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आशा ज्योति केंद्र की पूजा पाण्डेय की मेहनत लायी रंग, गूगल मैप के सहारे पहुंचा दिया बिछड़ी महिला को घर

गणेश पाण्डेय
गोरखपुर: अपनों से बिछड़े अगर किसी के पहल से घर लौट आएं तो सारी खुशियाँ लौट आती हैं। ऐसे ही एक घर में बीते दिनों ज्योति आशा केंद्र की प्रबंधक पूजा पाण्डेय के प्रयासों से खुशियां लौट आयी। एक महिला जो मानसिक तौर पर विछिप्त थी, उसको उसके परिवार से मिलाने के लिए पूजा को लगभग एक सप्ताह का वक़्त लग गया। अंततः बिना नाम पता के पूजा महिला के घर तक पहुंचने में कामयाब रहीं।

बीते 5 अक्टूबर को चंडीगढ़ से घर को निकली महिला (35 वर्ष) ना जाने कैसे अपने परिवार से बिछड़ कर गोरखपुर रेलवे स्टेशन पहुंच गई । महिला को रेलवे स्टेशन गोरखपुर की सूचना पर 181 द्वारा आशा ज्योति केंद्र गोरखपुर लायी गयी। पूजा बताती हैं कि प्राथमिक उपचार के बाद पता चला कि महिला का मानसिक स्थिति ठीक नही है । महिला कुछ भी बता पाने में असमर्थ थी। इस पर पूजा पाण्डेय ने महिला को बीआरडी मेडिकल कालेज के मानसिक परीक्षण केंद्र में भर्ती करवाया। जहाँ इलाज के उपरांत महिला ने बताया कि वो दुधिपट्टी सिमरी की रहने वाली है और भाई चंडीगढ़ पुलिस में है । परंतु महिला जिला और राज्य बता पाने में असमर्थ थी।

महिला के गांव का सही पता लगाने के लिए पूजा ने सोशल मीडिया के साथ साथ गूगल मैप का सहारा लिया । जिससे पता चला कि दुधिपट्टी सिमरी गांव बिहार प्रान्त के बक्सर जिले के अंतर्गत आता है। फिर क्या था गांव का पता चलते ही एक उम्मीद जग गयी थी कि अब महिला अपने घर सही सलामत पहुंच जाएगी । आशा ज्योति केंद्र की प्रबंधक पूजा पाण्डेय ने सिमरी थाने के इंसपेक्टर और एसआरसीडब्लू टीम से सम्पर्क किया और घर के लोगों से सम्पर्क करने को कहा।

बीते 18 अक्टूबर को रात के 11 बजे पूजा पाण्डेय के फ़ोन पर महिला के भाई ने काल किया । रोते रोते भाई ने सारा वृतांत पूजा से कह सुनाया । महिला के भाई ने बताया कि चंडीगढ़ से लापता हुई थी । चंडीगढ़ और दिल्ली तक ढूंढ लिया था । लेकिन बहन का कंही भी कोई पता नही चला। उसने थानों में भी रिपोर्ट दर्ज करवा रखी है। अब तो वो उम्मीद ही छोड़ दिया था । महिला के भाई को ढांढस बंधाते हुए पूजा ने परिवार संग गोरखपुर स्थित आशा ज्योति केंद्र आने को कहा। 19 अक्टूबर को भाई परिवार संग आशा ज्योति केंद्र पहुंचा जहाँ पर पूजा पाण्डेय ने कानूनी औपचारिकता पूरी करते हुए महिला को उसके परिवार वालों को सुपुर्द कर दिया।

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