टॉप न्यूज़

विरह वेदना से उत्पन्न हुई है बिरहा: प्रसिद्ध भोजपुरी गायिका कल्पना

kalpanaगोरखपुर: बिरहां भारत वर्ष की गायकी की एक ऐसी विधा है जो कंठ से ज्यादा लेखनी प्रधान है। अगर कहा जाये कि बिरहा गायन न होकर एक साहित्य है तो अतिशयोक्ति न होगी। उक्त उदगार सुप्रसिद्ध भोजपुरी गायिका कल्पना पटवारी ने गोरखपुर आगमन के दौरान व्यक्त किये।

कल्पना गोरखपुर महोत्सव में पहले दिन की सुरमई शाम में अपने गीतों से शमां बाधने आयी है। बिरहा के लिए प्रसिद्द इस गायिका का मानना है कि अतीत में बिरहां की उत्पति किस विरह वेदना से हुई यह नई पीढ़ी के लिए भले ही शोध का विषय हो परंतु मेहनतकश परिवारो के वैदयो को बेधती लोकजीवन की विभिन्न भाव विभोर अनुभूतियाँ कंठ के सहारे जब चहरे की नसों में खून सदृश्य दौड़ते हुए एक सुर व एक ताल में जनमानस को झंकृत करने लगी तो वहीँ से बिरहा की व्युत्पति हुई।

उनका मानना है कि लोकजीवन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयो पर अगर संजीदा हुआ गया होता तो ऐसे महत्व्पूर्ण विषय हमारे पाठ्यक्रमो में कब के सामिल हो गए होते।

यह ऐसा विषय है जिस पर हमारा ध्यान तो नहीं गया लेकिन कलिफोरनिया विश्व विद्यालय के 25 छात्रो की टीम ने पिछले वर्ष भारत आकर लोकसंगीत पर अध्यान किया जबकि इस विषय पर अध्यन हमारी सोच से पर है।

kalpana1

https://youtu.be/ONRoa4d4ki4

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *