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गोरखपुर उपचुनाव: निषाद बाहुल्य मतों पर कैंडिडेट चयन करेगी सपा, चयन अंतिम दौर में

लोक सभा उपचुनाव

गोरखपुर: सदर लोक सभा उपचुनाव में उतरने को लेकर प्रदेश की पूर्व सत्ताधारी पार्टी सपा ने अपनी बांहे चढा ली हैं। पार्टी इस चुनाव में बीजेपी की स्थायी सीट को एक बार पूरे दमखम से अपने कब्जे में लेने के लिए जातिगत मतों के आधार पर सर्वाधिक मतों वाले पिछड़ा वर्ग से प्रत्याशी चयन को लेकर उधेड़बुन में लगी है। किंतु यह भी सत्य है कि पार्टी बीजेपी के कैंडिडेट की राह जोह रही है,जिसे देख उसके मुकाबले का दंगली पहलवान उतारा जा सके।हालांकि पार्टी ने कमोबेश एक विकल्प तैयार भी कर लिया है।

बता दें कि लोक सभा उपचुनाव की तैयारियों को लेकर समाजवादी पार्टी ने तैयारिया तेज कर दी है।पिछले हफ्ते गोरखपुर आये प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल और नेता विपक्ष राम गोविंद चौधरी के तैयारियों की समीक्षा करने के बाद सभी पांच विधानसभा क्षेत्रों के अध्यक्षों ने लखनऊ में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात कर सपा की रणनीति पर भी चर्चा की गई।

प्रत्याशी को लेकर अभी तक किसी नाम पर अंतिम मुहर तो नहीं लगी है, लेकिन पार्टी सूत्रों के अनुसार इस चुनाव में किसी निषाद को पार्टी अपना उम्मीदवार बना सकती है। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बैठक में प्रत्याशियों के चयन से लेकर रणनीति पर चर्चा भी किया। इस दौरान बताया गया कि पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार का चयन हो चुका है, जिसके नाम की घोषणा शीघ्र कर दी जाएगी।

सपा ने गोरखपुर लोकसभा के सभी विधान सभा क्षेत्रों में सर्वाधिक मतदाताओं वाले मछुआरा समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले किसी सजातीय नेता को अपना उम्मीदवार बनाने की सोची है।जिसके तहत पहले पूर्व विधायिका राजमती निषाद और पूर्व विधायक रामभुआल निषाद के नामों पर चर्चा चली,किन्तु बाद में इनको किनारे कर बीते दो वर्षों से जातिगत मतों में फर्श से अर्श पर पहुंचे और पिछले विधानसभा चुनावों में पार्टी के परम्परागत निषाद वोटों में सेंधमारी करने वाले निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ संजय निषाद को भी टारगेट किया था।किन्तु डॉ संजय निषाद और पार्टी के बीच बैनर के मुद्दे पर आम सहमति नही बन पाई।

क्योंकि डॉ संजय निषाद की निषाद पार्टी और डॉ अयूब की पीस पार्टी का गठबंधन है और दोनों की चाहत थी कि अपनी ही पार्टी के बैनर पर चुनाव लड़ें,जिसे सपा समर्थन दे।जबकि सपा अपने बैनर पर चुनाव लड़ाने की इच्छुक थी। इसलिए पूरा मामला खटाई में पड़ता नजर आ रहा था।

इसी बीच समाजवादी पार्टी के थिंक टैंक ने बीच का रास्ता निकाल लिया, जिसमे सपा के बैनर पर निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ संजय निषाद के छोटे पुत्र व उपचुनाव में निषाद पार्टी के लोकसभा प्रभारी सन्तोष निषाद को लड़ाने की बात हुई है।हालांकि अभी पूरी तरह से इसकी पुष्टि नही की गई है,परन्तु जानकारों के मुताबिक बात पक्की है।

इससे सपा के परम्परागत मत तो पार्टी के पक्ष में गिरेंगे ही,साथ मे पिछले चुनाव में बिखरे हुए निषाद मत भी साथ मे जुड़ जाएंगे। जिससे सपा भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार को कड़ा टक्कर देने में सक्षम हो जाएगी।

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