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महेसरा पुल: बतौर सांसद स्वीकृत कराया था बजट, अब उसी का उद्घाटन करेंगे सीएम योगी

गोरखपुर: भारत-नेपाल मार्ग को जोड़ने वाले जिस महेसरा पुल के निर्माण को लेकर तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ ने लंबे समय तक आवाज उठाई, अब उस पुल का उद्घाटन वह खुद मुख्यमंत्री बन करने वाले हैं। अच्छी खबर यह है कि भारत नेपाल सीमा को जोड़ने वाले गोरखपुर सोनौली मार्ग पर स्थित महेसरा पुल 9 सालों बाद बनकर तैयार हो गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 29 जनवरी को फीता काटकर महेसरा पुल का उद्घाटन करेंगे। 9 साल 4 महीने में 9.25 करोड़ की लागत से बने 62 मी मीटर लंबे पुल की काफी अहमियत है।

गौरतलब है कि तत्कालीन सांसद और यूपी के सीएम योगी आदित्य नाथ के प्रयास से महेसरा पुल निर्माण के लिए भारत सरकार के राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने सितंबर 2009 में 9.25 करोड रुपए स्वीकृत किया था। पुल की डिजाइन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाने में प्रदेश सरकार ने सवा साल लगा दिए। जनवरी 2011 में पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ, मार्च 2012 तक इसे पूरी हो पूरा हो जाना था। पर ठेकेदारों-कार्यदाई संस्था की लापरवाही के नाते तय समय तक पुल का एक खंभा भी नहीं बन सका।

इसके बाद महेसरा पुल के निर्माण में बरती जाने वाली लापरवाही के खिलाफ कई आंदोलन भी किए गए। समय-समय पर विभिन्न संगठनों खासकर महंत योगी आदित्यनाथ ने भी आंदोलन किया,साथ ही साथ हिंदू युवा वाहिनी, भारतीय जनता पार्टी,कई अन्य समाज सेवी संगठनों के लोगों ने भी आंदोलन किया। इसके बावजूद भी कुछ खास नहीं हुआ।

लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता, प्रमुख सचिव PWD, गोरखपुर के डीएम, कमिश्नर ,प्रदेश के सीएम और राज्यपाल के संज्ञान में भी यह बात लाई गई। बावजूद इसके इस कार्य में तेजी नहीं आई।इसके बा जब 2014 में केंद्र में भाजपा सरकार बनी तो इसके कार्य में तेजी तो आई,लेकिन फिर भी कार्य समय से पूरा नहीं हो सका। 2017 में जब उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आई और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने।इसके बाद 1 साल के भीतर यह पुल बनकर पूरी तरह तैयार हो गया है।

यह पुल पहली बार 2 अक्टूबर 2006 को क्षतिग्रस्त हुआ था और लगभग 1 माह तक इस पर यातायात बंद हो गया था। 11.67 लाख रुपए से मरम्मत करने के बाद यह पुल यातायात के लिए 29 नवंबर 2006 को खोला गया था।फिर दूसरी बार यह 29 अप्रैल 2007 को क्षतिग्रस्त हुआ और मरम्मत के बाद 30 जून 2007 को खुला। इस बार इसकी मरम्मत पर कुल 8.96 लाख रुपए खर्च हुए। तीसरी बार यह पुल 15 अगस्त 2007 को काफी क्षतिग्रस्त हो गया और इसकी मरम्मत में साढे 10 महीने का समय लग गया।इस कार्य पर भी 46 लाख रुपए खर्च हुए।

इस बार वैकल्पिक मार्ग के रूप में पीपे का पुल के पुल की लागत 1करोड़ 25 लाख रुपए थी। इसमें से 80 लाख का सामान और 45 लाख एजेंसी का चार्ज था।अगस्त 2008 में भी एकबार यह पुल क्षतिग्रस्त हुआ, फिर मरम्मत के बाद खोला गया और 25 टन से अधिक भार वाले वाहनों पर प्रवेश रोक लगा दी गई थी।

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