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कुशीनगर: एक ऐसा गांव, जहां समस्याओं का है अम्बार, ग्रामीणों ने प्रधान पर लगाए कई आरोप

–प्रधान पर आवास के नाम पर 5000 रुपये लेने का आरोप
–प्राथमिक विद्यालय में आंगनवाड़ी भवन जर्जर कभी भी घट सकती है बड़ी घटना
–शौचालय निर्माण में अनियमितताओं का अम्बार, घटिया मसाले और ईंटों का हुआ प्रयोग

आदित्य कुमार दीक्षित
कुशीनगर: जनपद के रामकोला विकासखण्ड में स्थित एक गांव ऐसा है, जहाँ समस्याओं का अम्बार है। चाहे व लोहिया आवास में अनियमितता हो, प्रधानमंत्री आवास हो, शौचालय हो या ग्रामसभा की जमीन पर अवैध कब्जे की बात, समस्याएं तो उस गांव एक झुंड की तरह हैं। कहने को तो यह गांव 2012-13 में लोहिया गांव चयनित हुआ है, लेकिन वृहस्पतिवार को जब हमारे संवाददाता ने इस गांव का दौरा कर यहां की हकीकत जाननी चाही, तो ग्रामीणों का गुस्सा फूट कर बाहर आ गया और वो प्रधान के कारस्तानी की पोल खोलने लगे।

मिली जानकारी के मुताबिक रामकोला विकासखण्ड के अहिरौली नादह ग्रामसभा में बने शौचालय इस बात की गवाही दे रहे हैं कि इन शौचालयों को बनाने में कितनी ईमानदारी बरती गई है। गांव में कुछ शौचालय बने लगभग छः महीने हो गए हैं लेकिन अभीतक वो शौचालय इस लायक नहीं हुआ है कि उसमें लोग शौच करने जा सकें। गांव के लोगों से पूछने पर उन्होंने बताया कि प्रधान से कई बार कहने पर भी वो सुनते नहीं हैं, गांववालों का कहना है कि घर के दरवाजे पर शौचालय की टँकी के लिए खोदा गया गड्ढा किसी दुर्घटना को दावत दे रहा है, डर लगता है कि कहीं किसी दिन कोई बच्चा या की जानवर इस गड्ढे में न गिर जाये।

गांव में कुछ लोग तो ऐसे हैं जिन्होंने अपने शौचालय में लकड़ी रखी हुई है। पूछने पर कि आपलोग इसका प्रयोग क्यों नहीं करते हैं ? ग्रामीणों के जवाब ने सोचने पर मजबूर कर दिया, उनका कहना था क्या जाएं साहेब ! यह शौचालय देखकर डर लगता है, कि हम इसका प्रयोग करने जाएं और अचानक भरभरा कर हमारे ऊपर ही न गिर जाये। अभी यहीं नहीं इस गांव की समस्याएं जितनी बतायी जाए कम हैं। ग्रामीणों से गांव में हुए विकास कार्यों के बारे में जब हमारे संवाददाता ने पूछा तो, प्रधान के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फुट कर सामने आ गया।

ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर इस गांव में ढोंग हुआ है, बरसात के दिनों में गांव की सड़कें तालाब का रूप ले लेती हैं। गांव में कहीं भी नाली नहीं बनी है जिससे बरसात का पानी सड़क पर लग जाता है। ग्रामीणों का आरोप था कि सरकार द्वारा ग्रामीणों के लिए चलाई जा रही योजनाओं में जो गांव में लागू हैं, उनमें से अधिकान्शतः का लाभ प्रधान द्वारा अपात्रों को दिया गया हैं।

ग्रामीणों ने प्रधान पर यह भी आरोप लगाया कि प्रधान में उनसे प्रधानमंत्री आवास के नाम पर 5000 रुपये भी ले लिए हैं और आवास के बारे में पूछने पर कोई न कोई बहाना बना देते हैं। इस गांव की समस्याएं अभी यहीं खत्म नहीं होती हैं, अहिरौली में बना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तो शोपीस बना हुआ है, न तो उसमें बिजली की व्यवस्था है न कुछ, पूछने पर लोगों ने बताया कि यहां जो एएनएम तैनात हैं वो गोरखपुर की रहने वाली हैं। वह कभी कभी यहां दिन में आती हैं और एक घण्टे रुककर चली जाती हैं।

पूछने पर की रात में कभी एएनएम ने विश्राम किया है कि नहीं तो ग्रामीणों का कहना है कि दिन में जब एक घण्टे के लिए आती हैं तो वो रात्रि विश्राम क्या करेंगीं ? एएनएम का नाम पुछने पर ग्रामीण उनका नाम तक नहीं बता पाये। ग्रामीणों के अनुसार जब वे इन सभी शिकायतों को लेकर स्थानीय विधायक रामानन्द बौद्ध के पास गए तो उनका कहना था कि तुमलोग अब सर पर चढ़ गए हो, तुमलोगों का अब कोई काम नहीं होगा।

प्राथमिक विद्यालय के आंगनवाड़ी केंद्र जर्जर होने से बच्चों में दहशत

अहिरौली नादह में स्थित प्राथमिक विद्यालय के बारे में जानकारी लेने पर वहां की पढ़ाई, और व्यवस्था तो संतोषजनक मिली लेकिन विद्यालय प्रांगण में बना आंगनवाड़ी केंद्र पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। पूछने पर विद्यालय के प्रधानाचार्य फिरोज आलम ने बताया कि मेरे यहाँ तैनात होने से पहले यह भवन बना था, और तभी का गिरा हुआ है लेकिन यह जर्जर भवन इस हालत में है कि अगर बच्चे इसमें खेलते हैं, तो हमें डर लगता है कि कहीं कोई बड़ी दुर्घटना न घटित हो। उन्होंने कहा कि यह जर्जर भवन बच्चों के लिए बहुत ही खतरनाक है। इसको पूरी तरह ध्वस्त करवा दिया जाए जिससे कि बच्चों में जो डर बसा हुआ है वो निकल जाये और बच्चे बिना किसी डर के विद्यालय प्रांगण में खेलकूद सकें। बताते चलें कि प्राथमिक विद्यालय पर जाने वाला रास्ता बहुत ही बदहाल स्थिति में है, रास्ते के दोनों तरफ उगे झंखाड़ उस मार्ग के बदहाली की दास्तान बयां करते हैं। बच्चों का कहना था कि स्कूल आते समय यह डर लगता है कि कहीं सांप या कोई जहरीले कीड़े मकोड़े न काट लें।

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