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गोरखपुर उपचुनाव: उपेंद्र शुक्ला ने नाम पर फंसा पेंच, क्या योगी नहीं हैं राजी!

राकेश मिश्रा
गोरखपुर: सदर लोक सभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार को लेकर पार्टी में ही पेंच फंसता नजर आ रहा है। जानकारी के अनुसार केंद्रीय नेतृत्व की पहली पसंद डॉ उपेंद्र दत्त शुक्ला के नाम पर सूबे के मुखिया और गोरखपुर सीट से पूर्व सांसद योगी आदित्यनाथ राजी नहीं हैं। इस सीट पर योगी की सलाह को केंद्रीय नेतृत्व के लिए नजरअंदाज करना असंभव नहीं तो मुश्किल तो बहुत होगा। योगी इस सीट पर 1998 से लेकर 2014 तक लगातार पार्टी की जीत का झंडा फहराते रहे हैं। उससे पहले भी 1989 से 1996 तक लगातार तीन बार गोरक्षपीठाधीस्वर और योगी के गुरु महंत अवैद्यनाथ इस सीट से सांसद रहे थे।

सूत्रों के अनुसार योगी ने अपनी तरफ से डॉ धर्मेंद्र सिंह का नाम आगे किया। योगी की पहली पसंद इस सीट पर डॉ धर्मेंद्र सिंह ही हैं। लेकिन यहाँ मामला इसलिए पेचीदा हो गया है क्योंकि धर्मेंद्र सिंह के नाम पर केंद्रीय नेतृत्व राजी नहीं है। इसी लिए एक और नाम योगी की तरफ से प्रस्तावित किया गया है महानगर के वरिष्ठ अधिवक्ता हरि प्रकाश मिश्र।

जानकारी के अनुसार हरी प्रकाश मिश्रा को पार्टी ने आज दिन में लखनऊ बुलाया। हालांकि देर रात तक कोई फैसला नहीं हो पाया है। यह माना जा रहा है कि योगी इस सीट पर अपने ही पसंद के किसी नेता को उम्मीदवार बनाना चाह रहे हैं जिससे इस सीट पर उनकी पकड़ बनी रहे।

गौरतलब है कि डॉ धर्मेंद्र सिंह मेयर पद के लिए भी सबसे आगे चल रहे थे लेकिन अंतिम वक़्त में उनका टिकट कट गया और पार्टी ने वर्तमान मेयर सीताराम जायसवाल को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। उस समय धर्मेंद्र सिंह को यह कह कर बैठाया गया था कि भविष्य में उनको कहीं न कहीं सेट किया जायेगा।

वहीँ भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष उपेंद्र दत्त शुक्ला काफी लंबे समय से पार्टी और जनता के बीच सक्रिय हैं। लेकिन अब तक उन्हे एक जनप्रतिनिधि के तौर पर जीवन व्यतीत करने का मौका नही मिल पाया है। हालांकि एक दो बार वह कौड़ीराम विधानसभा क्षेत्र से अपना भाग्य भी आजमाए किन्तु पार्टी का सहयोग उनको नही मिल पाया।उनकी जगह किसी और को पार्टी का सिम्बल मिल गया था।

लेकिन ये भी सही है जब जब उन्होंने सम्बन्धित विधानसभा क्षेत्रों में अपना भाग्य आजमाया तब तब वह अपने विरोधियों पर काफी भारी पड़े थे। हालांकि अबकी बीते विधानसभा चुनावों में सहजनवां से उनके नाम की चर्चा चल रही थी, कि वर्तमान विधायक शीतल पांडेय के नाम पर आम सहमति बनते ही कहानी खत्म हो गयी। इसके बावजूद वह बीजेपी के साथ हमेशा लगे रहे और पार्टी में क्षेत्रीय अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण ओहदे को सम्हालते रहे।

सबसे बड़ी बात कि अब तक बीजेपी के सभी क्षेत्रीय अध्यक्ष कहीं न कहीं सेट हो चुके हैं। ऐसे में यह उम्मीद की जा रही थी कि वर्षो से सतत प्रयत्नशील रहे उपेंद्र दत्त शुक्ला को पार्टी हाईकमान किसी अच्छे पद पर बिठायेगा।

इन सभी समीकरणों के बीच एक नया नाम हरि प्रकाश मिश्र का आ गया। माना जा रहा है कि श्री मिश्रा के मैदान में उतरने से योगी को इस सीट पर भविष्य में कोई खतरा नहीं रहेगा और वो सूबे के मुखिया का खड़ाऊं रख कर ही राज करेंगे।

अब लड़ाई होगी दिलचस्प

यदि सदर लोकसभा सीट से उपेंद्र शुक्ला के अलावा भाजपा से कोई और मैदान में उतरता है तो पार्टी के लिए पहले से ही मुश्किल राह और कांटो भरी हो सकती है। श्री शुक्ला को प्रत्याशी ना बनाये जाने की स्थिति में पार्टी से पहले ही कुछ निराश ब्राह्मण भाजपा से किनारा कर सकते हैं। बता दें कि समाजवादी पार्टी ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। उम्मीद की जा रही है कि पार्टी की तरफ से कोई निषाद उमीदवार ही मैदान में होगा। ऐसे में जातीय संतुलन भाजपा के खिलाफ जा सकता है। बसपा इस चुनाव में अपना प्रत्याशी उतार नहीं रही है। कांग्रेस ने डॉ सुजाहिता करीम पर दावं लगाया है। लेकिन मुस्लिम मतदाता वोट वहीँ डालेंगे जो भाजपा को हराने का माद्दा रखेगा।

बता दें कि गोरखपुर लोक सभा सीट पर सबसे ज्यादा निषाद मतदाता है जिनकी संख्या करीब 4 लाख है। दो विधान सभाओं पिपराइच और गोरखपुर ग्रामीण में सबसे ज्यादा निषाद मतदाता हैं। एक अनुमान के मुताबिक इस लोकसभा क्षेत्र में करीब 1,50,000 मुस्लिम, 1,50,000 ब्राह्मण, 1,30,000 राजपूत, 1,60,000 यादव , 1,40,000 सैंथवार और वैश्य व भूमिहार मतदाता करीब एक लाख की संख्या में है। ऐसे में जो भी पार्टी इन ज्यादा जातियों को साधने वाला प्रत्याशी उतारेगी जीत का सेहरा उसी के सर बंधेगा।

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