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गोरखपुर उपचुनाव: क्या भाजपा फिर खेल खेलेगी मंदिर कार्ड, इस नाम पर आज हो सकता है फैसला

गोरखपुर उपचुनाव: क्या भाजपा फिर खेल खेलेगी मंदिर कार्ड

राकेश मिश्रा
गोरखपुर: काफी जद्दोजहद के बाद ऐसा लगता है कि भाजपा ने सदर लोक सभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार फाइनल कर लिया है। हालांकि पार्टी ने अभी तक उस नाम की घोषणा तो नहीं की है लेकिन लगता है कि भगवाधारी दल एक बार फिर यह प्रतिष्ठित सीट जीतने के लिए मंदिर पर ही भरोसा जतायेगा।

उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार भाजपा ने मंदिर के मुख्य पुजारी योगी कमलनाथ को चुनावी मैदान में उतारने का निर्णय ले लिए है। पार्टी ने अभी तक इसकी घोषणा नहीं की है। सूत्र के अनुसार समाजवादी पार्टी द्वारा निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ संजय निषाद के बेटे संतोष निषाद को मैदान में उतारने का निर्णय लेने के बाद भाजपा के पास जातीय समीकरण को ध्वस्त करने के लिए मंदिर की शरण में जाने के अलावा कोई और चारा नहीं था।

जानकारी के अनुसार कल सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से दिल्ली में मीटिंग हुई। बैठक में गोरखपुर से उम्मीदवार को लेकर बहुत देर चर्चा हुई। ऐसी उम्मीद जताई जा रही थी कि रविवार को प्रत्याशी की घोषणा हो जाएगी। हालांकि देर रात तक घोषणा ना होने के बाद अटकलों का बाजार गर्म ही रहा। ऐसी सम्भावना है कि पार्टी आज अपने उम्मीदवार की घोषणा कर देगी। पार्टी पहले ही यह घोषणा कर चुकी है कि उसके प्रत्याशी का पर्चा दाखिला मंगलवार यानि 20 फरवरी को होगा।

गौरतलब है कि कांग्रेस और सपा ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा पहले ही कर दी है। कांग्रेस ने जहाँ शहर की प्रसिद्द डॉक्टर सुरहिता करीम को मैदान में उतारने का निर्णय लिया है तो वहीँ सपा ने संतोष निषाद को टिकट दिया है।

निवर्तमान सांसद योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद इस्तीफा देने के कारण गोरखपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव हो रहा है। 11 मार्च को उपचुनाव होगा और 14 मार्च को परिणाम आयेगा।

यहाँ पर जीत ना केवल जातिगत समीकरण बल्कि धार्मिक समीकरण पर सधी हुई है। जिसे देखते हुए सभी पार्टियां अपने स्तर से पिछड़े तबके के ऐसे कैंडिडेट को मैदान में उतारेंगे,जो अपनी जाति को साधने के साथ ही अन्य तबके में भी लोकप्रिय हो। क्योंकि इस लोकसभा सीट के प्रभावित विधानसभा क्षेत्रों में निषाद, मुसलमान व यादव मतदाताओं की बाहुल्यता है।पिछले दिनों तक आमतौर पर सपा की मंशा थी कि सभी गैर भाजपाई दलों का समर्थन हासिल कर भाजपा को मात दी जाए। यह बात ओबीसी आर्मी के सम्मेलन में एकजुटता देखकर कुछ विश्वसनीय बनती नजर भी आयी। लेकिन बाद में सभी समीकरण धराशायी होते नजर आ रहे हैं।

एक अनुमान के मुताबिक इस लोकसभा क्षेत्र में करीब 1,50,000 मुस्लिम, 1,50,000 ब्राह्मण, 1,30,000 राजपूत, 1,60,000 यादव , 1,40,000 सैंथवार और वैश्य व भूमिहार मतदाता करीब एक लाख की संख्या में है। ऐसे में जो भी पार्टी इन ज्यादा जातियों को साधने वाला प्रत्याशी उतारेगी जीत का सेहरा उसी के सर बंधेगा।

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