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कुशीनगर हादसा: कुदरत की मार के बाद अब सिस्टम की मार, सरकार द्वारा पीड़ित परिवार को मिले चेक का नहीं हो रहा है भुगतान

कुशीनगर: जनपद के दुदही रेलवे स्टेशन के पास बहपुरवा रेलवे क्रासिंग पर 26 अप्रैल हुई दुर्घटना में अपने कलेजे के टुकडों को खो चुके पीड़ित कुदरत की मार के बाद अब सिस्टम की मार झेलने को विवश हैं। ट्रेन की चपेट मे स्कूली बस के आने से मरे 13 मासूमों के परिजनों के आंसू पोछने के लिए प्रदेश सरकार व रेल प्रशासन ने 2-2 लाख रुपये के चेक तो दिए हैं लेकिन कर्मचारियों की लापरवाही व बैक की मनमानी से पीड़ितों के खाते में धन नहीं जा पा रहा है।

स्थिति यह है कि रेलवे द्वारा दिए चेक को बैंक वाले जमा नहीं कर रहे हैं तो तहसील प्रशासन द्वारा दिए गए कई चेक ऑब्जेक्शन लगकर वापस आ जा रहे हैं। यही नहीं चेक क्लीयर न होने के बावजूद भी क्लीयरेंस के नाम पीडतों के खाते से रकम अलग से कट जा रही है। लोगो ने आर टी जी एस के जरिए धनराशि खातों में अंतरित करने की मांग की है।

26 अप्रैल की सुबह थावे से गोरखपुर जा रही पैसेंजर ट्रेन की चपेट में स्कूली बस के आ जाने से 13 मासूमों की मौत हो गई। हादसे के शिकार तेरह मासूमों के आठ परिवार को रेल विभाग तथा जिला प्रशासन ने दो-दो लाख के हिसाब से घटना के दिन ही चेक उपलब्ध करा दिया था। आनन फानन में दिए गए चेको में त्रुटियां हो गई जिसके पीड़ितों को गलती दुरुस्त कराने के लिए कई बार तहसील का चक्कर काटना पड़ा. परंतु बात यही तक सीमित नहीं रही अपने दो बेटों को खोने वाले हैदर ने जब तहसीलदार द्वारा दिए गए चेक को बैंक मे जमा किया तो ऑउट ऑफ रेंज की टिप्पणी के साथ वापस आ गया है।

अपने तीनों बच्चो रवि, टुन्नु,रागिनी को खोने वाले मिश्रौली निवासी अमरजीत को मिले छह-छह लाख के दोनों चेक क्लीयर नहीं हो सका है। रेल विभाग के चेक को बैंको ने वाराणसी भेजा है जो दस दिन बाद भी क्लियर नहीं हुआ है। अमरजीत को तहसील प्रशासन द्वारा दिया गया चेक की धनराशि दो-दो बार खाते में पोस्ट बैंक ने वापस ले लिया है। अमरजीत को मिले चेक भी आपत्ति लग कर दोबारा वापस आ चुका है। रुपये तो अमरजीत के खाते में पोस्ट तो नहीं हुए उल्टे बैंक ने दो बार में 472 रुपये जरूर काट लिए हैं।

दो बच्चो मेराज और मुस्कान को खोने वाले मैनुद्दीन को भी रेल से मिला चेक पेंडिंग ही है। एक-एक बेटे खोने वाले जहीर और नजीर को तो अपना चेक दुरुस्त कराने रेल विभाग के ऑफिस वाराणसी तक जाना पड़ा, लेकिन रुपया अभी भी खाते तक नहीं आ सका है। अपनी दो बेटियों साजिदा और तमन्ना को खोने वाले हासन के खाते मे 8.50 लाख रुपये पोस्ट होने के बाद 4.50 लाख रुपये वापस ले लिया।

यही नहीं रेलवे द्वारा दिए गए चेक को दुदही पीएनबी रेलवे द्वारा दिए गए चेक को जमा नहीं कर रहा है। चेक को वाराणसी जमा करने का सलाह बैंक द्वारा दिया जा रहा है। इन पीड़ित परिवारों का चेक भुगतान के लिए बैंको का चक्कर लगाना उनके दुखों पर भारी पड़ रहा है। घायलों को मिले चेक का भी यही हाल है। इन परिवारों के लोगो ने मदद की धनराशि को सीधे खातो में आर टी जी एस के जरिए भेजे जाने की मांग की है।

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