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मानवीय संवेदनाओं की परिभाषा गढ़ता सीएम सिटी का एक पुलिसकर्मी, बनाया टीम ‘हम हैं ना’

गोरखपुर: यूं तो पुलिस के नाम से आम जनता अपना नाक भौं सिकोड़ती है, किंतु इन्हें पुलिस वालों में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जो मानवीय संवेदनाओ की परिभाषा बन जाते हैं। कुछ ऐसी ही सोच है गोरखपुर जिले में तैनात एक पुलिस उप निरीक्षक व धर्मशाला पुलिस चौकी के प्रभारी प्रमोद सिंह की, जो तपती दोपहर में अनाथ बच्चों को भरपेट भोजन कराकर और उनके पैरों में चप्पल पहना कर पहले ही चर्चाओं में रह चुके हैं। अब इस शख्सियत ने गरीबों यतीमों और लाचार लोगों की पीड़ा को अपनाते हुए इनके लिए एक अलग मुहिम चलाई है और मुहिम का नाम है “हम हैं ना”।

इस संस्था के बारे में बताते हुए “हम हैं ना “के अगुआ व एस आई प्रमोद सिंह ने कहा कि जनपद प्रवास के दौरान शहर में जाड़ा गर्मी बरसात में अमूमन यतीमों लाचार लोगों को और वृद्धों को सड़क के किनारे फटे पुराने कपड़ों में पड़ा देख दिल को बहुत तकलीफ होती थी।जिसे कुछ हद तक अपने स्तर से सुधारने के लिए रेलवे स्टेशन चौकी पर नियुक्ति के दौरान सैकड़ों बच्चों को रेलवे लाइनों में जान हथेली पर रखकर कूड़ा कबाड़ एवम फेंके हुए बोतल बीनते हुए देख और उसके बाद शाम को भोजन की जगह नशीले पदार्थों का सेवन कर जहां तहां सोते हुए देखकर मन में ख्याल आया कि चलो कुछ ऐसा किया जाए जिससे मानवता बची रहे और इसी सोच के तहत पहले तो रेलवे स्टेशन चौकी के किनारे ही तमाम बच्चों को यथासंभव मदद कर भोजन, वस्त्र, चप्पल आदि उपलब्ध कराया।

चूंकि नौकरी तबादले वाली है इसलिये अब तैनाती गोरखनाथ थाना के धर्मशाला पुलिस चौकी पर होने के बाद कुछ साथियों के सहयोग से “हम हैं ना” का गठन किया । जो विशुद्ध रूप से निस्वार्थ भाव से गरीबों यतीमों और लाचारों की मदद के लिए काम करेगी । यह संस्था किसी से दान स्वरूप एक पैसे नहीं लेगी और ना ही किसी सरकारी मदद का मुंह देखना है। इसके संस्थापक सदस्यों में सभी लोग अपने अपने खर्चे से कुछ धनराशि संस्था के अकाउंट में प्रति माह ट्रांसफर करेंगे । जिसे मिला जुला कर जन सेवा का कार्य किया जाएगा।

गत 16 मई को एक औपचारिक कार्यक्रम के दौरान जिले के एसएसपी शलभ माथुर ने संस्था कर बेस कैंप का उद्घाटन किया और इसके लिए शुभकामनाएं भी दिया।
प्रमोद सिंह के मुताबिक अभी शुरुआती दौर में इस सेवा कार्य मे लगभग डेढ़ सौ लोगों को चिन्हित किया गया है। जिन्हें भोजन मुहैया कराया जाएगा। साथ ही इन व्यक्तियों पर बैठकर भोजन करने के लिए धर्मशाला चौकी के पीछे ही 6 * 4 के 10 सीमेंटेड टेबल बनवाए जा रहे हैं। जिन पर बैठकर हुए भोजन करेंगे। इसके साथ ही महानगर की 10 किलोमीटर की परिधि में आने वाले इलाकों में कहीं भी गिरे पड़े लाचार वृद्ध, यतीम व जरूरतमंद को इलाज मुहैया कराने के लिए एक एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। जिसे टोलफ्री नम्बर पर बुलाया जा सकेगा।

उन्होंने बताया कि एंबुलेंस उनके पास आ गई है किंतु टोल फ्री नंबर के लिए अभी आवेदन किया गया है । इन लोगों को वहां से उठाकर अपने बेस कैंप धर्मशाला ओवर ब्रिज के नीचे चिकित्सकीय सुविधा दी जाएगी और जरूरत पड़ने पर अस्पताल में भर्ती करवाया जाएगा तो वहीं फटे फटे कपड़ों में रहने वालों लोगों के लिए आम जनता की मदद से प्राप्त परित्यक्त कपड़े फिर से दुबारा रिपेयर व दुरुस्त कराकर इस्त्री करा कर उन्हें उपलब्ध कराया जाएगा।

इसके लिए बेस कैंप में बाकायदा एक सिलाई मशीन, टेलर मास्टर, एक इस्त्री टेबल और एक डॉक्टर का केबिन भी तैयार हो चुका है।इसके अतिरिक्त अब इधर उधर सड़को पर कूड़ा बीनने वाले बच्चों को शिक्षित करने के लिये कार्यालय के समीप ही प्रतिदिन सुबह 2 घण्टे उनको पठन पाठन कराया जाएगा।इसके अतिरिक्त बेतरतीब जिंदगी गुजर बसर करने वाले लोंगो को उठाकर यहां लाया जाएगा और उनकी हेयर कटिंग, सेविंग कराकर उन्हें साफ सुथरे वस्त्र पहनाकर समाज मे जुड़ने का आग्रह किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि संस्था से जुड़ने के लिए यूँ तो सैकडों लोग ख्वाहिश जता रहे हैं।किंतु सबके सामने शर्त यह है कि इसके बदले में वह इस कार्य को अपना मुखौटा बनाते हुए भविष्य में कोई चुनाव या राजनीतिक गतिविधियों इत्यादि में संलिप्त नही होंगे।इस संस्था के लोगों का मूल मंत्र ही मानवता का मान बढ़ाना है। इस संस्था में अभी तक संस्थापक सदस्यों में डॉ त्रिलोक रंजन श्रीवास्तव, डॉ राजेश यादव, डॉ सुरेश सिंह, अजय जायसवाल, हरगोबिंद प्रवाह, हरगोबिंद भंडारी, विक्की कुकरेजा, अतुल मित्तल, राजेश नेमानी, दीपक सिंह, श्रीमती पूनम सिंह पत्नी प्रमोद सिंह अपना योगदान दे रहे हैं।

इस मानवीय कार्य के लिए गोरखपुर फाइनल रिपोर्ट की तरफ से ‘हम हैं ना’ टीम को हार्दिक शुभकामनाएं।

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