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वेंटिलेटर पर सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर: आखरी सांस ले रहे हैं कर्मचारी, नहीं मिलती कोई सरकारी मदद

गोरखपुर: सिंगल स्क्रीन सिनेमा घर लुप्त होने के कगार पर पंहुच चुके हैं। जैसे-जैसे हमारा देश तरक्की कर रहा है, वैसे-वैसे कई पुरानी चीजे हमसे जुदा हो जा रही है। उन्ही में से एक है सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर। गोरखपुर यानी प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की, जिनके गृह जनपद में सिंगल स्क्रीन सिनेमा घर लुपत होने के कगार पर है।

सिंगल स्क्रीन सिनेमा घर का नाम सुनते ही सभी के जहन में मनरोंजन और कुछ वक्त बिताने का जरिया याद आता है, पहले लोग पिक्चर देखने के लिए दूर दूर से पैसे खर्चा करके देखने आते थे, लेकिन आज अगर इन्हें फ्री में कोई दिखाए तो भी पिक्चर हालो में उतनी भीड़ नहीं होगी। वजह है, बड़े बड़े मल्टीप्लेक्स और एसआरएस जैसे बड़े बड़े परदे का दस्तक देना।

गोरखपुर की बात करे तो, तकरीबन 13 सिंगल स्क्रीन सिनेमा घर है, जिनमे से महज 4 सिंगल स्क्रीन सिनेमा घर चल रहे है। जो चल रहे है, वो भी बंद होने के कगार पर है। पुराने सिंगल स्क्रीन सिनेमा घरो की माने तो इन सिंगल स्क्रीन सिनेमा घर की स्थिति के एक वजह और भी है, कि इंटरनेट के जरिये यानी आनलाइन (युऍफ़ओ) के जरिये, अब सभी सिनेमाघरों में फिल्मे दिखाई जा रही है, जिसके वजह से एक ही पिक्चर सभी सिनेमा घरो में लग जाते है, और लोग बट जाते है, जिसके वजह से लोगो का रुझान कम हो गया।

लगातार बंद हो रहे सिंगल स्क्रीन सिनेमाहाल के बारे में जब सहायक कर आयुक्त से बात की गई तो उन्होंने बताया कि सिनेमा हॉल मालिकों को पुनः इस कारोबार से जुड़ने के लिए सरकार ने कई योजनाएं लागू की है। इन योजनाओं में सिनेमा मालिकों को कई तरह की सब्सिडी दी जा रही हैं पर इस कारोबार से सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर मालिकों का रुझान कम हो गया है क्योंकि अब मल्टीप्लैक्स का चलन अधिक हो गया है। लोग सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में जाने के बजाय मल्टीप्लेक्स सिनेमा घरों में ज्यादा जाते हैं।

उन्होंने बताया कि एक मध्यवर्गीय परिवार के लिए मल्टीप्लेक्स सिनेमा घरों में जाना उनकी जेब पर भारी पड़ता है जबकि अभी भी सिंगल स्क्रीन सिनेमा घर आम लोगों की बजट में है। सहायक आयुक्त ने बताया कि सरकार की योजनाओं के बारे में सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर मालिकों को समय समय पर इसके प्रति उनका रुझान बहुत ही कम है।

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