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प्रदेश में यहाँ बनेगा देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जुड़ने से पूर्वांचल को होगा लाभ

गोरखपुर: जल्द ही प्रदेश में देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट के निर्माण का कार्य शुरू हो जायेगा। संभावना है कि 2021 के अंत तक एयरपोर्ट से उड़ानें भी शुरू हो सकती हैं।
ग्रेटर नॉएडा के जेवर में एयरपोर्ट को रक्षा मंत्रालय से एनओसी मिल गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित यह एयरपोर्ट दिल्ली के इंदिरा गाँधी एयरपोर्ट से ढाई गुना ज्यादा बड़ा होगा।

दिल्ली पालम एयरपोर्ट 2,066 हेक्टेयर क्षेत्र में बनाया गया है। वहीं नोएडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट 5000 हेक्टेयर में बनाया जाएगा। बुधवार को रक्षा मंत्रालय से एनओसी मिलने से एयरपोर्ट का काम एक कदम और बढ़ गया। पालम एयरपोर्ट पर रनवे टर्मिनल से काफी दूर और अलग-अलग हैं। इससे यात्रियों को हवाई जहाज तक पहुंचने के लिए बस में जाना पड़ता है। जेवर में बनने वाले एयरपोर्ट का डिजाइन इस तरह तैयार किया जा रहा है कि टर्मिनल दो रनवे के बीच में बनाया जाए। इससे यात्री सीधे हवाई जहाज में बैठकर उड़ान भर सकेंगे।

यहां पहले चरण में हर साल 1 से डेढ़ करोड़ लोग यात्रा करेंगे। पहले चरण में दो रनवे बनाए जाएंगे। दूसरे चरण में रनवे की संख्या 4 कर दी जाएगी। यह एयरपोर्ट 4 चरणों में तैयार किया जाएगा। जो कमियां दिल्ली के पालम और नवी मुंबई के एयरपोर्ट में रह गईं उन्हें नोएडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट में पूरा कर लिया जाएगा।

एयरपोर्ट को दिल्ली एनसीआर के दो सौ किलोमीटर के शहर व कस्बों से सीधे जोड़ा जाएगा। इसके लिए रेल, मेट्रो, रोड, एक्सप्रेसवे कनेक्विटी तैयार करने के लिए मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम तैयार किया जा रहा है। दिल्ली से यात्री जेवर तक एक घंटे में पहुंच सकें, इस तरह सडक, हाई स्पीड मेट्रो चलाने पर काम किया जा रहा है। आगरा, मथुरा, वृंदावन, हरिद्वार, पलवल, देहरादून, बागपत, मेरठ और आस-पास के कस्बे और शहरों को यात्रियों के लिए आने-जाने के लिए रोड नेटवर्क तैयार किया जा रहा है।

वहीँ इस एयरपोर्ट को यमुना और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से भी जोड़ा जायेगा जिससे पूर्वांचल में रहने वाले लोगों के लिए यहाँ से उतर कर रोड के माध्यम से अपने अपने गंतव्यों तक पंहुचने में आसानी होगी।

साइज के आधार पर यह एयरपोर्ट देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा। आपको बता दें कि पहली बार जेवर में ग्रीनफ़ील्ड ताज इंटरनेशनल एयरपोर्ट और एविएशन हब बनाने का प्रस्ताव 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने दिया था। 2004 में इस सम्बन्ध में L&T Rambol Consulting Engineers ने इस सम्बन्ध में ने एक ड्राफ्ट भी तैयार किया था। बाद में 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने भी जेवर में एक अंतररष्ट्रीय एयरपोर्ट के निराम को अपना समर्थन दिया था। नॉएडा से सांसद महेश शर्मा ने भी इस प्रोजेक्ट के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ राखी थी।

2014 में केंद्र में और फिर 2017 में प्रदेश में भी भाजपा सरकार के आने के बाद जेवर एयरपोर्ट की बात ने एक बार फिर तेजी पकड़ी। 2017 में केंद्र सरकार ने एयरपोर्ट के प्रस्ताव को एक बार फिर से बनाया। जिस तरह से केंद्र सरकार जेवर एयरपोर्ट के काम को लेकर तेजी से आगे उससे ऐसा लगता है कि अगले जकुछ वर्षों में प्रदेश को देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट मिल जायेगा।

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