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गोरखपुर समेत चार धार्मिक नगरों को जोड़ने वाला योगी का ड्रीम प्रोजेक्ट पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे लटका

गोरखपुर: सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। योगी सरकार की बहुप्रतिक्षित परियोजना पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का निर्माण अब अधर में लटक गया है। कैबिनेट ने इस एक्सप्रेस-वे के सारे टेंडर निरस्त कर फिर टेंडर करवाने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार के प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार ने टेंडर की दरों को और कम करने के लिए टेंडर निरस्त किया है। जल्द ही नए सिरे से टेंडर जारी किए जाएंगे।

बहुप्रतीक्षित देश का सबसे लम्बा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे गोरखपुर से बेलघाट-कम्हरिया घाट पुल के माध्यम से जुड़ने वाला था। इसके लिए गोरखपुर-जैतपुर-कम्हरिया घाट मार्ग को फोरलेन बनाने की योजना थी। इसी फोरलेन को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाने वाला था।

बता दें कि चार धार्मिक शहरों वाराणसी, इलाहाबाद, अयोध्या और गोरखपुर को जोड़ने वाले पूर्वांचल एक्सप्रेस का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 19 मार्च को करने वाले थे। 19 मार्च को ही योगी सरकार का एक साल पूरा हुआ।

प्लान के अनुसार यह एक्सप्रेसवे वाराणसी में एनएच 33 से और अयोध्या, इलाहाबाद और गोरखपुर में इसे लोकनिर्माण विभाग के लिंक मार्ग से जोड़ते हुए पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे में मिलाया जाएगा। लखनऊ, गाजीपुर, बलिया, बनारस पूर्वान्चल एक्सप्रेसवे 353 किमी का है।

गौरतलब है कि सूबे की योगी आदित्यनाथ सरकार ने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे की तर्ज पर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर भी एयर स्ट्रिप बनाये जाने का निर्णय लिया था, जहां आपात स्थिति में विमानों की लैंडिंग हो सकेगी। यह एयर स्ट्रिप सुल्तानपुर जिले में कुडेभार में बनाई जाएगी।

लखनऊ से गाजीपुर के 353 किलोमीटर लंबी इस सड़क परियोजना की लागत करीब 25 हजार करोड़ रुपए आने का अनुमान था। प्लान के अनुसार पूर्वांचल एक्सप्रेस वे लखनऊ, बाराबंकी, फैजाबाद, अंबेडकरनगर, अमेठी, सुल्तानपुर, आजमगढ़, मऊ और गाजीपुर से होकर गुजरेगा। यह एक्सप्रेस वे 6 लेन का होगा, जिसे बाद में 8 लेन तक बढ़ाया जा सकेगा। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की चौड़ाई 110 मीटर से बढ़ा कर 120 मीटर कर दी गई है।

प्रस्तावित एक्सप्रेसवे के बनने से लखनऊ और बलिया के बीच सफर में लगने वाला समय करीब 5 घंटे तक कम हो सकता है, वहीं इलाके के किसानों को अपनी उपज तेजी से मंडियों तक पहुंचाने और बेहतर कीमत हासिल करने में मदद मिलेगी।

श्री शर्मा ने राजधानी लखनऊ में बताया कि अब शार्ट सिंगल प्रोसेस के जरिये नए टेंडर निकाले जाएंगे। इसके तहत वित्तिय एवं तकनीकी बिड एक ही साथ खोली जाएगी। इस प्रक्रिया में कुल लगभग 45 दिन का समय लग सकता है।

हालांकि सरकार की तरफ से यह बताया गया कि पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के लिए वर्तमान में जो टेंडर जारी किए गए थे, उनके मुताबिक दरें 10.7 प्रतिशत तक ही पहुंच पाई थी। नए टेंडर में यह टेंडर और नीचे गिर सकते हैं, जिससे पूर्वाचल एक्सप्रेस-वे की लागत में और कमी आने का अनुमान है। श्रीकांत शर्मा ने बताया कि कैबिनेट की बैठक में कुल 17 प्रस्ताव आये थे, जिन्हें अनुमोदित कर दिया गया।

उन्होंने बताया कि सरकार ने प्रदेश में बिजली की चोरी रोकने के लिए अब एंटी थिफ्ट थाने खोलने का फैसला किया है। यह यूपी के सभी 75 जिलों में खोले जाएंगे। इसके लिए अलग से पद सृजित किये जाएंगे और इसका पूरा खर्चा उत्तर प्रदेश पॉवर कार्पोरेशन लिमिटेड उठाएगा। शर्मा ने बताया कि एंटी थिफ्ट थाने में कुल 28 कर्मचारी तैनात किए जाएंगे, जिसमें एक इंस्पेक्टर, 5 उपनिरीक्षक, 11 हेड कांस्टेबल और 9 कांस्टेबल शामिल होंगे। इसमें दो कर्मचारी चतुर्थवर्ग से रखे जाएंगे।

उन्होंने बताया कि इससे ईमानदार उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा होगी और बिजली की चोरी को रोकने में मदद मिलेगी। पुलिस की अपनी कार्यों में व्यस्तता ज्यादा होती है, इसीलिए अलग से यह नियुक्तियां की जा रही हैं।

ऊर्जा मंत्री बताया कि इसके अतिरिक्त कैबिनेट में उप्र दुग्ध विकास नीति को मंजूरी प्रदान कर दी गई। यह नीति पांच वर्ष के लिए प्रभावी रहेगी और इससे अगले पांच वर्षो में 10 लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। योगी की कैबिनेट ने संतकबीर नगर में स्थित कबीर के निर्वाण स्थल मगहर में एक अंतर्राष्ट्रीय शोध अकादमी खोलने की मंजूरी प्रदान कर दी है। इस पर कुल 2493.75 लाख रुपये का खर्च आएगा।

(IANS)

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