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गोरखपुर उपचुनाव: मंदिर की सीधी भागीदारी ना होना, बार-बार चुनाव के कारण क्या मतदाता रहे उदासीन!

हरिकेश सिंह/राकेश मिश्रा
गोरखपुर: आज गोरखपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में मतदान के दौरान 2014 के आम चुनावों के मुकाबले लगभग 11:64 फीसद मतों की गिरावट के पीछे क्या रहस्य है! आखिर कौन सी ऐसी वजह बन गई ,जो मतदाताओं ने अपना विश्वास इस उपचुनाव में नहीं जताया। कहीं इसके पीछे प्रत्याशी का बदला चेहरा या फिर सरकार आने के बाद कई अन्य कारक तो नहीं है, या फिर मतदाता पर्चियों का अधिकांश जगहों पर समय से न पहुंचना और आज हुए मतदान के दौरान कई जगहों पर ईवीएम मशीनों की गड़बड़ी! आखिरकार कुछ तो ऐसी वजह है जिससे यह मतदान प्रभावित हुआ है।

बात करें गोरखपुर सदर संसदीय सीट की तो बीते 5 लोकसभा चुनाव में यह वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कब्जे में रही है। जो प्रत्येक चुनाव में मतदाताओं का विश्वास हासिल कर कुछ ना कुछ बढ़त के साथ इस संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व संभालते रहे हैं। बात करें वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों की तो भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी व वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस सीट को जीता था और उस समय गोरखपुर लोकसभा चुनाव में मतदाताओं ने 54.64 प्रतिशत मतदान कर लोकतंत्र में अपनी आस्था जताई थी।

किंतु 2017 में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान योगी आदित्यनाथ ने इस क्षेत्र की अधिकांश सीटों पर भगवा का झंडा बुलंद कर विरोधी दलों की बाजी पलट दी और प्रदेश के मुख्यमंत्री पद को संभाल लिया। वैधानिक नियमों के अनुसार मुख्यमंत्री बनने के 6 माह के भीतर उन्हें यह सीट छोड़नी थी,लिहाजा उन्होंने अपने लोकसभा सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया।इसके बाद इस सीट पर उप चुनाव घोषित हुए।

उपचुनाव को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन ने बीते 1 माह से ढेर सारी तैयारियां करते हुए मतदाताओं को जागरूक करने के लिए तमाम तरह के कार्यक्रम भी आयोजित किए। किंतु आज हुए मतदान में मत प्रतिशत में गिरावट दर्ज की गई, आखिर इसके पीछे वजह क्या है । कहीं इसके पीछे प्रदेश में बीते दिनों हुए शिक्षामित्रों के समायोजन का मामला या फिर आंगनबाड़ी कार्यकत्री, आशा बहुओं की मांग तो नहीं, जिनकी नाराजगी से मत प्रतिशत गिरा हो।

इसके अतिरिक्त जो प्रमुख कारण सामने आ रहा है। वह है लोकसभा क्षेत्र में तैयार हुए मतदाता पर्चियों का सही से सटीक स्थान पर वितरण ना होना। साथ ही साथ मतदाता सूची में ढेर सारी खामियां। आज हुए मतदान के दौरान पूरे लोकसभा क्षेत्र में तमाम स्थानों पर लगी ईवीएम मशीनों की गड़बड़ी भी, जिससे कई जगहों पर तो मतदान आधा से डेढ़ 2 घंटा तक विलंब से शुरू हुआ तो वहीं कई जगहों पर मशीनें फिर काम ना कर सकी और दोबारा मशीन लगाने की बात आई। जिससे अधिकांश मतदाता नाराजगी वश इंतजार करते-करते वापस अपने घरों को चले गए।

जनता का इस चुनाव में बढ़ चढ़ कर भाग ना लेने का एक कारण यह भी हो सकता है कि बीते एक वर्ष में यह तीसरा चुनाव है जो जनता पर थोपा गया है। 2017 में पहले विधान सभा चुनाव, फिर नगर निकाय चुनाव और उसके बाद यह उपचुनाव। गौरतलब है कि अगले 8-10 महीनों के अंदर ही 2019 का आमचुनाव होना है। इसका मतलब यह की की जो भी इस सीट से चुना जाएगा वो मात्र 8-10 महीनों के लिए सांसद होगा। उसके बाद फिर पार्टियां चुनाव मैदान में होगी और फिर एक नया सांसद चुना जायेगा।

अब चाहे जो भी कारण रहा हो आने वाला 14 मार्च ही बताएगा कि मतदाताओं की इस नापसंदगी के पीछे क्या वजह है और किसके हाथ गिरे हुए मत प्रतिशत के बावजूद बाजी लगेगी।

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