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यूपी बोर्ड की लापरवाही से पीपीगंज क्षेत्र के प्राईवेट परीक्षार्थियो का भविष्य खतरे में

यूपी बोर्ड की लापरवाही, पीपीगंज क्षेत्र के प्राईवेट परीक्षार्थियो का भविष्य खतरे में

गोरखपुर: विश्व की सबसे बड़ी परीक्षा संस्था का दम्भ भरने वाली यूपी बोर्ड की लापरवाही कहे या चूक! इससे गोरखपुर जिले के पीपीगंज क्षेत्र के छात्रो का भविष्य एक साल बर्बाद होने के कगार पर चल रहा है।

ज्ञात हो कि यूपी बोर्ड की परीक्षा 6 फ़रवरी से शुरू हो रही है आज 4 फ़रवरी है और अभी तक पीपीगंज क्षेत्र के किसी स्कूल तक प्राईवेट छात्रों का प्रवेश पत्र नहीं पंहुचा है। लेकिन कुछ छात्रों ने क्षेत्रीय कार्यालय गोरखपुर के कर्मचारियों से येन-केन-प्रकारेण प्रवेश पत्र छुपे तौर पर लिया है।बाकी छात्रों का प्रवेश पत्र अभी तक नही दिया गया है।

जो छात्र पढ़ने की इच्छा रखते है और किसी कारणवश स्कूल में दाखिला लेकर पढ़ नही पाते,उनको सरकार द्वारा यह सुविधा दी गई थी कि ऐसे छात्र भी हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा में प्राईवेट छात्र के रूप में बोर्ड द्वारा तय शुल्क जमा करके परीक्षा में शामिल हो सकते है ।जिसे देखते हुए छात्रों ने फॉर्म भी भर दिया और इन छात्रों का सेन्टर भी बना दिया गया।जिनके रोल नम्बर और कापी और पेपर भी पंहुच गया था पर अधिकारियों की गलती से छात्रों के भविष्य पर ग्रहण लग गया।

यह सिलसिला अभी तक चलता आया है मगर इस वर्ष प्राईवेट फार्म भरने के बाद ऐसे लोग अपने आप को ठगा महसूस कर रहे है। छात्रों के मुताबिक बोर्ड द्वारा निर्धारित शुल्क जमा करने के बावजूद भी परीक्षा में शामिल क्यों नही किया जा रहा है ।सबसे अजीब बात तो यह कि अभी तक परीक्षा शुल्क जमा कर परीक्षा में बैठने की तैयारी में थे और अभी तक प्रवेश पत्र नही मिला। इस लिए इन प्राईवेट छात्रो का एक साल बर्बाद होने के कगार पर आ गया है। और तो और इस साल प्राईवेट फार्म भरे लोगो को किसी बात की सूचना भी नही दी गई।जिससे कि अपने कैरियर के विषय में सोच सके।

जनपद के पीपीगंज क्षेत्र के जिन विद्यालयों के प्राईवेट छात्रों का प्रवेश पत्र नही मिला है। उनमें है भारती उमा वि जसवल बाजार, अमर सिंह उमा वि बढ़या चौक, श्याम कृष्ण इका थवईपार, पंचायत इ का परमेश्वरपुर, किसान इ का ठाकुरनगर आदि कई विद्यालय है। उधर वे विद्यालय भी परेशान है, जहां इन प्राईवेट छात्रों का सेन्टर गया है क्योंकि उन सेन्टरों पर कापी और पेपर पहुच गया है । इन सेन्टरों पर कोई लिखित आदेश भी नही आया है।

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