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गोरखपुर उपचुनाव: कौन पड़ेगा किस पर भारी, कोई सुंघा रहा कमल का फूल, तो कोई करा रहा साईकिल की सवारी

गोरखपुर: चुनाव के अंतिम दौर का अजब नजारा दिख रहा है, कोई कह रहा है “ए भइया, देखिहा, साइकिलिए हर्जे-गर्जे में काम आवेले” तो थोड़े ही दूर पर सुनने को मिला कि देखा चाची, ई कमल के फूल हे,ई खिली ते भगिए फरिया जाइ। कुछ इसी तरह की जमीनी कवायद आज पार्टियों के कार्यकर्ताओ द्वारा देखने को मिल रही है।

कल होने वाले लोकसभा उपचुनाव के मतदान में ज्यादा से ज्यादा मत अपने पक्ष में करने की जमीनी जंग जारी हो चुकी है। जिसमें सत्ताधारी दल भाजपा के नेता कार्यकर्ता अपना चिर परिचित चुनाव चिन्ह मतदाताओं को दिखा कर आश्वस्त हो रहे हैं,तो वहीं विरोधी दल सपा को समर्थन देने वाली बसपा के कार्यकर्ता भी अपने मतदाताओं के दिमाग में चुनाव चिह्न ‘हाथी’ की जगह ‘साइकिल’ को अंकित करने में जुट गए है।

गौरतलब है कि कल 11 मार्च को लोकसभा के उपचुनाव का मतदान दिवस है,और इसी दिन पक्ष-विपक्ष के किस्मत पर जनता जनार्दन अपनी पसंद नापसन्द को उंगली दिखाएगी।इसी जंग को जीतने के लिए पिछले लगभग एक माह से चल रहै सामूहिक वाकयुद्ध और भीड़ भाड़ का दौर 9 मार्च को समाप्त होने के बाद अपनी दोनों ही पक्षों की पैदल सेना अपनी रणनीति पर काम करना शुरू कर दी है।

जिसमे बीजेपी के कार्यकर्ता अपने परिचित चुनाव चिन्ह “फूल”को लोगों को दिखा कर आशीर्वाद के रूप मे उनके मतदान की अपेक्षा कर रहे हैं,तो वहीं समाजवादी पार्टी और निषाद पार्टी कर लोग आम बोलचाल की भाषा मे “साइकिलिया” पर बटन दबाने की अपील कर रहे हैं।किंतु सपा को समर्थन देने वाली दूसरी बड़ी पार्टी बसपा के पदाधिकारी व कार्यकर्ता कार्ययोजना बनाकर अपने खांटी मतदाताओं को सपा की ओर मोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।

इसके लिए उन्हें बसपा के बेस वोटर तक यह बात पहुंचाने में काफी मेहनत करनी पड़ रही है कि इस बार हाथी की जगह साइकिल पर बटन दबाना है।इस बिंदु पर काम कर रहे क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि काम में थोड़ी परेशानी जरूर है, लेकिन हमारा मतदाता राष्ट्रीय अध्यक्ष की मंशा के अनुसार ही वोट करता है।

बसपा जिलाध्यक्ष घनश्याम राही के अनुसार बसपा पदाधिकारी दिन-रात मेहनत कर अपने मतदाताओं के बीच समर्थन की बात पहुंचा रहे हैं। जिस तरह से हमारे वोटर बसपा को वोट देते आए हैं, उसी प्रकार सपा प्रत्याशी को भी वोट देंगे।

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