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मालिकों को अपनी मांगे ना मानते देख समाचार पत्र विक्रेताओं ने उपभोक्ताओं से माँगा सहयोग

Image-for-representationगोरखपुर: पारिश्रमिक बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे शहर के 1300 समाचार पत्र विक्रेताओं का हड़ताल अनवरत जारी है।
हड़ताल के कारण अभी भी शहर के लगभग सभी छोटे-बड़े दैनिक अखबार शहर में नहीं बंटे। मालिकों की तरफ से किसी भी तरह की कोई सहायता ना मिलते देख समाचार पत्र विक्रेताओं ने अब उपभोक्ताओं से गुहार लगायी है।
समाचार पत्र विक्रेता संघ, गोरखपुर ने पाठकों से अपील की है की वो जनवरी 2016 से पत्र विक्रेताओं को को प्रति माह 15 रुपये होम डिलीवरी चार्ज दें।
विक्रेता संघ के अद्यक्ष आजाद शुक्ला ने पाठकों से कहा है की अखबार विक्रेता आज की महगांई के दौर में जिस मेहनत से आप के घरों पर जाड़ा, गर्मी, बरसात में पेपर पहुँचाते हैं वो बहुत ही कठिन काम है।
उन्होंने कहा,”प्रतिदिन हम लोगों को सुबह उठना, सेंटर पर जा कर पेपर लेना और उमस मैगज़ीन लगाने के बाद घर-घर पहुचना पड़ता है। और उसका उचित मजदूरी नहीं मिलता”.
विक्रेता संघ ने पाठकों से यह अपील भी उनको पेपर के मूल्य का भुगतान महीने की 10 तारीख से पहले कर दे साथ ही कहा की यदि कोई ग्राहक 5 दिन के लिए भी घर से बहार जाता है तो उन दिनों के लिए पेपर बंद नहीं होगा.
समाचार पत्र विक्रेता पिछले चार महीने से पारिश्रमिक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। काफी दिनों से अखबार उन्हें तयशुदा 30 फीसदी कमीशन दे रहे हैं जबकि इस दौरान अखबारों की विज्ञापन से आय काफी बढ़ी है।
गोरखपुर में चार प्रमुख अखबारों के दाम 3.50 रूपए है। समाचार पत्र विक्रेताओं ने समाचार पत्रों के प्रबंधन से कमशीन बढ़ाने की मांग की। साथ ही उन्होंने पर्चा जारी कर पाठकों से अपनी समस्याओं का उल्लेख करते हुए उनसे हर माह 15 रूपए सार्विस चार्ज देने की अपील की।
संगठन के दबाव पर अमर उजाला और हिन्दुस्तान ने दो माह पहले समाचार पत्र विक्रेताओं को हर समाचार पत्र पर पहले से तयशुदा 30 फीसदी कमीशन के अलावा 25 पैसे अतिरिक्त शुल्क देना स्वीकार कर लिया। दैनिक जागरण ने अतिरिक्त शुल्क नहीं दिया। इसी बीच तीनों समाचार पत्रों ने एक राय होते हुए फरवरी से यह शुल्क भी देने से इंकार कर दिया।
इससे खफा समाचार पत्र विक्रेताओं ने एक फरवरी को दैनिक जागरण वितरित नहीं किया। और उसके बाद उन्होंने किसी भी कीमत पर वितरण का कार्य पूरी तरह से ठप निर्णय ले लिया ।

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