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विवादित रहा है गोरखपुर के नए ADG दावा शेरपा का अतीत, भाजपा के भी रह चुके हैं सदस्य

विवादित रहा है गोरखपुर ADG दावा शेरपा का अतीत

राकेश मिश्रा
गोरखपुर: सूबे की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा 1992 बैच के आईपीएस अफसर दावा शेरपा को गोरखपुर ADG बनाये जाने का निर्णय अब विवादों में घिरता दिखाई दे रहा है। इसका कारण है दावा शेरपा का विवादित अतीत। वहीँ विपक्ष ने प्रदेश सरकार के इस निर्णय को पुलिस फ़ोर्स का भगवाकरण करने वाला कदम बताया है।

दावा शेरपा का कार्यकाल दो कारणों से विवादित बताया जा रहा है। पहला तो यह की उन्होंने बिना पुलिस की नौकरी से इस्तीफा दिए हुए भाजपा ज्वाइन किया था तो दूसरा यह कि वो लगातार 4 वर्षों तक नौकरी से अब्सेंट रहे हैं।

आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, शेरपा 2008 से 2012 तक नौकरी से गायब थे। जानकारी के अनुसार उन्होंने नौकरी से स्वैछिक सेवानिवृति के लिए आवेदन दिया था और उसके बाद एक लम्बी छुट्टी पर चले गए थे। छुट्टी पर जाते समय शेरपा सीतापुर में PAC के द्वितीय बटालियन के कमांडेंट थे। शेरपा की VRS अपील को भी इसलिए स्वीकार नहीं किया गया था क्योंकि वो उस समय तय मानकों को पूरा नहीं कर रहे थे। शेरपा उस समय तक नौकरी में 20 साल की जरुरी शर्त पर खरे नहीं उतर रहे थे।

news18.com के अनुसार नौकरी से गायब रहने के दौरान शेरपा अपने गृहनगर दार्जीलिंग चले गए थे और वहां गोरखलैण्ड पॉलिटिक्स का एक जाना पहचाना नाम बन गए थे। बाद में उन्होंने भाजपा ज्वाइन किया और उस प्रदेश के राज्य सचिव भी बने।

जानकारी के अनुसार वर्तमान गृह मंत्री राजनाथ सिंह के करीबी माने जाने वाले शेरपा दार्जीलिंग से 2009 का लोक सभा चुनाव लड़ना चाहते थे। लेकिन भाजपा ने अंतिम समय में वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह को मैदान में उतार कर उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। उसके बाद शेरपा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और अखिल भारतीय गोरखा लीग ज्वाइन (ABGL) कर लिया। इसके अतरिक्त वो डेमोक्रेटिक फ्रंट के कन्वेनर का पद भी सम्भलते रहे। आपको बता दें कि डेमोक्रेटिक फ्रंट ABGL सहित 6 क्षेत्रीय दलों का एक फ्रंट था।

शेरपा उत्तर प्रदेश पुलिस में वापस 2012 में सक्रिय हुए। उन्हें 2013 में प्रोन्नत कर DIG रैंक दिया गया। बाद में वो IG रैंक पर प्रमोट हो गए।

शेरपा की नियुक्ति का विरोध करते हुए समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता सुनील सिंह साजन ने कहा है कि सरकार को दावा शेरपा के विवादित अतीत के बारे में स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को यह क्लियर करना चाहिए कि शेरपा ने नौकरी से गायब रहने के दौरान किस पार्टी के लिए काम किया।

वहीँ कांग्रेस ने भी शेरपा को तत्काल पद से हटाए जाने की मांग की है। कांग्रेस प्रवक्ता ज़ीशान हैदर ने इस संबंध में जांच की मांग भी उठायी है कि कैसे शेरपा ने बिना नौकरी से इस्तीफा दिए कोई पार्टी ज्वाइन कर ली और बाद में फिर उसी पार्टी की सरकार बन जाने के बाद नौकरी में वापस आ गए।

इस सम्बन्ध में जब प्रदेश भाजपा प्रवक्ता शलभ मणि त्रिपाठी से इस संवाददाता ने बात की तो उनका कहना था कि शेरपा ने यदि नियमों के विरुद्ध कोई काम किया था पिछली सपा सरकार को उनके खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि सूबे में योगी आदित्यनाथ सरकार को आये तो अभी मात्र 10 महीने हुए हैं वहीँ जो भी विसंगतिया बताई जा रही है वो सब सपा के दौर में हुआ था।

शलभ ने कहा कि यदि एक व्यक्ति आईपीएस की नौकरी में है तो राज्य सरकार है की वह उस सम्बंधित अधिकारी का पाने हिसाब से समुचित प्रयोग करे। यही कारण है कि भाजपा सरकार ने शेरपा की नियक्ति की है और इस संबंध में किसी को कोई विवाद नहीं उठाना चाहिए।

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