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Gorakhpur Mahotsav 2018: बीती रात रही भोजपुरी के नाम, पूर्वांचल को समेटे रही भोजपुरी नाईट

गोरखपुर: महानगर में चल रहे गोरखपुर महोत्सव का दूसरा दिन भोजपुरी के नाम रहा। बीती शाम सांस्कृतिक कार्यक्रम सोन चिरैया का शुभारम्भ प्रदेश के प्रमुख सचिव सूचना एवं पर्यटन अवनीश अवस्थी एवं विधायक शीतल पाण्डेय ने दीप प्रज्वलित कर किया। स्व मैनावती देवी को श्रद्धांजलि अर्पित कर शुरू हुई भोजपुरी नाइट।

सुप्रसिद्ध गायिका मालिनी अवस्थी, शरदमणि त्रिपाठी, राकेश श्रीवास्तव एंव अन्य कलाकारों का स्वागत किया गया। सभी ने सामूहिक गीत द्वारा स्व0 मैनावती देवी को श्रद्धांजलि अर्पित किया ।

गोरखपुर महोत्सव के दूसरे दिन भोजपुरी नाइट के तहत लोकगायिका मालनी अवस्थी ने अपने गायन से ऊर्जा भर दिया। शुरुआत में गुरु गोरक्षनाथ को समर्पित भजन प्रस्तुत किया। इसके बाद बेटियो के जन्म पर मैथिली में सिया के जन्म का सोहर, फिर काहे को व्याही विदेश रे लखिया गाकर भाव विभोर कर दिया। फिर फारुआहि नृत्य से सहकलाकारों ने समा बांध अयोध्या के सरयू नदी पर गायन पेश किया।

सोनचिरैया कार्यक्रम के तहत अवध के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के माइग्रेशन पर आधारित विरह गीत”रेलिया बैरन पिया को लिए जाय रे हाय”को गाकर विरहनो के दर्द को उजागर किया।बाबा गोरखनाथ की धरती पर कबीर दास की सूफियाना,और रमैनी पर आधारित ‘ हमे कंगना चढाईबा हमार पियवा”हमे झुलनी चढाईबा,, झुलनी का रंग साँचा हमार पिया”लागल झुलनिय के धक्का,बलम कलकत्ता पहुंच गए, सुनाया।

इसके बाद गाजीपुर, बलिया, आजमगढ़ का धोबिया नृत्य गीत ” भइले बिहान बोले कोइलारिया,उठाये बहुआर”जहां पञ्च, तहा परमेश, अरे छुटका बलम मोरे बड़ा नीक लागे,बसल बा बकरिया में जान रे”स्थानीय लोकगीत बिरहा गाया। माई के भावे लाल चुनरिया,है जगदम्बे मइया भक्ति गीत को इन्ही लोगो ने छीन लीना दुपट्टा मेरा की तर्ज पर गाया।इसके साथ ही कई भोजपुरी गीतों के बॉलीवुड गीत का रूपांतरण भी सुनाया।

बुन्देलखण्डी गीत ‘”गइयो गइयो रे सास,जमाना आयो बहुओं के” और भारत की ऐसी पन्ना मैं वर्णन करू सौ सौ बार के साथ देशभक्ति गीतों को गाया।

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