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उपचुनाव की हार के बाद क्या अब गोरखपुर में भाजपा भी जातिगत समीकरणों पर करेगी राजनीति!

हरिकेश सिंह
गोरखपुर: प्रदेश में हुए हालिया लोकसभा उपचुनाव में 2 सीटों पर विपक्षी दलों द्वारा जातिगत राजनीति का कार्ड खेलने से मिली हार से भाजपा ने भी अब जातीय समीकरण साधने का प्रयास शुरू कर दिया है। शीर्ष नेतृत्व से निर्देश मिलने के बाद भाजपा ने इस पर कार्य भी शुरू कर दिया है क्योंकि अगले साल 2019 में ही देशभर में आम चुनाव होने हैं और भारतीय जनता पार्टी किसी भी हालत में अपनी इस खोई हुई सीट पर पुनः अपने प्रत्याशी को बैठाना चाहेगी।

बता दें कि इसी माह हुए लोकसभा उपचुनाव में गोरखपुर के सांसद से मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ को अपनी सीट विरोधी दल सपा-बसपा,राष्ट्रीय निषाद पार्टी एवं पीस पार्टी के गठबंधन के बाद खेले गए जातिगत राजनीति के कार्ड से गवानी पड़ी है। जिससे अब भाजपा के सामने संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है कि इस गठबंधन से कैसे निपटा जाए।

इस गठबंधन से निपटने के लिए भाजपा के शीर्ष पदाधिकारियों ने रणनीति बनानी शुरू कर दी। जिसके तहत भाजपा विधायक एवं पदाधिकारियों को 4-4 सेक्टर का प्रमुख बनाया गया है। यह सेक्टर प्रमुख 6-6 दिन पर प्रत्येक सेक्टर में प्रवास करेंगे। वहां पहुंचकर सेक्टर प्रमुख बूथ समितियों की समीक्षा करेंगे और देखेंगे कि जातिगत समीकरण, सामाजिक संगठन एवं भौगोलिक स्थिति का सामंजस्य बूथ समितियों में बैठ रहा है कि नहीं। अगर यह सामंजस्य नहीं बैठता है तो वह बूथ समितियों का पुनर्गठन करके जातिगत समीकरण, सामाजिक संगठन एवं भौगोलिक स्थिति का सामंजस्य बैठाएंगे।

सेक्टर प्रमुख समितियों के माध्यम से हर जाति एवं वर्ग के लोगों को यह बताने का काम करेंगे कि भाजपा किसी जाति एवं धर्म विशेष की पार्टी नहीं है, बल्कि सर्व समाज की पार्टी है ।अतः किसी भी अन्य पार्टियों के बहकावे में आकर मतदान ना करें, कुछ इस तरह की रणनीति अपनाकर अब भाजपा हर जाति वर्ग के लोगों का वोट बैंक साधने की कोशिश करेगी।

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