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महराजगंज की तराई में हॉलैंड के फूलों की खेती से लिखी तरक्की की नई इबारत

महराजगंज (ओंकार निरंजन): जिले के मिठौरा ब्लाक अंतर्गत ग्रामसभा कसमरिया निवासी ज्ञानेश्वर पटेल ने हॉलैंड में खुशबू बिखेरने वाले फूलों की तराई में खेती करके तरक्की की नई इबारत लिखी है। खेती से मोह भंग कर चुके किसानों के लिए ज्ञानेश्वर जिले में नज़ीर बनकर उभरे हैं।

धान, गेहूं व गन्ना उत्पादन में पहचान बनाने के बाद अब महराजगंज जिला फूलों की खेती की तरफ बढ़ चला है। कसमरियां निवासी ज्ञानेश्वर पटेल के पाली हाउस के हॉलैंड का जरवेरा फूल दिल्ली, लखनऊ, जयपुर, कोलकाता, बनारस सहित देश के तमाम महानगरों की मंडियों में शोभा बढ़ा रहे हैं। वैज्ञानिक विधि से ज्ञानेश्वर द्वारा पाली हाउस के माध्यम से बेमौसम खेती कर बड़ी संख्या में फूलों का उत्पादन किया जा रहा है।

ज्ञानेश्वर बताते हैं कि पिछले कई सालों से गेहूं एवं धान का उचित मूल्य न मिलने से खेती से मोह भंग होता जा रहा था। ऐसे में मैं विकल्प की तलाश में था। इसके बाद एक मित्र की सलाह पर दो हजार वर्ग मीटर जमीन में इस वर्ष पाली हाउस के माध्यम से फूलों की खेती शुरू किया। समय के साथ हॉलैंड के फूलों की डिमांड बढ़ी तो जरवेरा सहित कई फूलों को उगाना शुरू कर दिया।

वर्तमान में स्थिति यह है कि पाली हाउस में उत्तम गुणवत्ता वाले फूल पैदा किए जा रहे हैं। यहां 3 मजदूर दिन-रात खेतों की देखभाल करते हैं। नतीजन बारिश, पाला, गर्मी, अधिक आद्र्रता, कीट एवं रोगों से भी फूलों का बचाव भी होता रहता है। ज्ञानेश्वर ने बताया कि दिल्ली में पाली हाउस में उगे फूलों की मांग भी अधिक रहती है। इन फूलों को दिल्ली की गाजीपुर मंडी में ले जाकर बेचते हैं। अन्य फसलों के मुकाबले फूलों की खेती करने में अधिक लाभ होता है।

पाली हाउस में उगाया गया जरवेरा का एक फूल दिल्ली में 15 से 20 और महराजगंज में सात से दस रुपये में बिक जाता है। ज्ञानेश्वर पटेल की खेती में इस अभिनव पहल के चलते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।

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