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शहरी क्षेत्र के कूड़े के निस्तारण में बदलाव, अब वैज्ञानिक तरीके से होगा निस्तारण

गोरखपुर: जनपद के शहरी क्षेत्रों में कूड़े के अव्यवस्थित तरीके से हो रहे निस्तारण से आबोहवा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसको देखते हुए सरकार ने कूड़े के निस्तारण में बदलाव की व्यवस्था की है।

इसके तहत जहां पर कूड़ा निकाला जायेगा, उसी स्थान पर जैविक और ठोस कूड़ा को अलग करना होगा। जैविक व ठोस कूड़े के अलग-अलग निस्तारण के लिए नगर निगम द्वारा डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन में ही दो रंग के डस्टबिन का प्रयोग किया जा रहा है ताकि सूखा व गीला कूड़ा अलग-अलग किया जा सके। जैविक व ठोस कूड़े के निस्तारण के लिए महानगर के कई पार्को में गड्ढा करके व महेसरा में बने डंपिंग जोन में जैविक व ठोस कूड़ा को अलग -अलग निस्तारण किया जा रहा है।

केन्द्र सरकार के गाइड लाइन के मुताबिक वैज्ञानिक तरीके से कूड़ा निस्तारण पर जोर दिया गया है। इसके मद्देनजर नगर विकास विभाग ने विगत दिनों सभी नगर निकायों को शहर में निकलने वाले दो तरह का कूड़ा वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित करने की कार्ययोजना तैयार करने का दिशा निर्देश जारी किया है।

इस संबंध में नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश सिंह ने बताया कि कुछ पार्को को चिह्नित कर उसमें जैविक व ठोस कूड़ा के तत्काल निस्तारण की व्यवस्था की गयी है। वैज्ञानिक तरीके से कूड़े के निस्तारण पर जोर दिया जा रहा है। महेसरा में बने डंपिंग जोन में कूड़े को अलग-अलग करके उसका सही निस्तारण कराया जा रहा है।

जबकि घरो व सार्वजनिक इकाइयों से निकलने वाले कूड़ा को अलग-अलग करने के लिए दो तरह के कूड़ेदान रखे जा रहे है। इसके लिए जनता को भी जागरूक किया जा रहा है। लोगों को समझाया जायेगा कि वे सक्षम है तो खुद कूड़ेदान की व्यवस्था कर लें या कूड़ा की जिम्मेदारी संभाल रही एजेंसी इसकी व्यवस्था करेगी।

घरों के बाहर कूड़ेदान रखने की योजना पर आने वाले खर्च में केन्द्र सरकार भी मदद करेगी। गाइडलाइन में कूड़ेदान खरीदने पर आने वाले खर्च का 35 प्रतिशत धन केन्द्र सरकार देगा और शेष धन राज्य सरकार व संबंधित नगर निकाय को देना होगा।

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