्वविद्यालय से शोध भी कर रहे हैं। संदीप अपने जैसे युवाओं के लिए ऐसी उम्मीद की लौ हैं, जो उन्हें अँधेरे में भटकने की बजाय रास्ता दिखा रहे हैं।

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