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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष: सही सोच ही महिलाओं को मंजिल तक पहुंचाएगी: अंजू चौधरी

सुगंधा श्रीवास्तव
गोरखपुर: हर साल की तरह इस बार भी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है। कहीं इस आयोजन की सार्थकता और किए गए प्रयास साफ तौर पर दिखते हैं तो कहीं मात्र कोरम पूरा किया जाना प्रतीत होता है। बढ़-चढ़कर नारे लगाए जाते हैं। इस संदर्भ में जब हमने उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष और पिछले दो दशकों से सामाजिक सरोकारों से जुड़ी पूर्व मेयर अंजू चौधरी से बात की तो उनका कहना था कि गांव की अपेक्षा शहरों में महिला शिक्षा और जागरूकता दोनों दिखता है।

उनका कहना था कि जहां तक महिला उत्पीड़न और शिकायतों की बढ़ती फेहरिस्त का सवाल है तो इसके पीछे भी कई जगहों पर महिलाएं ही जिम्मेदार हैं कई परिवारों में संस्कार का अभाव खटकता है। मां बाप का बच्चों से लगाव या यूं कहें कि उन्हें समय देने में कोताही बरती जा रही है । खुलापन के नाम पर फैशन परस्ती और फिर छेड़खानी व रेप जैसी घटनाओं को दावत देने के समान है।

एक अन्य सवाल के जवाब में अंजू चौधरी ने कहा कि हमारे सामने जो प्रत्यक्ष उदाहरण हैं एक तो अभी हाल ही में पुलवामा कांड के बाद एक फाइटर जेट प्लेन को भारतीय महिला पायलट द्वारा उड़ाते हुए आतंकियों को सबक सिखाने जैसा दिलेरी पूर्ण कार्य किया गया है तो वही दूसरा उदाहरण है गांव में शिक्षा और मनरेगा जैसे रोजगार उपलब्ध हैं लेकिन आर्थिक दीनता के कारण थोड़ी पढ़ाई करने के बाद किशोरिया मनरेगा में कमाई करने चली जाती है। कहने का तात्पर्य है कि पूर्ण शिक्षा के अभाव में इंटरनेट और फैंसी ड्रेस गांव की किशोरियों के पांव डगमगाने में जरा भी देख नहीं लगाते और फिर शिक्षा के अभाव में उनका शारीरिक मानसिक उत्पीड़न भी होता है।

उन्होंने कहा कि एक भारतीय महिला बच्चा पैदा कर सकती है बच्चे को खिला भी सकती है तो वही देश भी चलाकर दिखाया है। जरूरत है तो उसे प्राथमिकता तय करने की, क्योंकि सही सोच ही उसे उसकी मंजिल तक पहुंचाएगी और यही महिला दिवस मनाने का उद्देश्य भी है ।

संस्कार और पुलिस महिलाओं को दे सकती है राहत : रामकृपाल मौर्य

पुराने समय में सामाजिक संरचना में गांव की अहम भूमिका हुआ करती थी। आज गांव कस्बे शहरीकरण की ओर चल पड़े हैं , पश्चिमी सभ्यता गांव तक पहुंच चुकी है, ऐसे में संस्कारों का हनन होना भी स्वभाविक है।उक्त बातें मानवाधिकार प्रोटेक्शन ऑर्गेनाइजेशन केगोरखपुर मंडल प्रभारी  रामकृपाल मौर्य ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर कहा।
उन्होंने कहा कि संस्कारों के अभाव में महिलाओं का उत्पीड़न सबसे अधिक गांव में ही हो रहा है , दूसरी तरफ देश के किसी भी कोने में महिलाओं को न्याय या इंसाफ दिलाने में स्थानीय पुलिस की भूमिका सर्वोपरि होती है ऐसे में पुलिस अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकती । बड़े बुजुर्गों को एक बार फिर परिवारवाद की डोर संभालनी होगी ,अपनी भूमिका का निर्वाह करना होगा तभी समाज का भला होगा और महिलाएं फिर से पूज्य होंगी।

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