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बाहुबली नेता राजकिशोर ने थामा कांग्रेस का हाथ, बस्ती लोकसभा सीट पर मुकाबला हुआ दिलचस्प

राकेश मिश्रा
गोरखपुर: बाहुबली नेता और सूबे में अखिलेश यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे राजकिशोर सिंह ने सपा का दामन छोड़ आज कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर लिया। राजकिशोर सिंह तीन बार विधायक और अखिलेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे हैं। इस बार महागठबंधन में बस्ती की सीट बीएसपी के खाते में चले जाने के बाद से ही राजकिशोर के कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस में जाने की अटकलें लगायी जा रही थी।

एसपी-बीएसपी गठबंधन में टिकट नही मिलने से नाराज़ राजकिशोर अपने भाई डिंपल सिंह के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए। नए बने समीकरणों के अनुसार राजकिशोर अब बस्ती लोकसभा 61 से काग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। बता दें कि राजकिशोर सिंह के बस्ती से चुनाव लड़ने पर अब इस सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो जायेगा। कांग्रेस ने पहले यह सीट जन अधिकार पार्टी को दी थी। जन अधिकार पार्टी के टिकट पर चंद्रशेखर चुनाव मैदान में उतरने वाले थे। लेकिन अब राज किशोर सिंह के आने से बस्ती लोकसभा का समीकरण पूरी तरह बदल जायेगा।

गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बस्ती से दोबारा वर्तमान सांसद हरीश द्विवेदी पर ही भरोसा जताया है। वहीँ बहुजन समाज पार्टी ने यहाँ से सांसद रह चुके राम प्रसाद चौधरी पर दावं लगाया है।

हर्रैया से तीन बार विधायक और मंत्री रहे सपा नेता राजकिशोर सिंह बस्ती सहित मंडल की तीनों सीटें बसपा के खाते में जाने से शीर्ष नेतृत्व से नाराज थे। तभी से यह कयास लगाए जा रहे थे कि राजकिशोर कांग्रेस अथवा भाजपा में जा सकते हैं। एक समय था जब समाजवादी पार्टी में राजकिशोर की खूब चलती थी। इनकी मजबूती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में वह योगी आदित्यनाथ के गढ़ में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी को जिताकर अपने राजनीतिक कला कौशल का लोहा मनवा चुके हैं।

राजकिशोर सिंह के राजनीतिक सफर की शुरुआत एपीएन डिग्री कॉलेज में बतौर छात्र नेता के रूप में हुई। वर्ष 2002 में वो डिग्री कॉलेज में उपाध्यक्ष पद का चुनाव तो हार गए लेकिन इसी वर्ष वो जिला पंचायत सदस्य बने। उसके बाद उन्होंने बसपा के टिकट पर हर्रैया से चुनाव लड़ा और विजयी होकर विधान सभा पंहुचे। 2003 में बसपा से बगावत कर राजकिशोर मुलायम से जा मिले। इसी वर्ष वो पहली बार कैबिनेट मंत्री भी बने। 2007 में राजकिशोर एक बार फिर विधायक बने लेकिन सूबे में मायावती की सरकार बन गयी और राजकिशोर के भाई डिंपल को गैंगस्टर एक्ट के तहत जेल जाना पड़ा।

2012 में राजकिशोर के भाग्य ने फिर पलटा खाया और प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी। राजकिशोर एक बार फिर मंत्री बने। राज किशोर सपा सरकार में बागवानी व पंचायती राज मंत्री रहे।हालांकि उसी दौरान अखिलेश यादव से मतभेद होने के कारण राजकिशोर भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त कर दिए गए।

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