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गोला: आश्रम पद्धति विद्यालय के छात्र ओवरफ्लो हो रहे शौचालय में जाने को मजबूर

–एनजीओ के सफाई कर्मी नहीं आते हैं समय से: प्रधानाचार्य
–छात्रावास में रहते हैं 300 से अधिक छात्र

अखिलेश तिवारी
गोरखपुर: गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले तथा खराब आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित रह जाने वाले सभी वर्ग, जाति व धर्म के बच्चों को शिक्षित करने के उद्देश्य से सरकारें तमाम योजनाओं का संचालन करती हैं जिससे आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे भी अच्छी शिक्षा ग्रहण कर लेते हैं।

इन्हीं बच्चों को शिक्षित करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में समाज कल्याण विभाग नें प्रदेश के कुछ चुनिंदा जगहों पर आश्रम पद्धति पर आधारित विद्यालयों का निर्माण करोड़ों रु० की लागत से करवाया है । इन विद्यालयों में गरीब छात्रों के लिए छात्रावास व उनके भोजन की व्यवस्था की गयी है । इन्हीं आश्रम पद्धति विद्यालयों में से एक विद्यालय जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय गोला तहसील के ग्राम सभा पतरा में स्थापित है। विद्यालय के छात्रावास में 400 से अधिक बच्चों के रहने की जगह है करीबन 380 विद्यार्थी छात्रावास में रहते हैं जबकी छात्रावास में हर जगह गंदगी दिखती है। छात्रावास के शौचालयों की स्थिति बहुत दयनीय है, छात्रावास के हर कोने में कूड़ा करकट रखा हुआ है।

ओवरफ्लो शौचालयों का प्रयोग करने को मजबूर हैं छात्र
छात्रावास के कमरों के पास लाखों के खर्च से बने शौचालय की स्थिति बहुत खराब हो चुकी है। छात्र ओवरफ्लो हो रहे शौचालयों में जाने को मजबूर हैं। शौचालय की स्थिति ऐसी है उसका प्रयोग करना कठिन है। शौच के बाद शौचालय में पानी डालने के बाद पानी नीचे जाने की जगह वापस उल्टा ऊपर की तरफ आता है फिर भी छात्र बडी कठिनाई से शौचालय का प्रयोग करते हैं। वहीं कमरों के पास शौचालय होने के कारण गंदगी से छात्रों के बिमार होने का खतरा भी है।

छात्रावास में लगे किसी भी वाॅस बेसिन में नहीं हैं पानी की टोटी
छात्रावास में शौचालय व उससे जुड़े हुए स्नान घरों को भी बनाया गया है लेकिन कोई भी स्नान घर प्रयोग में नहीं है , स्नान घरों में एक भी पानी के नल नहीं है अगर हैं तो उसमें पानी नहीं है। इसके साथ ही हाथ धोने व बर्तन धोने के लिए बने वाॅसवेसींगों में भी नल नदारद हैं।

शौचालयों की खराब स्थिति व नलों के बारे में पूछने पर विद्यालय के प्रधानाचार्य सर्वेश राय ने बताया कि शौचालयों व पूरे विद्यालय की साफ सफाई की जिम्मेदारी समाज कल्याण विभाग के द्वारा एक एनजीओ को दिया गया है। उनके सफाई कर्मी अपने इच्छा से कभी कभी आते हैं तथा साफ सफाई करते हैं अगर इन्हें कड़ाई के साथ प्रतिदिन आने के लिए कहा जाता है तो वो आना ही छोड़ देते हैं। उन्होंने कहा कि अधिकतर शौचालयों के ओवरफ्लो होने का कारण ये छात्र ही हैं , छात्र उसमें इंट पत्थर डाल देते हैं जिससे शौचालय सुचारु रूप से कार्य नहीं करते हैं।

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