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रविदास जयंती: बीएचयू के दलित प्रोफेसरों द्वारा पीएम मोदी को आमंत्रण पर पुर्नविचार करने की मांग

PM-Modiवाराणसी: दिल्ली के जामिआ मिलिया इस्लामिआ के कुछ छात्रों द्वारा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को विश्वविद्यालय में बुलाये जाने के ख़िलाफ़ मुहिम चलाने के न बाद अब बीएचयू के दलित प्रोफेसरों ने रविदास मंदिर प्रबंधन को खत लिखकर प्रधानमंत्री को रविदास जयंती के उपलक्ष्य पर दिए गये आमंत्रण पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
मंगलवार को बीएचयू अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति वेलफेयर सोसायटी के महासचिव प्रो एम पी अहिरवार ने रविदास मंदिर के प्रबंधक को खत देकर मोदी के इस राजनैतिक यात्रा पर रोक लगाने की मांग की है !
खत में उन्होंने ने लिखा है की दैनिक अख़बारों में प्रकाशित हो रही खबरों से यह जानकर अत्यंत दुःख हुआ है कि प्रबंधन द्वारा संत श्री गुरु रविदास जयन्ती पर्व के शुभ अवसर पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी को आमंत्रित किया गया है।
उन्होंने लिखा है की ,”महोदय, जैसा कि आप जानते हैं कि मा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का दौरा यह धार्मिक न होकर पूरी तरह राजनीतिक है और इसका एकमात्र उद्देश्य दलितों की धार्मिक भावनाओं का शोषण करके तथा उन्हें गुमराह करके पंजाब और उत्तर प्रदेश में होनेवाले आगामी विधान सभा चुनावों में भाजपा के लिये वोट बटोरने के आलावा कुछ भी नहीं है. अत: आपसे विनम्र अनुरोध है कि निम्नांकित तथ्यों पर विचार करते हुए अपने द्वारा प्रधानमंत्री को दिए गये निमंत्रण पर पुनर्विचार करने का कष्ट करें। ”
उन्होंने खत में आरोप लगाया है की जब से देश में भाजपा की सरकार बनी है तब से दलितों पर अत्याचार की घटनाओं में आशातीत वृद्धि हुई है किन्तु इन्हें रोकने की दिशा में केंद्र सरकार कोई भी ठोस कदम नहीं उठा रही है. संघ परिवार और भाजपा के अनेक नेता तथा मंत्री इन घटनाओं पर तरह-तरह के बयान देकर दलितों को अपमानित करने में लगे हैं.
उनका कहना है की संघ के मुखिया मोहन भागवत से लेकर लोकसभा स्पीकर तक अनगिनत नेता संविधान की समीक्षा और आरक्षण को समाप्त करने का देशव्यापी अभियान चला रहे हैं किन्तु प्रधानमंत्री ने आज तक उनकी इन बातों का न तो खण्डन किया है और न ही इस सम्बन्ध में सरकार का क्या दृष्टिकोण है इसको स्पष्ट नहीं किया है।
उन्होंने कहा है की जब से भाजपा सत्ता में आयी है तब से विश्वविद्यालयों तथा अन्य अकादमिक संस्थाओं में आर.एस.एस. तथा उसके अन्य संगठनों का हस्तक्षेप बढ़ा है और दलित छात्र-छात्राओं के दमन और उत्पीडन में अत्यधिक वृद्धि हुयी है और हत्या एवं आत्म हत्या की ख़बरें आ रही हैं किन्तु प्रधानमंत्री कोई कदम उठाने की बजाय चुप्पी साधे हुए हैं।

यह पढ़ें: प्रधानमंत्री मोदी रविदास जयंती पर बनारस में !

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