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पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे को मिली योगी कैबिनेट की मंजूरी, पीएम मोदी रखेंगे 14 जुलाई को आधारशिला

गोरखपुर: प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे परियोजना के विभिन्न पैकेजों के ईपीसी पद्धति पर क्रियान्वयन हेतु चयनित निर्माणकर्ताओं के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। परियोजना के निर्माण की अवधि तीन वर्ष है, जिसके अनुसार एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य 2021 तक पूरा हो जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 14 जुलाई को इस परियोजना का शिलान्यास करेंगे। परियोजना जिन क्षेत्रों से होकर गुजरेगी, वहां सामाजिक आर्थिक विकास के साथ ही कृषि, वाणिज्य, पर्यटन एवं उद्योगों को बढावा मिलेगा।

मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में ये फैसले किये गये। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे परियोजना की आकलित सिविल कार्य निर्माण लागत लगभग 11836.02 करोड रूपये है और बिड 5 . 24 प्रतिशत कम आयी है।

ईपीसी ‘इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन’ है, जिसका मतलब है कि अनुबंध के तहत ईपीसी ठेकेदार को डिजाइन, खरीद, निर्माण से लेकर परियोजना के कार्यान्वयन निर्माण, शुरूआत और हस्तांतरण तक की प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार बनाया जाता है।

प्रवक्ता ने बताया कि प्रस्तावित एक्सप्रेसवे परियोजना में सुल्तानपुर जिले के निकट एक ‘एयर स्ट्रिप :हवाई पटटी:’ का निर्माण किया जाएगा ताकि आपातकालीन स्थिति में भारतीय वायुसेना के विमान उसका उपयोग कर सकें।

354 किलोमीटर लंबा पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे लखनऊ से शुरू होकर बाराबंकी, फैजाबाद, अंबेडकरनगर, अमेठी, सुल्तानपुर, आजमगढ़, मऊ और गाजीपुर से होकर गुजरेगा। ये ऐसा एक्सप्रेस-वे होगा जिसपर शायद ही कभी जाम की समस्या हो। एक्सप्रेस-वे के जरिए लखनऊ से गाजीपुर की यात्रा साढ़े 4-5 घंटे में पूरी होगी। यह एक्सप्रेसवे लखनऊ के चंदसराय गांव से शुरू होगा और गाजीपुर के हैदरिया गांव तक बनेगा।

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे देश का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे होगा। एक्सप्रेस-वे 6 लेन का होगा, जो कि 8 लेन तक बढ़ सकेगा। इस एक्सप्रेस वे को अयोध्या, इलाहाबाद, वाराणसी और गोरखपुर से लिंक रोड के माध्यम से जोड़ा जाएगा। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे में आजमगढ़ से गोरखपुर के लिए नया लिंक एक्सप्रेस-वे बनाया जाएगा। ये लगभग 100 किलोमीटर का लिंक एक्सप्रेस-वे होगा, जो योगी के गृह जनपद को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ेगा।

सरकार ने 2 साल 6 महीने में एक्सप्रेस-वे का कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इस एक्सप्रेस-वे की खासियत ये होगी कि ये सभी बाजारों के नजदीक से होकर गुजरेगा।

अखिलेश यादव का था ड्रीम प्रोजेक्ट

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दिसंबर 2016 को जब इस परियोजना का शिलान्यास किया था, तब इसका बजट 20 हजार करोड़ रुपए बताया गया था। इसमें से 7 हजार करोड़ रुपए भूमि अधिग्रहण में खर्च होने थे। इसका शिलान्यास करते हुए तब अखिलेश ने कहा था कि यदि हम सत्ता में लौटे तो तो आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे की तरह इस एक्सप्रेस-वे का उद्धाटन भी शानदार होगा। अखिलेश यादव ने इसे अपना दूसरा बड़ा ड्रीम प्रोजेक्ट बताया था।

बताया जा रहा है कि जब अखिलेश ने इसका शिलान्यास किया था तब पूरी परियोजना के लिए आधी जमीन अधिग्रहित नहीं की गई थी। 2017 में उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद बीजेपी सरकार ने परियोजना को यह बताते हुए रद्द कर दिया था कि जमीन की कमी है। इसके बाद बीजेपी सरकार ने कुछ बदलाव किए और परियोजना फिर से शुरू हो रही है। पीएम मोदी फिर से शुरू हो रही इस परियोजना की नींव रखेंगे।

कैबिनेट ने अन्य महत्वपूर्ण फैसले

–उत्तर प्रदेश माटी कला बोर्ड के गठन का फैसला किया। प्रवक्ता के अनुसार यह बोर्ड प्रशिक्षण, तकनीकी कार्यशालाएं, विकास गतिविधियां, नवीनतम तकनीक एवं उपकरण, बैंक रिण, कामगारों को आवास आदि के लिए जिम्मेदार होगा। पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से सरकारी कार्यालयों एवं सार्वजनिक स्थानों पर मिटटी के कुल्हडों के प्रयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।

–कैबिनेट ने आपातकाल के समय लोकतंत्र की रक्षा के लिए सक्रिय रूप से संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके पात्र आश्रितों को हर महीने दी जाने वाली सम्मान राशि को 15 हजार रूपये से बढाकर 20 हजार रूपये कर दिया है।

–कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश राज्य सडक परिवहन निगम से संबंधित 11 जुलाई 2003 के शासनादेश में मृतक आश्रितों की भर्ती पर लगायी गयी रोक को शिथिल करते हुए निगम में चालक—परिचालक के 587 मृतक आश्रितों की नियुक्ति प्रदान करने का फैसला किया है।

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