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ज़रूर पढ़े: महिला अधिकारी ने दृढ़ निश्चय से बदली गांवो की तस्वीर, अब हो रही ‘देवी मां’ के रूप में पूजा

iasरांची: झारखंड की एक प्राचीन जनजाति की महिलाओं को खूबसूरत कलाकृतियां बनाते और पुरुषों को नशे की हालत में घूमते देख हैरान-परेशान एक महिला नौकरशाह ने उनकी दशा बदल दी। यह अधिकारी अब इलाके के 25 से भी ज्यादा गांवों में ‘देवी मां’ के रूप में पूजी जाती हैं।
वर्तमान में झारखंड की पर्यटन निदेशक सुचित्रा सिन्हा की तस्वीर आज जनजातीय लोगों के घरों में अन्य देवी-देवताओं के साथ पूजागृह में लगी है।
रांची से लगभग 135 किलोमीटर दूर नीमडीह प्रखंड के समनपुर गांव की सबर जनजाति की मंजू ने  बताया, “वह हमारी मां हैं। हमारी ‘देवी’ मां। हमने भगवान को नहीं देखा, लेकिन जब भी हमें उनकी जरूरत हुई, यह मां हमारे साथ हमेशा खड़ी रहीं।”
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केवल समनपुर गांव के 250 परिवार ही नहीं, बल्कि मकुल, भंगद, बिंदुबेड़ा, बिरिदुडीह, चिरुबेड़ा और कई अन्य गांवों में भी सिन्हा को भगवान के समान पूजा जाता है।
मंजू ने कहा, “मां के कारण ही हमारे घरों में खाना बनता है, हमारे बच्चों का पोषण होता है और हमारे घरों के पुरुष जिंदगी की सही राह पर आ गए हैं।”
वर्ष 1988 में बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली सुचित्रा सिन्हा 1990 में जमशेदपुर की डिप्टी कलक्टर के तौर पर नियुक्त होने के समय नक्सली विद्रोहियों के प्रभाव वाले उस अविकसित इलाके के बारे में जानती थीं, लेकिन 1996 में एक समारोह में शामिल होने के लिए उनका समनपुर गांव जाना इस कहानी में एक नया मोड़ साबित हुआ।
उन्होंने इस मामले को उप विकास आयुक्त (डीडीसी) के समक्ष रखा, जिन्होंने उनकी बात पर गौर करने की बजाय उन्हें अपने पद से जुड़े कर्तव्यों पर ध्यान देने की सलाह दी।
सुचित्रा का उपहास उड़ाते हुए उन्होंने कहा कि यह सोचना मूर्खता है कि गांववालों की शराब की लत छुड़ाना संभव है। यहां तक कि सिन्हा के परिवार ने भी उनके इरादे में साथ न देते हुए उनका मजाक उड़ाया।

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