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कुख्यात बदमाश चंदन सिंह का गुर्गा दीपक मिश्रा सहित 6 अन्य चढ़े पुलिस के हत्थे

कुख्यात बदमाश चंदन सिंह पुलिस के हत्थे चढ़ा

गोरखपुर: वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अपराध और अपराधियों पर अंकुश लगाने के लिए जगह-जगह पर चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इस चेकिंग अभियान के दौरान कुख्यात शातिर अपराधी चंदन सिंह का गुर्गा दीपक पुलिस के हत्थे चढ़ा है। ये शातिर अपराधी किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में थे । कड़ाई से पूछताछ के बाद इनके और 6 साथी भी पुलिस के हत्थे चढ़े हैं।

बता दें कि पकड़ा गया अपराधी दीपक मिश्रा एक खूंखार अपराधी है।पुलिस ने चेकिंग के दौरान इसके पास से 315 बोर का एक तमंचा और एक जिंदा कारतूस पुलिस को बरामद हुआ है। पुलिस ने जब पूछताछ शुरू की तो एक के बाद एक खुलासा होता चला गया और पुलिस को चौका देने वाली जानकारी हाथ लगी। जिसमें पता चला कि रचित हॉस्पिटल के पास लूट की घटना और गोरखनाथ थाना क्षेत्र में लूट की घटना को अंजाम दिया गया था।

अपराधियों ने पुलिस को बताया कि वो लोग लूट के पैसों का जल्द ही बटवारा करने वाले थे। पुलिस को इन अपराधियों के पास लगभग 5 लाख 99 हजार रुपया मिले। तीन मोटरसाइकिल, XUV गाड़ी समेत रचित हॉस्पिटल के एक्सिस बैंक खाते की जमा पर्ची समेत पुलिस को कुछ और सबूत हाथ लगे हैं। फिलहाल पुलिस ने लूट में शामिल 7 अपराधियों को धर दबोचा है।

आज खुलासा करते हुए पुलिस अधीक्षक नगर विनय कुमार सिंह ने पुलिस लाइन में बताया कि विगत 17 जून को हुई लूट के सम्बंध में जरिये विश्वसनीय सूत्र सूचना मिलने पर देवरिया बाईपास तिराहे पर गाड़ी में जा रहे कुछ संदिग्ध व्यक्तियों का पुलिस ने पीछा कर जब तलाशी लिया तो उनके पास से पिस्टल व 315 बोर का तमंचा बरामद हुआ। जिससे पुलिस ने सभी को हिरासत में लेकर जब पूछताछ किया तो और भी चौकाने वाले मामले सामने आए।

पुलिस के मुताबिक पकड़े गए लोगों में अविनाश तिवारी निवासी बेलकुर, थाना गगहा, दीपक मिश्रा निवासी सोहगौरा, थाना गगहा, प्रदीप कुमार निवासी रानीडीहा, थाना कैंट, आदर्श कुमार निवासी बेबरी, थाना गोला, प्रभुनाथ पासवान निवासी बहुरीपार थाना बांसगांव, आनंद कुमार निवासी बघराई, थाना बांसगांव, राजकुमार निवासी दीवान बाजार थाना कोतवाली के रूप में हुई। वहीँ राणा प्रताप सिंह उर्फ पिंकू सिंह निवासी पाली थाना सहजनवा फरार है।

एसपी सिटी ने बताया कि दीपक और अविनाश शातिर लुटेरा हैं। इनके ऊपर 20 से ज्यादा मुकदमें दर्ज हैं। राजकुमार वर्मा भी लूट के कई मामले में शामिल रहा है। यह तीनों चंदन गिरोह से भी जुड़े हैं। दीपक मिश्रा चंदन का खास आदमी है। रचित हास्पिटल के कर्मचारी से लूट की घटना को अंजाम देने के लिए उन्हेंने अस्पताल के तीन कर्मचारियों से मुखबिरी कराई थी।

आदर्श कुमार उर्फ अनिल कुमार रचित हास्पिटल में काम करता था। उसने लूट की प्लानिंग बनाई थी और दीपक के सम्पर्क में आया था। आदर्श ने हास्पिटल में कुछ दिन काम करने के बाद नौकरी छोड़ दी थी पर अन्य कर्मचारियों के सम्पर्क में था। इसी कड़ी में दो कर्मचारी प्रभुनाथ पासवान और आनंद कुमार को लूट की योजना में शामिल किया और रुपये आने जाने की मुखबिरी करने के लिए राजी किया था।

प्रदीप कुमार मिश्रा की मोहद्दीपुर में पैथोलाजी है। वह आदर्श के रिश्ते में भी आता है। लूट की रकम से पैथोलाजी में मशीन सहित अन्य उपकरण खरीदने के लिए वह वारदात में शामिल हुआ था। रकम लूटने के बाद दीपक और अविनाश सीधे प्रदीप के पास पहुंचे थे। उन्होंने उसी के पास लूट की रकम छोड़ दी थी और वहां से गाड़ी लेकर फरार हो गए थे। लूट की रकम से प्रदीप ने एक एक्सरे मशीन तथा अन्य उपकरण खरीदे थे।

पांच महीने पहले हुई रचित हास्पिटल के कर्मचारी से लूट के मामले में काफी कोशिश के बाद भी पुलिस को कामयाबी नहीं मिल रही थी। पुलिस को यह तो शक था कि अस्पताल के कर्मचारी लूट की मुखबिरी में शामिल हैं लेकिन कोई सुराग नहीं मिल रहा था। अस्पताल प्रबंधन की तरफ से भी सभी कर्मचारियों को अच्छा बताया जा रहा था। पुलिस को सुराग आदर्श उर्फ अनिल की गिरफ्तारी के बाद मिली।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक 31 दिसम्बर को पुलिस ने तमंचे के साथ अनिल को गिरफ्तार किया था। उसकी मोबाइल की जांच की गई तो पुलिस को एक क्लू मिला। मोबाइल में एक नम्बर रचित हास्पिटल के कर्मचारी का था। उसके बाद पुलिस ने उस कर्मचारी का मोबाइल सर्विलांस में ले लिया और आदर्श उर्फ अनिल पर भी नजर रखने लगी। जमानत पर बाहर आने के बाद वह अपने साथियों से मिला। उधर, अस्पताल के कर्मचारी से बातचीत पुलिस सुन रही थी। जिसके बाद लूट का पूरी कहानी सामने आ गई।

 

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