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कुशीनगर में शुरू हो गयी 2019 की जंग, होडिंग-बोडिंग के साथ मैदान में उतरे बसपा के संभावित प्रत्याशी

लोकसभा चुनाव 2019 जंग मैदान में उतरे बसपा के संभावित प्रत्याशी

मोहन राव/राकेश मिश्रा
कुशीनगर: जनपद में बहुजन समाज पार्टी ने सक्रियता दिखाते हुए अन्य दलों की अपेक्षा सबसे पहले अपने संभावित प्रत्याशियों को सतर्क किया है। पार्टी के नेता बसपा के संभावित प्रत्याशी के रूप में शुभकामनाओं की होडिंग वोटिंग के साथ मैदान में दिखने लगे हैं। बसपा ने अन्य दलों को पीछे पछाड़ते हुए आगामी लोकसभा चुनाव 2019की तरफ कदम बढ़ा दिए हैं।

जनपद में पडरौना लोकसभा सीट से बसपा के संभावित उम्मीदवार के रूप में रिजवान अंसारी का पोस्टर जगह-जगह देखा जा रहा है। यहां बताते चलें कि जनपद में बहुजन समाज पार्टी का ब्लॉक स्तर तक सक्रिय कार्यकर्ता हैं और बसपा को एक वर्ग विशेष का मत फिक्स माना जाता है। इस बार जनपद में कई युवा चेहरों को बसपा फ्रंट पर लायी है। इसी कड़ी में युवा रमेश कुमार को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। युवा चेहरा जिला प्रभारी सुरेश भारती भी जनपद में बसपाइयों को इकट्ठा कर लगातार लोकसभा चुनाव का रणनीति बना रहे हैं।

विधानसभा 2017 के चुनाव का जिक्र किया जाए तो बसपा का इस जनपद में खाता तक नहीं खुल पाया। लेकिन हाटा, खड्डा, पडरौन, फाजिलनगर और कुशीनगर विधानसभा के प्रत्याशियों की वजह से वहां के परिणाम बदल गए। बसपा अब इन मतो को सहेजने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है। इसी सोच के तहत समय से ही तैयारियां शुरू कर दी गई है।

बसपा के रिजवान अंसारी दूसरे बड़े मुस्लिम चेहरे के रूप में आए हैं। इसके पूर्व बसपा जावेद इकबाल पर कुशीनगर विधानसभा तथा पडरौना विधानसभा चुनाव पर दांव लगा चुकी है। उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के बसपा छोड़ भाजपा में जाने के उपरांत जावेद इकबाल पर जिम्मेदारियां बढ़ गई थी।

बसपा फिर एक बार नए युवा रिजवान अंसारी को आगामी चुनाव लोकसभा पडरौना सीट से लड़ाने के मूड में है। सूत्रों की माने तो रिजवान अंसारी को हाईकमान से संभवत: हरी झंडी मिल चुकी है इसी आधार पर जनपद में जगह-जगह होडिंग बोडिंग लगा रहे हैं।

गौरतलब है कि 2014 के लोक सभा चुनाव में यहाँ से भाजपा के राजेश पांडेय ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह को पटखनी दी थी। बसपा के डॉ संगम मिश्रा उस चुनाव में 1,32,881 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे थे। वहीँ 2009 के लोक सभा चुनाव में यहाँ से बसपा दूसरे नंबर पर रही थी। तब स्वामी प्रसाद मौर्या बसपा में थे और पार्टी ने उन पर दावं लगाया था। वो तक़रीबन 20000 वोटों से आरपीएन सिंह से हार गए थे। उस चुनाव में भाजपा के विजय दुबे यहाँ से तीसरे नंबर पर थे।

आपको बता दें कि 2014 के लोक सभा चुनाव में सबसे ज्यादा सेंध भाजपा ने बसपा के वोट बैंक में ही लगायी थी। जहाँ 2009 के चुनाव में स्वामी प्रसाद मौर्य 27.75 प्रतिशत वोट मिले थे वहीँ 2014 में बसपा के डॉ संगम मिश्रा को मात्र 13.98 प्रतिशत वोट ही मिले। मतलब बसपा को 13.77 प्रतिशत वोटों का नुकसान हुआ था। वहीँ भाजपा जिसे 2009 में 22.19 प्रतिशत वोट मिले थे उसने 2014 के चुनाव में 16.73 प्रतिशत वोटों का फ़ायदा हुआ था और उसके उम्मीदवार राजेश पांडेय को 38.92 प्रतिशत वोट मिले थे।

इस लोक सभा सीट में कांग्रेस का वोट प्रतिशत कमोबेश एक ही रहा। जहाँ आरपीएन सिंह को 2009 में 30.63 प्रतिशत वोट मिले थे वहीँ 2014 के चुनाव में इन्हे मात्र 0.71 प्रतिशत का नुकसान हुआ और उन्हें 29.92 प्रतिशत वोट मिले।

बसपा को पता है कि इस लोक सभा सीट में उसका अच्छा खासा वोट बैंक है जो निश्चित रूप से पार्टी के बड़े नेता स्वामी प्रसाद मौर्या के भाजपा में चले जाने से खिसक गया है। पार्टी एक मुस्लिम चेहरे को आगे कर यहाँ पर सोशल इंजीनियरिंग के उसी फॉर्मूले को आजमाना चाहती है जिसे 2014 के लोक सभा चुनाव और बाद में 2017 के विधान सभा चुनाव में भाजपा ने उससे छीन लिया है।

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