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रेलवे प्रशासन ने स्माइल रोटी बैंक संस्था के युवाओं को स्टेशन परिसर से खदेड़ा

Children-staging-demonstratगोरखपुर: रेलवे स्टेशन पर बेसहारा घूमने वाले और काम करने वाले बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास करने वाले स्माइल रोटी बैंक संस्था चलाने वाले युवाओं को स्टेशन परिसर से खदेड़ दिया है।
प्रशासन का कहना है की बिना अनुमति के इस तरह का कार्य रेलवे परिसर में नहीं किया जा सकता है। इस घटना के विरोध में आज बच्चों ने संस्था के लोगों के साथ इंदिरा तिराहे पर धरना देकर शिक्षा के हक की मांग बुलंद की।
गौरतलब है की स्माइल रोटी बैंक नाम की स्वंयसेवी संस्था से जुड़े कुछ युवाओं ने गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर सैकड़ों अनाथ बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाने के उदेश्य से एक अभिनव प्रयास शुरू किया था । इस संस्था के चीफ कैपंनर आजाद पांडेय हैं। इन युवाओं ने बच्चों को दोपहर दो से पांच बजे का समय उनकी पढ़ाई-लिखाई, नाट्य प्रशिक्षण के साथ-साथ कविता, कहानी पढ़ने के लिए तैयार किया। इस दौरान बच्चों को दूध और लंच भी दिया जाता। शारीरिक व्यायाम भी इन बच्चों की जिदंगी में शामिल किया गया। रेलवे स्टेशन परिसर में स्थित पार्क इनका ठिकाना था।
जानकारी के अनुसार इन बच्चों को 29 जनवरी से होने वाले गोरखपुर महोत्सव में भाग लेने और नाटक मंचित करने का निमंत्रण मिला। नाटक के रिहर्सल की तैयारी भी शुरू हो गई थी। शनिवार से रिहर्सल शुरू होने वाली थी लेकिन शनिवार की सुबह स्टेशन मैनेजर आरपीएफ जवानों के साथ आए और उन्होंने रिहर्सल कर रहे बच्चों और स्माइल रोटी बैंक से जुड़े कार्यकर्ताओं को रेलवे परिसर से हटा दिया। आगे से उन्हें यहा न आने की हिदायत भी दी गई।
स्माइल रोटी बैंक को मिलने वाला था पुरस्कार
आजाद पाण्डेय ने बताया कि उनके कार्य को देख दिल्ली की एक संस्था ने स्माइल रोटी बैंक को सम्मानित करने का फैसला लिया था। सम्मान का कार्यक्रम आज 12 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित है जिसमें केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज मुख्य अतिथि है। हमनें फैसला लिया है जब तक हमें अपना काम करने के लिए यदि रेलवे स्टेशन परिसर अनुमति नहीं मिलती है तो हम पुरस्कार ग्रहण नहीं करेंगे और विदेश मंत्री से शिकायत दर्ज कराएंगे। अगर हमारी बात मान ली जाती है तब तो ठीक नहीं तो पुरस्कार का हम बहिष्कार करेंगे।

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