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गोरखपुर लोक सभा सीट: महेन्द्र पाल सिंह के नाम की चर्चा, संजय निषाद की डिमांड से भाजपा के छूटे पसीने

अरविंद श्रीवास्तव

गोरखपुर: कार्यकर्ताओं की माने तो भारतीय जनता पार्टी शीर्ष कमान द्वारा अभी तक गोरखपुर सदर सीट के उम्मीदवार की घोषणा न कर पाने में निषाद नेता डॉक्टर संजय निषाद की भूमिका बेहद अहम है।

महाराजगंज जौनपुर भदोही और गोरखपुर से संसदीय टिकट मांगने वाले डॉक्टर संजय निषाद ने अब आखरी वक्त पर पिपराइच विधानसभा से अपने लिए टिकट की मांग रखी है जिससे भाजपा के एक धड़े में खलबली मच गई है ।
पूरे देश में आचार संहिता लागू होने के बाद प्रथम चरण के चुनाव मतदान हो चुके है लेकिन अभी गोरखपुर लोकसभा सीट समेत पूर्वी उत्तर प्रदेश की कुछ सीटों पर कई राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशी घोषित होने बाकी हैं। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष कमान द्वारा अभी गोरखपुर सदर संसदीय सीट से अपने प्रत्याशी की घोषणा ना होने से समर्थकों मतदाताओं और कार्यकर्ताओं में ऊहापोह की स्थिति है।


चुनावी आबोहवा के बीच शुक्रवार की सुबह से ही अचानक पिपराइच विधानसभा सीट से जीते भाजपा विधायक महेंद्र पाल सिंह के नाम की चर्चा सदर लोकसभा सीट पर होने के कारण उहापोह की स्थिति में और ज्यादा इजाफा हो चुका है। पिछले 36 घंटों में राजनीतिक समीकरण जिस कदर बदले हैं उससे सभी पार्टियों के कार्यकर्ता बुरी तरह उलझे हुए दिखे है।. समाजवादी बसपा गठबंधन ने तो अपने प्रत्याशी सदर सीट से घोषित कर दिया है लेकिन कांग्रेस के अलावा कुछेक अन्य पार्टियों ने अभी भी अपने पत्ते नहीं खोले हैं।.


निषाद पार्टी का भाजपा में विलय होने के बाद से निवर्तमान सांसद गोरखपुर सदर प्रवीण निषाद के नाम की चर्चा गोरखपुर सदर सीट से पिछले 1 सप्ताह से लगातार चलती रही है लेकिन अचानक शुक्रवार से उक्त सीट के उम्मीदवार के रूप में पिपराइच के विधायक महेंद्र पाल सिंह के नाम की चर्चा शुरू होने से सारे समीकरण बनते बिगड़ते देखे गए।
यद्यपि भाजपा विधायक या किसी अन्य जिम्मेदार पदाधिकारी द्वारा अभी तक किसी के भी नाम पर मुहर नहीं लगाई है यहां तक की शनिवार की शाम 4:00 बजे तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में मौजूद रहे लेकिन उनके द्वारा भी कोई इशारा नहीं किया गया।
कयास यही लगाया गया है की पार्टी शीर्ष पर सिर्फ निषाद समुदाय के दो दिग्गजों के दबाव के कारण गोरखपुर सदर सीट का फैसला नहीं हो पा रहा है। पिपराइच विधायक महेंद्र पाल के नाम की चर्चा उम्मीदवार के रूप में होने के बाद से पार्टी कार्यकर्ता व समर्थक अपने अपने तरीके से दलीलें देना शुरू किया| उनके मुताबिक महेंद्र पाल सिंह को उम्मीदवार बनाया जाता है तो चुनाव परिणाम के तत्काल बाद पिपराइच विधानसभा सीट खाली होने पर उपचुनाव के लिए अमरेंद्र निषाद पर भाजपा के टिकट से दॉव लगाया जा सकता है और शायद मां बेटे की यही जिद्द भी है।
अब होने वाले संभावित उपचुनाव में डॉक्टर संजय निषाद द्वारा अपने लिए टिकट मांगने से एक बार फिर निषाद समुदाय के वोट बैंक बंटते दिख रहे हैं तो दूसरी तरफ भाजपा शीर्ष जिस तरह से सीटों का संयोजन करने जा रही थी उसमें भी एक बार फिर बाधा पहुंचती दिख रही है।

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