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VIDEO: सीएम सिटी में एक भूमाफिया दिखा रहा है प्रशासन को ठेंगा, रोक के बाद भी करा रहा है निर्माण

हितेश गोस्वामी
गोरखपुर: सूबे में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के तुरंत बाद हर शहर में फैले भूमाफियाओं पर लगाम कसने के लिए एंटी-भूमाफिया सेल का गठन किया गया था। लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी सूबे में सक्रिय भूमाफियाओं पर कोई लगाम नहीं लगायी जा सकी है। बाकी शहरों की तो बात छोड़िये, खुद सीएम सिटी में ही भूमाफियाओं पर नकेल नहीं लगायी जा सकी है। इन भूमाफियाओं से परेशान या पीड़ित लोग द्वारा प्रशासन की शरण में पंहुचने के बाद भी कोई कार्यवाई नहीं हो रही है। सभी लोगों को कोर्ट की शरण में जाना पड़ रहा है।

ताजा मामला शहर के एचएन सिंह चौराहे का है। जहाँ एक जमीन पर यथास्थिति बनाये रखने के आदेश के बाद भी एक बिल्डर तमाम नियम कानून को ठेंगा दिखा रहा है। सम्बंधित जमीन पर राजस्व परिषद द्वारा यथास्थिति बनाये रखने का आदेश भी दिया गया है लेकिन फिर भी वहां धड़ल्ले से निर्माण हो रहा है।

जानकारी के अनुसार दो लोगों अफरोज अतहर और वीरेंद्र कुमार अबरोल ने संयुक्त रूप से आराजी नंबर 971 में 2600 वर्ग फ़ीट जमीन महानगर के अशोक नगर, बशारतपुर निवासी रत्नेश मिश्रा पुत्र बागेश्वरी मिश्रा को 21 अगस्त 2017 को बैनामा कर दी थी। लेकिन अब इस जमीन पर प्रख्यात इंफ्राटेक के निदेशक रणधीर सिंह द्वारा कूटरचित दस्तावेज का इस्तेमाल कर निर्माण कराया जा रहा है। वो भी तमाम प्रशासनिक अमलों द्वारा यथास्थिति बनाये रखने के आदेश के बाद।

पुरे मामले को समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा। मूलतः आराजी 971 की जमीन अर्जुन सिंह केहर और उनकी पत्नी बेला रानी के नाम संयुक्त रूप से थी। यह जमीन कुल 3.57 एकड़ थी। इसमें से अर्जुन देव और बेला रानी ने नीला राय शर्मा को 5200 वर्ग फ़ीट और रामदेव राय को 5200 वर्ग फ़ीट बेच दिया। नीला राय शर्मा ने 5200 वर्ग फ़ीट जमीन का बैनामा लखनऊ निवासी सुरेंद्र लाल कपूर के नाम कर दी। सुरेंद्र लाल कपूर ने इसी जमीन का 2600 वर्ग फ़ीट 31 अक्टूबर 1984 को राम चंद्र शर्मा को और बाकी बची 2600 वर्ग फ़ीट जमीन 31 अगस्त 1985 को सतीश चंद्र श्रीवास्तव के नाम बैनामा कर दी। वो जमीन आगे सतीश चंद्र ने रीता श्रीवास्तव को बेच दी। श्रीमती श्रीवास्तव आज माकन बना कर के काबिज हैं।

वहीँ 5200 फ़ीट के दूसरे मालिक राम देव राय ने अपने हिस्से की जमीन वीरेंद्र कुमार अबरोल को बेच दी। श्री अबरोल ने सतीश चंद्र श्रीवास्तव को अपनी आधी जमीन बेच दिया। श्री श्रीवास्तव ने वो जमीन मित्र बिन्दा पांडेय को बेच दिया। जो वहां काबिज हैं। अपनी शेष जमीन को अफरोज अतहर जरिये न्यायलाय हुए समझौते के आधार पर डिग्री से दे दिया। श्रीमती अतहर 1989 से नगर निगम में हाउस टैक्स, बिजली के बिल के साथ वहां पर आबाद थीं। जिसका मकान संख्या 239बी है। आगे यह जमीन श्री अबरोल और श्रीमती अतहर ने संयुक्त रूप से रत्नेश मिश्रा को बैनामा कर दिया।

रत्नेश बताते हैं कि इसी आराजी की शेष अंश जमीन अर्जुन देव और बेला रानी ने 4 जून 2014 को संयुक्त रूप से पावर ऑफ़ अटॉर्नी एक व्यक्ति राजन कुमार के नाम कर दी। राजन कुमार अर्जुन देव के साले हैं। इसी बीच अर्जुन देव का 6 फरवरी 2015 को देहांत हो जाता है। उनके देहांत के बाद राजन कुमार ने दीवानी की डिग्री के बाद भी अबरोल और अतहर की उसी चौहद्दी की जमीन अकेले बेला रानी की दिखा दी। और संयुक्त पावर ऑफ़ अटॉर्नी को अकेले बेला रानी के द्वारा प्रख्यात इंफ्राटेक निदेशक रणधीर सिंह के नाम बैनामा करवा दिया। हैरानी की बात यह है कि उसी जमीन पर कोर्ट की डिग्री के बाद भी रणधीर सिंह ने उस जमीन को खारिज दाखिल करवा दिया। अधिकारी उस समय कहाँ सो रहे थे या क्या कर रहे थे ये वो ही बता पाएंगे।

रत्नेश मिश्रा बताते हैं कि इसी आराजी में 2014 में एक सीएमओ की जमीन भी रणधीर सिंह ने इसी पावर ऑफ़ अटॉर्नी के माध्यम से कब्ज़ा कर रखा है। इस जमीन का मुकदमा सिविल कोर्ट और हाई कोर्ट में लंबित है।

गैरकानूनी रूप से अपने जमीन पर महानगर के महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर 1 निवासी रणधीर सिंह को निर्माण कराता देख रत्नेश मिश्रा ने इसके खिलाफ तहसीलदार कोर्ट में कायानी दिया। कायानी ख़ारिज होने के उपरांत रत्नेश ने रेवेन्यू बोर्ड में अपील की।

बोर्ड ने सम्बंधित जमीन पर यथास्थित बनाये रखने का आदेश दिया। इसके बाद भी सम्बंधित जमीन पर निर्माण कार्य नहीं रुका। बाद में डीएम और कमिश्नर के आदेश पर रेवेन्यू बोर्ड के आदेश का अनुपालन किया गया। जिलाधिकारी ने इस मामले की जांच के लिए एसडीएम को लिखा। जांच अभी लंबित है।

रत्नेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील करते हुए कहते हैं कि सीएम सिटी में एक भूमाफिया द्वारा कब्ज़ा की गयी उनकी जमीन को मुक्त करने के लिए प्रशासन को आदेश देने की कृपा करें।

कौन हैं रणधीर सिंह के पीछे

यहाँ एक बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर इतने आदेशों के बाद भी स्थानीय प्रशासन विवादित जगह पर यथास्थिति बनवाये रखने में क्यों अक्षम है? 1989 से से काबिज अतहर का मकान रातो रात निर्माण करा कर उसकी मलकियात बदल दी गयी। रातों रात मलबा गायब हो गया। प्रशासन सोया रहा और एक व्यक्ति तमाम नियम कानून को धता बताते हुए एक महिला की जमीन पर कब्ज़ा कर लिया।

अब यहाँ एक सवाल उठना तो लाजमी है कि सबकी आँखों के सामने एक बिल्डर एक महिला की जमीन को कब्ज़ा कर लेता है और कोई कुछ नहीं कर पता। आखिर कौन है इस व्यक्ति के पीछे? क्या यह जानना जरुरी नहीं है कि आखिर किस आदेश से रणधीर सिंह कोर्ट के आदेश के बाद अफरोज अतहर का मकान गिरवा दिया। सच्चाई यह है कि अगर इस मामले में राजस्व अधिकारी ने जरा भी रूचि ले होती तो आज यह हालात नहीं होते।

इस मामले में रत्नेश बताते हैं कि बोर्ड के आदेश के बाद दिन में कुछ दिनों के लिए काम तो रुक गया लेकिन रात को अभी भी निर्माण कार्य जारी है। वीडियो में भी आप देख सकते हैं कि किस तरह सम्बंधित जमीन पर मजदूर काम कर रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर किसके दम पर यह शख्स तमाम प्रशासनिक आदेशों को ठेंगा दिखा रहा है।

रणधीर सिंह अख़बारों-अधिकारियों को भी कर रहा है गुमराह

यही नहीं प्रख्यात प्रख्यात इंफ्राटेक का निदेशक रणधीर सिंह अखबरों को भी गुमराह कर रहा है। बीते दिनों उसने यह खबर छपवाने में सफलता पायी कि दबंग लोग उसकी जमीन पर निर्माण कार्य नहीं होने दे रहे हैं। ऐसे में क्या यह जानना जरुरी नहीं है कि जिस जगह पर प्रशासन ने यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया है वहां निर्माण हो ही क्यों रहा है? क्या अधिकारियों को इस बात का संज्ञान नहीं लेना चाहिए था कि वहां रणधीर सिंह निर्माण कैसे करा रहा है?

खैर ऐसे कई सवाल रोज सीएम सिटी में उठते हैं। कुछ में जबाव मिल जाता है कुछ में नहीं। अब देखना होगा कि इस मामले में प्रशासन क्या करता है।

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