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गोरखपुर, वाराणसी, लखनऊ में दिखा चंद्रग्रहण, देखें NASA द्वारा जारी की गयी तश्वीरें

गोरखपुर, वाराणसी, लखनऊ में दिखा चंद्रग्रहण

गोरखपुर: आज साल का पहला चंद्रग्रहण लग रहा है। साल के पहले चंद्रग्रहण को लेकर देश के कोने-कोने में उत्सुकता देखने को मिल रही है। यह चंद्रग्रहण इसलिए भी खास है क्योंकि इस दिन तीन खगोलीय घटनाएं एक साथ हो रही हैं- ब्‍लडमून, सुपरमून, और ब्‍लूमून।

यही वजह है कि साल 2018 में के इस चंद्रग्रहण की महत्ता और भी बढ़ गई है। चंद्रग्रहण 4 बजकर 21 मिनट पर शुरू हो चुका है। यही वो समय था जब चांद ने पृथ्‍वी की कक्षा में प्रवेश किया। शाम 6 बजकर 21 मिनट पर पृथ्वी की छाया चांद पर होगी और अंधेरा छाया रहेगा।

Chandra Grahan Gorakhpur

Chandra Grahan Gorakhpur

दुनिया भर में अब चंद्रग्रहण दिखना शुरू हो गया है। जिसकी तस्वीरें भी अब आने लगी हैं। अंतरिक्ष एजेंसी नासा इसकी तस्वीरें और वीडियो भी लगातार जारी कर रहा है। ये तस्वीरें आसमान के अद्भुत नजारें का दीदार करा रही हैं।

Chandra Grahan in Gorakhpur

Chandra Grahan in Gorakhpur

देश के सभी हिस्सों में पूर्ण चंद्र ग्रहण देखा जा रहा है। भारत में यह ग्रहण शाम को 05.18 मिनट से दिखने लगा। गोरखपुर, वाराणसी, कानपुर, औरया, लखनऊ, जमशेदपुर, रांची, देवघर, जयपुर, चेन्नई सहित कई शहरों में लोगों ने चंद्रग्रहण देखा, वहीं बिहार के पटना और उत्तराखंड के देहरादून में बादल होने के कारण चंद्रग्रहण नहीं दिखाई दिया। ऐसा पहली बार 35 सालों में हो रहा है जब चांद तीन रंगों में दिखाई दे रहा है, भारत में यह रात 8:41 मिनट तक रहेगा।

चंद्रग्रहण के समय माना जाता है कि किसी भी शुभ चीजों को नहीं छूना चाहिए। इसके अलावा भगवान की मूर्ति को भी नहीं छूना चाहिए। वहीं, चंद्र्ग्रहण के समय प्रेग्नेंट महिलाओं को अपने घरों से बाहर नहीं निकलना चाहिए। चंद्रग्रहण भारत में कुछ जगह सबसे पहले दिखेगा।

क्या होता है सुपरमून?

क्या होता है सुपरमून?

क्या होता है सुपरमून?
चांद और धरती के बीच की दूरी सबसे कम हो जाती है और चंद्रमा अपने पूरे शबाब पर चमकता दिखाई देता है। यह पिछले साल 3 दिसंबर को भी दिखाई दिया था। चांद की तुलना में 14 फीसद ज्यादा बड़ा और 30 फीसद तक ज्यादा चमकीला दिखेगा। इस महीने पूर्ण चंद्रमा दिखने की घटना हो रही है. इस कारण इसे ब्लू मून भी कहा जा रहा है।

क्या होता है ब्लू मून

क्या होता है ब्लू मून

क्या होता है ब्लू मून

NASA के मुताबिक, ब्लू मून ढाई साल में एक बार नजर आता है। स्पेस डॉट कॉम की खबर के मुताबिक चंद्रमा के नीचे का हिस्सा ऊपरी हिस्से की तुलना में ज्यादा चमकीला दिखाई देता है और नीली रोशनी फेंकता है. आज के बाद ये 2028 और 2037 में देखने को मिलेगा।

ब्‍लड मून

ब्‍लड मून

ब्‍लड मून

चंद्र ग्रहण तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी एवं चंद्रमा ऐसी स्थिति में होते हैं कि कुछ समय के लिए पूरा चांद अंतरिक्ष में धरती की छाया से गुजरता है। लेकिन पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरते वक्त सूर्य की लालिमा वायुमंडल में बिखर जाती है और चंद्रमा की सतह पर पड़ती है. इसे ब्लड मून भी कहा जाता है। ये तीनों घटनाएं एक ही दिन हो रही हैं, इसलिए इसे सुपर ब्लू ब्लड मून भी कहा जा रहा है।

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