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गोरखपुर उपचुनाव में सरकार की किरकिरी कराने वाले डीएम को प्रमोशन, बने मंडलायुक्त

गोरखपुर उपचुनाव में सरकार की किरकिरी कराने वाले डीएम को प्रमोशन, बने मंडलायुक्त

 
गोरखपुर: उपचुनाव में प्रदेश की दोनों सीटों पर हार के बाद यह उम्मीद तो थी की प्रशासनिक स्तर पर बड़े फेरबदल होंगे लेकिन किसी को इस बात का अंदेशा नहीं था कि गोरखपुर में मतगणना के दिन प्रदेश सरकार की जमकर किरकिरी कराने वाले सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ के चहेते जिलाधिकारी राजीव रौतेला का प्रमोशन होगा। वह भी तब जब हाई कोर्ट ने खनन के एक मामले में जिलाधिकारी को निलंबित करने का आदेश दे रखा है। वहीँ अब के विजयेंद्र पांडियन गोरखपुर के नए डीएम बनाए गए हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में भाजपा की करारी हार के बाद अफसरशाही में बड़ा फेरबदल किया है। दो दिन तक लगातार मंथन के बाद योगी ने शुक्रवार की आधी रात 37 आईएएस अफसरों के तबादले कर दिए। इनमें गोरखपुर सहित 16 जिलों के डीएम और वाराणसी सहित चार मंडलों के आयुक्त बदले गए हैं।

मुख्यमंत्री ने गोरखपुर, महराजगंज, बरेली, पीलीभीत, सीतापुर, बलिया, हाथरस, सोनभद्र, चंदौली, अमरोहा, हापुड़, बलरामपुर, भदोही, चित्रकूट, आजमगढ़, अलीगढ़ के मौजूदा डीएम को हटाकर नए अफसरों को तैनाती दी है। इनमें गोरखपुर के डीएम राजीव रौतेला को हटाकर देवीपाटन का मंडलायुक्त बनाया गया है। रौतेला पिछली सरकार के समय रामपुर में अवैध खनन से जुड़े मामले को लेकर चर्चा में हैं। हाईकोर्ट उनके खिलाफ तल्ख टिप्पणी कर चुकी है।

रौतेला को विशेष सचिव स्तर से सचिव एवं आयुक्त स्तर पर पदोन्नति मिली थी लेकिन उस समय गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी उत्सव, मतदाता सूची पुनरीक्षण, गोरखपुर महोत्सव और फिर गोरखपुर उपचुनाव के मद्देनजर उन्हें नहीं हटाया गया। उपचुनाव की मतगणना में भी रौतेला की भूमिका पर विपक्ष ने सड़क से सदन तक सवाल उठाए। सत्तारूढ़ दल की ओर से भी रौतेला की कार्यप्रणाली पर ऊंगली उठाई जा चुकी है। इसके बावजूद वह मंडलायुक्त जैसी सम्मानजनक पोस्टिंग पाने में सफल रहे हैं। रौतेला को देवीपाटन मंडल का आयुक्त बनाया गया है।

गौरतलब है कि उपचुनाव में भाजपा की हार का एक बड़ा कारण तत्कालीन जिलाधिकारी राजीव रौतेला की कार्यशैली भी थी। भाजपा की तरफ से चुनाव भले ही उपेन्द्र दत्त शुक्ल खड़े थे लेकिन चर्चा यहीं थी कि चुनावी मैदान में पहले नंबर के प्रत्याशी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं तो दूसरे नंबर के डीएम राजीव रौतेला। एसएसपी अनिरूद्ध सत्यार्थ पंकज और कमिश्नर अनिल कुमार की भूमिका को लेकर भर सवाल उठते रहे। नौकरशाही के प्रति लोगों के नजरिये को मतगणना के दिन फेसबुक पर एक भाजपा कार्यकर्ता के पोस्ट से समझा भी जा सकता है। 20 हजार से अधिक मतों से पिछड़ने पर एक कार्यकर्ता ने फेसबुक पर पोस्ट किया कि मुख्यमंत्री जी धैर्य रखें डीएम राजीव रौतेला पिच पर हैं।

डीएम राजीव रौतेला चुनाव को किस कदर प्रभावित कर रहे थे यह मतगणना के दिन साफ भी हो गया। जब नौ राउंड की गणना के बाद भी सिर्फ एक की घोषणा की गई। जिसमें भाजपा प्रत्याशी आगे थे। डीएम के चलते लखनऊ से लेकर दिल्ली तक भाजपा की फजीहत झेलनी पड़ी। एसएसपी की सांसद कमलेश पासवान से तल्ख झड़प तो सुर्खियां बनीं लेकिन तमाम ऐसे प्रकरण हुए जब डीएम और एसएसपी ने कार्यकर्ताओं को बेईज्जत करने का मौका नहीं छोड़ा।

कार्यकर्ताओं में अफसरों को लेकर गुस्से को सपा ने खूब भुनाया भी। प्रवीण निषाद के पिता डाॅ संजय निषाद कहते हैं कि डीएम राजीव रौतेला को रामपुर में अवैध खनन मामले में हाईकोर्ट ने निलंबित करने का आदेश जारी कर रखा है, लेकिन मुख्यमंत्री का प्रिय अपनी कुर्सी पर जमा हुआ है। मिटटी खनन में डीएम के अड़ियल रवैये का गुस्सा भी चुनाव में देखने को मिला। मिटटी और बालू की महंगाई भी चुनाव में मुददा बनीं। सांसद, विधायक से लेकर संगठन से जुड़े भाजपा नेताओं का दर्द है कि डीएम, एसएसपी पैरवी सुनना तो दूर सामान्य शिष्टाचार भी नहीं निभाते हैं। एक विधायक ने तो यहां तक आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के सामने डीएम कुर्सी पर बैठते हैं और हमें खड़ा रहना पड़ता है।

अन्य फेरबदल

बरेली के डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह को हटाकर कृषि उत्पादन आयुक्त शाखा में विशेष सचिव बनाया गया है। राघवेंद्र ने कासगंज दंगे के दौरान फेसबुक पर एक टिप्पणी की थी जिसे सरकार ने आपत्तिजनक मानते हुए जवाब तलब किया था।

महराजगंज के डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह को बरेली, पीलीभीत की डीएम शीतल वर्मा को सीतापुर, हाथरस के डीएम अमित कुमार सिंह को सोनभद्र, अमरोहा केडीएम नवनीत सिंह चहल को चंदौली, चंदौली के डीएम हेमंत कुमार को अमरोहा, सोनभद्र के डीएम प्रमोद कुमार उपाध्याय को हापुड़, हापुड़ के डीएम कृष्ण करुणेश को बलरामपुर, भदोही के विशाख जी. को चित्रकूट, चित्रकूट के डीएम शिवाकांत द्विवेदी को आजमगढ़ व आजमगढ़ के डीएम चंद्रभूषण सिंह को अलीगढ़ के डीएम के पद पर नई तैनाती मिली है।

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी की महत्वाकांक्षी पीएम आवास योजना शहरी रफ्तार नहीं पकड़ पा रही थी। सरकार ने लंबे समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के कमिश्नर रहे नितिन रमेश गोकर्ण को आवास विभाग की जिम्मेदारी सौंपी है। इनके अलावा आजमगढ़, देवीपाटन, सहारनपुर के भी मंडलायुक्त बदले गए हैं। इतनी माथापच्ची के बावजूद सरकार अपर मुख्य सचिव पंचायतीराज चंचल कुमार तिवारी का विकल्प नहीं खोज पाई है।

इन्वेस्टर्स समिट के दौरान अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त डा. अनूप चंद्र पांडेय तथा अपर मुख्य सचिव औद्योगिक विकास आलोक सिन्हा के बीच मनभेद आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई थी। शासन ने अपर सिन्हा को औद्योगिक विकास विभाग से हटाकर अपर मुख्य सचिव वाणिज्य कर एवं मनोरंजन कर बना दिया है। यह विभाग भी काफी महत्वपूर्ण है। लेकिन सरकार ने इन्वेस्टर्स समिट में आए निवेश प्रस्तावों पर अमल में किसी तरह की रुकावट न आए इसके लिए अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त पांडेय को ही औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव की भी जिम्मेदारी दे दी है।

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